अंगूठी बेचने वाला बना 'गाड़ी वाला मौलाना', अब जांच के घेरे में अफसरशाही
UP News
उत्तर प्रदेश
RP Raghuvanshi
01 Dec 2025 11:25 AM
उत्तर प्रदेश
RP Raghuvanshi
01 Dec 2025 11:25 AM
UP News : धर्मांतरण और अवैध साम्राज्य खड़ा करने के आरोपी जमालुद्दीन उर्फ छांगुर केस में अब बड़ा प्रशासनिक भूचाल आ सकता है। सूत्रों के मुताबिक, शासन ने 2019 से 2024 के बीच बलरामपुर में तैनात एक तत्कालीन एडीएम, दो सीओ और एक इंस्पेक्टर की भूमिका को संदिग्ध माना है। इन अधिकारियों की भूमिका की गंभीर जांच शुरू हो चुकी है और जल्द ही उन पर कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।
अफसरों की नजरअंदाजी में फलता-फूलता रहा छांगुर का साम्राज्य
यह वही दौर था जब छांगुर ने जिले में अपने धर्मांतरण के रैकेट को खुलेआम चलाया और कई करोड़ की संपत्तियों पर कब्जा कर 'धार्मिक आंदोलन' के नाम पर जमीनें और दौलत बटोरी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुछ अफसरों की मिलीभगत और चुप्पी ने छांगुर को संरक्षण देने का काम किया। एसटीएफ को पूर्व में भी कुछ अधिकारियों के खिलाफ इनपुट मिले थे, मगर साक्ष्यों की कमी के चलते कार्रवाई नहीं हो सकी। अब जब ठोस प्रमाण मिले हैं, तो इन पर प्रारंभिक जांच और विभागीय कार्रवाई की तैयारी तेज हो गई है।
दहेज में लिया 5 करोड़ का शोरूम
छांगुर के खिलाफ दर्ज एफआईआर और जांच रिपोर्ट के अनुसार, उसने उतरौला के मनकापुर रोड पर स्थित एक करीब 5 करोड़ रुपये के शोरूम को दहेज के रूप में हड़प लिया। यह शोरूम उसकी करीबी नीतू उर्फ नसरीन की बेटी से अपने नाती की शादी कराने के एवज में मिला। सूत्रों के मुताबिक, 12 नवंबर 2023 को यह जमीन नीतू के नाम खरीदी गई और उसे खतौनी में भी दर्ज करा दिया गया। बाद में पता चला कि यह भूमि तालाब के रूप में दर्ज थी, जिस पर नगर पालिका ने निर्माण रोकने के लिए एडीएम को पत्र भी भेजा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई जिससे अफसरों की भूमिका और भी संदिग्ध हो गई।
पैसे और गाड़ियों के बदले मिली सरकारी चुप्पी?
एफआईआर में यह भी आरोप है कि पुलिस विभाग के कई अफसरों ने छांगुर से मोटी रकम, यहां तक कि वाहन तक लिए, ताकि उसे बचाया जा सके। इस आरोप की जांच अब ईडी, एसटीएफ और एटीएस मिलकर कर रही हैं। विभागीय हलकों में जांच की आहट से हड़कंप मच गया है।
धर्मांतरण की बड़ी साजिश का खुलासा
यूपी एटीएस की गिरफ्त में आए छांगुर को लेकर लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, छांगुर ने नेपाल सीमा से सटे 46 गांवों के युवाओं को धर्मांतरण के लिए टारगेट किया था। उसका उद्देश्य था, इन गांवों में इस्लामिक नेटवर्क खड़ा करना और संगठित गतिविधियों को अंजाम देना। छांगुर ने इसके लिए लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई थी जिसमें विदेशी फंडिंग की भी बात सामने आई है।
अंगूठी बेचने वाला बना फंडेड मौलाना
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि 2015 तक छांगुर पुरानी बाइक पर घूमकर नग और अंगूठियां बेचता था। लेकिन 2020 के बाद उसकी आर्थिक स्थिति में अचानक भारी उछाल आया। आज उसके पास लग्जरी गाड़ियों का काफिला और कई जिलों में संपत्ति है। यही नहीं, उसके करीबियों की संपत्तियां भी अचानक कई गुना बढ़ गईं जिनकी जांच अब ईडी के रडार पर है।
क्या आगे और नाम आएंगे सामने?
सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में दो तहसीलदार सहित कई और अधिकारियों को जांच के दायरे में लाया जा सकता है। सरकार इस पूरे प्रकरण को आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक भ्रष्टाचार से जोड़कर देख रही है।