मुख्यमंत्री झूठ बोल रहे हैं : कांवड़ यात्रा पर योगी और राम गोपाल आमने-सामने
UP News
उत्तर प्रदेश
चेतना मंच
20 Jul 2025 05:04 PM
UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर श्रद्धा बनाम सियासत की लकीर खिंच गई है। कांवड़ यात्रा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सांसद राम गोपाल यादव आमने-सामने आ गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ यात्रा को "बदनाम करने की साजिश" करार देते हुए कहा कि "कांवड़ियों को मीडिया ट्रायल के जरिए अपराधी और आतंकवादी तक कहा जा रहा है।" योगी ने इसे भारत की सांस्कृतिक विरासत को कलंकित करने वाली मानसिकता का हिस्सा बताया। लेकिन इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए राम गोपाल यादव ने रविवार को कहा कि "मुख्यमंत्री झूठ बोल रहे हैं। कांवड़ियों को आतंकवादी कहने वाला कोई नहीं है।" "असल में कांवड़ियों में हमारे समर्थक ज्यादा हैं, उनके कौन से समर्थक हैं?"
मिजार्पुर की घटना बनी बहस की वजह
राम गोपाल यादव ने मिजार्पुर रेलवे स्टेशन की उस घटना का हवाला भी दिया जिसमें टिकट खरीदने को लेकर सीआरपीएफ के जवान पर कांवड़ यात्रियों ने हमला कर दिया था। उन्होंने सवाल किया कि योगी आदित्यनाथ उस हिंसा की निंदा क्यों नहीं कर रहे? राम गोपाल ने कहा "कांवड़ियों ने जिस तरह जवान के साथ उद्दंडता की, वो शर्मनाक है। मुख्यमंत्री को उसकी आलोचना करनी चाहिए,"।
योगी का जवाब, "कांवड़ यात्रा एकता का प्रतीक"
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो दिन पहले वाराणसी में कांवड़ यात्रा को सामाजिक समरसता का प्रतीक बताते हुए कहा था कि "मजदूर से लेकर उच्च वर्ग तक, हर तबके के लोग इसमें भाग लेते हैं। इसमें कोई भेदभाव नहीं दिखता।" हालांकि, उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ लोग इस यात्रा को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं और इसे "उपद्रवी" व "आतंकवादी गतिविधियों" से जोड़ रहे हैं।
सवाल कई, जवाब अधूरे
राम गोपाल यादव का पलटवार साफ संकेत देता है कि सपा इस मुद्दे पर योगी सरकार को "धार्मिक भावनाओं की आड़ में झूठ फैलाने" का आरोप लगा रही है। वहीं योगी सरकार इसे बदनाम करने की राजनीतिक मुहिम बता रही है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या वाकई कोई बड़ा वर्ग कांवड़ियों को "आतंकवादी" कह रहा है, जैसा योगी दावा कर रहे हैं? या यह बयान राजनीतिक लाभ के लिए भावनात्मक ध्रुवीकरण का प्रयास है? और अगर कानून-व्यवस्था की घटनाएं सामने आती हैं, तो क्या सरकार उन्हें धार्मिक चश्मे से देखेगी या नियम-संविधान के आधार पर?
श्रद्धालु और उपद्रवी में फर्क करना जरूरी
कांवड़ यात्रा करोड़ों लोगों की आस्था का विषय है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति या समूह इस आस्था के नाम पर कानून हाथ में लेता है, तो कार्रवाई होनी ही चाहिए, चाहे वो किसी भी दल का समर्थक क्यों न हो। राजनीतिज्ञों को इस पर विचार करना होगा कि "यात्रा की गरिमा बचानी है या उसे सियासी हथियार बनाना है?"