उत्तर प्रदेश के इन शहरों में किराया हुआ बेकाबू, 1 BHK लेना भी बन गया सपना
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 09:54 AM
उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों में नौकरी तो है, लेकिन सिर छुपाने की जगह मिलना अब आसान नहीं रहा। लगातार बढ़ती महंगाई और रियल एस्टेट की ऊंची कीमतों ने आम नौकरीपेशा लोगों की कमर तोड़ दी है। स्थिति यह है कि अब उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में 1 BHK फ्लैट में रहना भी सपने जैसा लगने लगा है। UP News :
किराए की बढ़ती मार ने तोड़ा बजट
देशभर में महंगाई के साथ-साथ यूपी के शहरी इलाकों में किराए के दाम तेजी से बढ़े हैं। नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर और गोरखपुर जैसे शहरों में किराया अब आम मध्यमवर्गीय लोगों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है।
* नोएडा: 1 बीएचके फ्लैट का किराया 18,000 से 22,000 तक
* गाजियाबाद: औसतन 15,000 से 19,000
* लखनऊ: 12,000 से 17,000
* कानपुर: 10,000 से 14,000
* गोरखपुर: 9,000 से 12,000
मकानों का किराया तो बढ़ा ही है, लेकिन सैलरी उतनी नहीं बढ़ रही। नतीजा यह है कि अब लोग शहर के बाहरी इलाकों में या साझा आवास (लिव इन) में रहने को मजबूर हैं।
सपनों का घर अब हो गया दूर का सपना
30 से 35 हजार रुपये महीना कमाने वाले युवा कर्मचारियों के लिए हर महीने का किराया, बिजली-पानी और ट्रांसपोर्ट का खर्च मिलाकर जेब पर भारी पड़ रहा है। ऐसे में स्वतंत्र रूप से रहना तो दूर, अब रूममेट के बिना शहर में टिकना भी मुश्किल हो गया है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, नोएडा और गाजियाबाद में कॉर्पोरेट सेक्टर और आईटी कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी ने रेंटल मार्केट को गर्म कर दिया है। वहीं, लखनऊ और कानपुर जैसे शहरों में रियल एस्टेट डेवलपमेंट तो बढ़ा है, पर मांग उसके मुकाबले कहीं ज्यादा है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि अगर महंगाई और प्रॉपर्टी टैक्स में नियंत्रण नहीं हुआ, तो आने वाले सालों में छोटे शहरों में भी किराए की दरें दोगुनी हो सकती हैं। ऐसे में नौकरीपेशा वर्ग के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी, कम सैलरी में कैसे जिएं शहर का जीवन? UP News