2027 की नींव पंचायत चुनाव से डालेगी सपा, हर बूथ पर उतरेगा जमीनी प्लान!
UP News
उत्तर प्रदेश
RP Raghuvanshi
19 Jul 2025 02:01 PM
UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में पंचायत चुनाव अब सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं रहे बल्कि ये विधानसभा की जमीन तैयार करने का अहम जरिया बन चुके हैं। इसे भांपते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) ने पूरी ताकत से पंचायत चुनावों में उतरने की रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी न केवल उम्मीदवार उतार रही है, बल्कि बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत कर 2027 के विधानसभा चुनाव की नींव डालने में जुट गई है।
‘गांव-गांव चले सपा’ अभियान की शुरुआत
सपा की रणनीति साफ है गांवों से लेकर विधानसभा तक अपनी सियासी पकड़ दोबारा कायम करना। पार्टी अब ‘उल्टा पिरामिड मॉडल’ पर काम करेगी, जिसमें शीर्ष नेता खुद गांवों की ओर रुख करेंगे। वरिष्ठ नेता बूथ और सेक्टर स्तर के कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे, बैठकें करेंगे और जिला पंचायत सदस्य पद के उम्मीदवारों का चयन करेंगे। प्रधानी के चुनाव में भले ही पार्टी खुलकर किसी को टिकट न दे, लेकिन कार्यकर्ताओं के बीच सामंजस्य बनाकर उन्हें मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
पंचायत से विधानसभा की ओर सपा की चाल
सपा मानती है कि ग्रामीण वोट बैंक ही उसकी असली ताकत है। 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा को जिस भारी जनसमर्थन ने सत्ता दिलाई थी, उसमें गांव-देहात की भूमिका अहम रही थी। अब 2027 के लिए भी पार्टी उसी फॉर्मूले पर लौट रही है। पंचायत चुनाव को सपा एक ‘लैब’ की तरह इस्तेमाल करेगी, जिसमें न केवल कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ेगी बल्कि उनका मनोबल भी ऊंचा रहेगा।
जिले में पंचायतों की भूमिका अहम
सीतापुर जिले की बात करें तो यहां 1,588 ग्राम पंचायतें हैं और 30 लाख से अधिक मतदाता हैं। इनमें से अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, लेकिन शहरी मतदाता भी किसी न किसी रूप में गांव से जुड़े हैं। यही कारण है कि सपा इन पंचायतों को मजबूत पकड़ का केंद्र बिंदु मानकर चल रही है।
संगठन की ताकत से जीत की तैयारी
सपा का संगठनात्मक ढांचा पंचायत स्तर तक सक्रिय है। 1 लाख से अधिक सक्रिय कार्यकर्ता, 45,600 से ज्यादा बूथ लेवल पदाधिकारी, 4,320 सेक्टर स्तर के कार्यकर्ता, 1,276 जोनल स्तर के पदाधिकारी। इन सभी को पंचायत चुनाव के जरिए एक्टिव कर, सपा पूरे जिले में जमीनी नेटवर्क खड़ा करने की तैयारी में है।
क्या बदलेगी सियासत की तस्वीर?
पंचायत चुनावों को लेकर समाजवादी पार्टी की यह सक्रियता कई सवाल खड़े करती है। क्या इससे यूपी की राजनीतिक तस्वीर बदलेगी? क्या सपा फिर से गांवों के सहारे सत्ता के शिखर तक पहुंचेगी? जवाब आने वाले महीनों में पंचायत चुनावों के नतीजों से मिल सकता है, लेकिन इतना तय है कि अखिलेश यादव की सपा अब कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।