यूपी के इस शहर के सीएमओ की कुर्सी का रंग बदला तीन बार : टॉवेल के बहाने कौन-सा संदेश?
UP News
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 02:34 PM
UP News : स्वास्थ्य विभाग के गलियारों से एक अनोखी सियासी-संकेतों वाली कहानी निकल रही है। कानपुर सीएमओ आफिस की कुर्सी पर बिछने वाले तौलिए (टॉवेल) का रंग अब बहस का विषय बन गया है। एक महीने के भीतर यह टॉवेल भगवा, सफेद और अब नीले रंग में बदल चुका है। यह मामूली सा प्रतीत होने वाला बदलाव अब प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल, एक बार फिर डॉ. हरिदत्त नेमी कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) की कुर्सी पर लौट आए हैं। 19 जून को निलंबन, फिर हाई कोर्ट से स्टे, और अब शासन से पुन: बहाली के बाद 17 जुलाई को उन्होंने कार्यभार संभाल लिया है।
टॉवेल का बदलता रंग, इत्तेफाक या इशारा?
जब जून में डीएम के औचक निरीक्षण के दौरान डॉ. नेमी सीएमओ थे, तब कुर्सी पर भगवा रंग का टॉवेल बिछा देखा गया था। निलंबन के बाद जब कार्यभार डॉ. उदयनाथ ने संभाला, तब वही टॉवेल सफेद रंग में बदल गया। अब 17 जुलाई को जब डॉ. नेमी दोबारा पद पर लौटे, तो टॉवेल का रंग नीला हो गया। ये परिवर्तन सामान्य लग सकते हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे राजनीतिक और वैचारिक प्रतीकों के रूप में देखा जा रहा है। खासकर जब भगवा को हिंदुत्व, सफेद को तटस्थता और नीले को सामाजिक न्याय या दलित चेतना से जोड़ा जाता है।
फिर बहाल हुए डॉ. हरिदत्त नेमी
19 जून को डॉ. नेमी को तत्कालीन डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह की संस्तुति पर निलंबित किया गया था। इसके पीछे स्वास्थ्य सेवाओं की अनियमितताओं से लेकर प्रशासनिक असहमति तक की बातें सामने आईं। निलंबन के बाद उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस कर डीएम पर भेदभाव और अपमानजनक व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए। 8 जुलाई को डॉ. नेमी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत पाई और कोर्ट ने उनके निलंबन पर स्टे दे दिया। इसके बाद शासन ने 16 जुलाई को उनका निलंबन रद कर, तत्कालीन सीएमओ डॉ. उदयनाथ सिंह को वापस श्रावस्ती भेज दिया।
कुर्सी पर वापसी, लेकिन संदेश साफ नहीं
17 जुलाई को डॉ. नेमी ने एक बार फिर कार्यभार ग्रहण किया। लेकिन इस बार चर्चा उनके अधिकार ग्रहण की प्रक्रिया से अधिक कुर्सी पर पड़े नीले तौलिए को लेकर हो रही है। सवाल यह है कि क्या यह रंग किसी विचारधारा का संकेत है या प्रशासनिक सेटअप में किसी असंतुलन का प्रतीक?
समझिए संकेतों की राजनीति
भगवा टॉवेल क्या यह पूर्व सरकार या किसी वैचारिक झुकाव का प्रतीक था? इसके बाद सफेद टॉवेल, क्या यह तटस्थता या संक्रमण काल की निशानी थी? और अब नीला टॉवेल, क्या यह सामाजिक न्याय से जुड़ा कोई संदेश है या बस इत्तेफाक? इस विषय पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इसे केवल रंगों की अदला-बदली नहीं, बल्कि प्रशासनिक संकेतों का सिलसिला माना जा रहा है। डॉ. हरिदत्त नेमी की वापसी के साथ एक बार फिर कानपुर का सीएमओ आॅफिस चर्चा में है, लेकिन इस बार फाइलों और आदेशों से ज्यादा कुर्सी पर बिछी टॉवेल की वजह से। प्रशासनिक सेवा में प्रतीकों का महत्व कम नहीं होता, और जब जनता की नजरें हर छोटे बदलाव पर हों, तब टॉवेल का रंग भी एक राजनीतिक विमर्श बन जाता है।