वाराणसी में राजभर बनाम क्षत्रिय टकराव से थमी सांसें, पुलिस के भी छूटे पसीने
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 09:08 PM
UP News : उत्तर प्रदेश के वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र के छितौना गांव में क्षत्रिय और राजभर समाज के बीच हुए टकराव ने अब तूल पकड़ लिया है। विवाद ने इस कदर उग्र रूप ले लिया कि करणी सेना और क्षत्रिय महासभा ने रविवार को महापंचायत बुला ली। प्रशासन ने पंचायत को रोकने के लिए तमाम रास्तों को सील कर दिया, लेकिन बावजूद इसके क्षत्रिय समाज के लोग संदहा चौराहे तक पहुंचने में कामयाब रहे। वहां करीब दो घंटे तक जबरदस्त हंगामा और पुलिस से धक्का-मुक्की होती रही। हालात काबू में लाने के लिए पुलिस को प्रदर्शनकारियों के आगे हाथ जोड़ने तक की नौबत आ गई।
क्या है पूरा मामला?
5 जुलाई को छितौना गांव में खेत में जानवर घुसने को लेकर क्षत्रिय और राजभर पक्ष के बीच झगड़ा हुआ। राजभर पक्ष की एफआईआर पर क्षत्रिय समाज के दो युवकों अमित और अनुराग को जेल भेज दिया गया, जिससे मामला गरमाता गया। करणी सेना ने आरोप लगाया कि श्रम मंत्री अनिल राजभर के दबाव में क्षत्रिय पक्ष की FIR दर्ज नहीं की गई। इसके बाद करणी सेना और क्षत्रिय महासभा ने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया और कार्रवाई न होने पर महापंचायत बुलाने का ऐलान कर दिया। रविवार को भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी के बावजूद सैकड़ों की संख्या में लोग संदहा चौराहे पर पहुंच गए।
क्या हुआ महापंचायत में?
महापंचायत रोकने पहुंचे DCP प्रमोद कुमार और अन्य पुलिस अधिकारी प्रदर्शनकारियों को समझाने में जुटे रहे। लेकिन भीड़ बेकाबू होती रही, पुलिस से धक्का-मुक्की हुई और कई बार अधिकारी हाथ जोड़कर शांति की अपील करते दिखे। धारा-163 लागू होने के बावजूद पुलिस सख्ती नहीं दिखा पाई। प्रशासन की तरफ से बाद में आश्वासन दिया गया कि निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी तब जाकर मामला कुछ हद तक शांत हुआ।
क्यों भड़का मामला?
बताया जा रहा है कि यह मामला इसलिए भड़का क्योंकि इसपर कई तरह के आरोप लगाए गए। केस दर्ज करने में पक्षपात का आरोप, मंत्री अनिल राजभर पर दखलंदाजी का आरोप, क्षत्रिय पक्ष के दो युवकों को बिना पर्याप्त जांच के जेल भेजना, करणी सेना व अन्य संगठनों की अनदेखी इसके बाद आक्रोश काफी बढ़ गया।
प्रशासन की सफाई
DCP वरुणा प्रमोद कुमार ने बताया कि, “कल सभी पक्षों से बात कर शांति बनाए रखने का भरोसा लिया गया था। धारा-163 के तहत प्रतिबंध लागू था और सोशल मीडिया पर भी नजर रखी गई थी। गांव में और उसके आसपास सुरक्षा बल तैनात हैं और बाहर से आने वाले लोगों को वापस भेजा गया।” हालांकि, प्रशासन ने दावा किया है कि हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन करणी सेना और क्षत्रिय संगठनों की नाराजगी अभी पूरी तरह शांत नहीं हुई है। वे एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए दबाव बनाने की रणनीति में जुटे हुए हैं। अगर जल्द कार्रवाई या संवाद नहीं हुआ तो मामला फिर उग्र रूप ले सकता है।
क्या है धारा-163 ? What is Section 163?
धारा-163 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) के तहत एक ऐसी कानूनी व्यवस्था है जिसे खास हालात में सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए लागू किया जाता है। यह प्रावधान पहले की भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 के समरूप है। इसका इस्तेमाल जिला मजिस्ट्रेट या सरकार द्वारा नियुक्त कोई अधिकृत अधिकारी तब करता है, जब किसी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा हो जैसे दंगा, हिंसा, भीड़ जुटने की आशंका या किसी प्रकार की सामूहिक अशांति। धारा 163 लागू होने पर उस इलाके में कुछ विशेष गतिविधियों पर पाबंदी लग जाती है जैसे चार या अधिक लोगों का एक जगह जमा होना, हथियार लेकर चलना, या ऐसा कोई भी कदम जिससे तनाव बढ़ सकता हो।