UP News : आजादी के अमृतकाल का सच, बाप के कंघे पर 15 किलोमीटर तक बेटे का शव
Greater Noida News: Youth dies after being hit by a vehicle
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 02:03 AM
Prayagraj: प्रयागराज। आजादी के अमृतकाल में एक बार फिर मानवता शर्मसार हुई है। कहते हैं पिता के कंधे पर बेटे का शव जीवन का सबसे बड़ा दुख होता है। गंगा, जमुना और सरस्वती के संगम वाले शहर में ऐसा ही एक वाकया सामने आया है। वहां एक व्यक्ति के पास 2200 रुपये न होने पर उसे एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। आखिर, मजबूर पिता अपने 10 साल के बेटे के शव को एक कंधे पर रखकर 15 किलोमीटर तक पैदल चला। उसके बाद कुछ सैनिकों की नजर उस पर पड़ी और उन्होंने शव को घर तक पहुंचाया।
करछना के रामपुर उपरहार में रहने वाले बजरंगी यादव के घर में पत्नी सविता व पांच बच्चे रेखा (11), शुभम यादव (10), रीतू (8), प्रीति (6) विपिन (5) हैं। सोमवार को बेटा शुभम यादव गांव में दोस्तों के साथ खेल रहा था। उसी दौरान वह करंट की चपेट में आ गया। उसे स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
बेटे की मौत के शव ले जाने के लिए पिता बजरंगी यादव से एंबुलेंस के किराये के लिए 2200 रुपये की मांग की गई। लेकिन, उनके पास इतने रुपये नहीं थे। लिहाजा, उसे एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। आखिर, बदकिस्मत पिता ने बेटे के शव को अपने कंधे पर लादकर ले जाने का फैसला किया। पिता अपने 10 साल के बेटे के शव को अपने एक कंधे पर लादकर 15 किलोमीटर तक पैदल चला। वह अभी रास्ते में ही था कि उस पर कुछ सैनिकों की नजर पड़ी। इंसानियत दिखाते हुए उन सैनिकों ने शव को घर तक पहुंचाया।