उत्तर प्रदेश के इस चर्चित IAS अधिकारी की घेराबंदी तेज
UP News
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चेतना मंच
29 Nov 2025 01:21 PM
UP News : उत्तर प्रदेश के चर्चित IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश की घेराबंदी और तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश में अनेक पदों पर तैनात रह चुके IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश (IAS Officer Abhishek Prakash) का बचना अब मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन हो चुका है। उत्तर प्रदेश की आधा दर्जन जांच एजेंसिया तथा जांच टीम अभिषेक प्रकाश के कारनामों की जांच कर रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने एक आदेश जारी करके IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश की प्रॉपर्टी का पूरा विवरण मांग लिया है।
उत्तर प्रदेश विजिलेंस विभाग ने मांगा प्रॉपर्टी का विवरण
उत्तर प्रदेश की सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस विभाग) ने IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश के मामले की जांच को नई दिशा दे दी है । उत्तर प्रदेश विजिलेंस विभाग में तैनात पुलिस अधीक्षक ने अभिषेक प्रकाश की तैनाती वाले स्थानों से लेकर उसके गृह प्रदेश बिहार तक से प्रॉपर्टी का पूरा विवरण जुटाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में अलीगढ़ जिले के जिला प्रशासन से भी अभिषेक प्रकाश की प्रॉपर्टी का विवरण माना गया है। उत्तर प्रदेश की अलग-अलग एजेंसी पहले से ही अभिषेक प्रकाश के अलग-अलग मामलों की जांच कर रही हैं।
मूल रूप से बिहार का रहने वाला है उत्तर प्रदेश का IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश
आपको बता दें कि, उत्तर प्रदेश का चर्चित IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश मूल रूप से बिहार के सीवान जिले के जीरादोई के निवासी हैं। अलीगढ़ में जिलाधिकारी के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने स्वयं या अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर कोई संपत्ति खरीदी है। संपत्ति खरीदी हो तो उसका ब्योरा उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा शासन ने IAS अभिषेक प्रकाश के पिता ओम प्रकाश, माता विभा सिन्हा और पत्नी विजय लक्ष्मी के नाम पर जारी हुए शस्त्र लाइसेंस का भी ब्योरा मांगा है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में तैनात जिलाधिकारी संजीव रंजन ने बताया कि शासन से जो जानकारी मांगी जाएगी उसको उपलब्ध कराया जाएगा। पत्र के बारे में जानकारी नहीं है।
निलंबित अभिषेक प्रकाश के करीबी निकांत जैन के उद्योगपति से रिश्वत मांगने के मामले में शासन के प्रगति पूछते ही एसआईटी ने जांच तेज कर दी है। एसआईटी जेल में बंद निकांत जैन से जल्दी ही पूछताछ करेगी। इसके लिए उसने कोर्ट में अर्जी दी थी। कोर्ट इस मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर नाराजगी भी जता चुकी है। यही वजह है कि उसने देर से अर्जी देने पर निकांत जैन की रिमाण्ड अर्जी स्वीकार नहीं की थी। एसआईटी के एएसपी विकास चन्द्र त्रिपाठी ने अपनी टीम के साथ निकांत जैन का गोमतीनगर स्थित दफ्तर खंगाला था। इसमें कई लेन-देन का ब्योरा मिला था। पूछताछ में निकोत के परिवारीजन कई जानकारियां नहीं दे सके थे। इसके अलावा कई और बिन्दुओं पर निकांत के बयान जरूरी हो गए।
इसके लिए एसआईटी ने निकांत के जेल में बयान लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी। इस प्रकरण में पुलिस की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में आई थी। एफआईआर दर्ज होने के चार दिन बाद ही कोर्ट ने गोमतीनगर पुलिस से नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने पुलिस से कहा था कि रिश्वत के लिए निकांत जैन का नम्बर देने वाले अधिकारी का नाम स्पष्ट करें। इस पर पुलिस ने कोर्ट को अभी तक इस अफसर का नाम नहीं साफ किया। इस मामले में 20 मार्च को गोमतीनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी तब निकांत जैन को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसी दिन इन्वेस्ट यूपी के सीईओ अभिषेक प्रकाश को निलम्बित भी कर दिया गया था। एक बार फिर उत्तर प्रदेश का चर्चित IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश चारों तरफ से घिरता हुआ नजर आ रहा है।