उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में फिर गूंजा इस IAS अफसर का नाम
सूत्रों के अनुसार, 14 मार्च के बाद उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में कोई बड़ा फैसला ले सकती है। अभिषेक प्रकाश वही अधिकारी हैं, जो कभी उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक परियोजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर रहे।

UP News : उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में एक बार फिर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश का नाम चर्चा में है। लंबे समय से निलंबित चल रहे 2006 बैच के इस अधिकारी की बहाली को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, 14 मार्च के बाद उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में कोई बड़ा फैसला ले सकती है। अभिषेक प्रकाश वही अधिकारी हैं, जो कभी उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक परियोजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर रहे। लेकिन वर्ष 2025 में उन पर सोलर परियोजना की मंजूरी के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगा और सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया। अब, जब अदालत से उन्हें राहत मिली है, तो उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में उनकी संभावित वापसी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
उत्तर प्रदेश में क्यों फिर चर्चा में आए अभिषेक प्रकाश
अभिषेक प्रकाश की बहाली की चर्चा यूं ही नहीं उठी है। दरअसल, फरवरी 2026 में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले में दाखिल चार्जशीट को साक्ष्यों के अभाव में निरस्त कर दिया था। अदालत की इस राहत के बाद यह माना जाने लगा कि उत्तर प्रदेश सरकार अब उनके निलंबन पर पुनर्विचार कर सकती है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में यह सवाल फिर उठने लगा है कि क्या अभिषेक प्रकाश एक बार फिर सक्रिय भूमिका में नजर आएंगे। अभी आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है, लेकिन संकेतों ने इस मुद्दे को फिर सुर्खियों में ला दिया है।
क्या था रिश्वत मांगने का आरोप
पूरा मामला 20 मार्च 2025 का है। उसी दिन लखनऊ के गोमतीनगर थाने में एक एफआईआर दर्ज की गई थी। यह कार्रवाई उस शिकायत के आधार पर हुई थी, जो एक कंपनी के प्रतिनिधि द्वारा मुख्यमंत्री को भेजी गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दिलाने के लिए परियोजना लागत का 5 प्रतिशत कमीशन मांगा गया। मामला गंभीर था, इसलिए सरकार ने तत्काळ कार्रवाई करते हुए अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया। इस घटनाक्रम ने उस समय उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र और निवेश संबंधी व्यवस्थाओं पर भी कई सवाल खड़े किए थे।
बचाव पक्ष ने क्या कहा
मामले में अभिषेक प्रकाश की ओर से पेश पक्ष ने आरोपों को पूरी तरह कमजोर और अस्पष्ट बताया। उनकी तरफ से कहा गया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस और प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद नहीं थे। यह भी दलील दी गई कि न तो किसी तरह की रकम वास्तव में दी गई, न कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति सौंपी गई और न ही किसी प्रकार की धमकी या दबाव का प्रमाण सामने आया। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि जिस एक करोड़ रुपये नकद की चर्चा की गई, उसकी कोई बरामदगी नहीं हुई। उनकी ओर से इस पूरे विवाद को प्रतिस्पर्धा, प्रशासनिक भ्रम और अपुष्ट आरोपों का परिणाम बताया गया।
हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद बदला माहौल
फरवरी 2026 में जब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने चार्जशीट को साक्ष्य के अभाव में रद्द किया, तब इस मामले का पूरा परिदृश्य बदल गया। अदालत की इस टिप्पणी के बाद उत्तर प्रदेश में अभिषेक प्रकाश की बहाली की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। प्रशासनिक हलकों में इसे एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है। यही कारण है कि अब यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या उत्तर प्रदेश सरकार उन्हें फिर से जिम्मेदारी सौंप सकती है।
कौन हैं आईएएस अभिषेक प्रकाश
अभिषेक प्रकाश उत्तर प्रदेश कैडर के 2006 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 21 दिसंबर 1982 को हुआ था। मूल रूप से बिहार से ताल्लुक रखने वाले अभिषेक प्रकाश ने आईआईटी रुड़की से बीटेक की पढ़ाई की। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2005 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया 8वीं रैंक हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया और उत्तर प्रदेश के कई अहम जिलों में जिम्मेदारी संभाली। अभिषेक प्रकाश लखीमपुर खीरी, लखनऊ, हमीरपुर, बरेली और अलीगढ़ जैसे जिलों में डीएम और कलेक्टर रह चुके हैं। उत्तर प्रदेश में उनकी पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में रही है, जिन्होंने प्रशासनिक और निवेश संबंधी भूमिकाओं में महत्वपूर्ण काम किया। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में एक बार फिर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश का नाम चर्चा में है। लंबे समय से निलंबित चल रहे 2006 बैच के इस अधिकारी की बहाली को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, 14 मार्च के बाद उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में कोई बड़ा फैसला ले सकती है। अभिषेक प्रकाश वही अधिकारी हैं, जो कभी उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक परियोजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर रहे। लेकिन वर्ष 2025 में उन पर सोलर परियोजना की मंजूरी के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगा और सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया। अब, जब अदालत से उन्हें राहत मिली है, तो उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में उनकी संभावित वापसी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
उत्तर प्रदेश में क्यों फिर चर्चा में आए अभिषेक प्रकाश
अभिषेक प्रकाश की बहाली की चर्चा यूं ही नहीं उठी है। दरअसल, फरवरी 2026 में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले में दाखिल चार्जशीट को साक्ष्यों के अभाव में निरस्त कर दिया था। अदालत की इस राहत के बाद यह माना जाने लगा कि उत्तर प्रदेश सरकार अब उनके निलंबन पर पुनर्विचार कर सकती है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में यह सवाल फिर उठने लगा है कि क्या अभिषेक प्रकाश एक बार फिर सक्रिय भूमिका में नजर आएंगे। अभी आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है, लेकिन संकेतों ने इस मुद्दे को फिर सुर्खियों में ला दिया है।
क्या था रिश्वत मांगने का आरोप
पूरा मामला 20 मार्च 2025 का है। उसी दिन लखनऊ के गोमतीनगर थाने में एक एफआईआर दर्ज की गई थी। यह कार्रवाई उस शिकायत के आधार पर हुई थी, जो एक कंपनी के प्रतिनिधि द्वारा मुख्यमंत्री को भेजी गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दिलाने के लिए परियोजना लागत का 5 प्रतिशत कमीशन मांगा गया। मामला गंभीर था, इसलिए सरकार ने तत्काळ कार्रवाई करते हुए अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया। इस घटनाक्रम ने उस समय उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र और निवेश संबंधी व्यवस्थाओं पर भी कई सवाल खड़े किए थे।
बचाव पक्ष ने क्या कहा
मामले में अभिषेक प्रकाश की ओर से पेश पक्ष ने आरोपों को पूरी तरह कमजोर और अस्पष्ट बताया। उनकी तरफ से कहा गया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस और प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद नहीं थे। यह भी दलील दी गई कि न तो किसी तरह की रकम वास्तव में दी गई, न कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति सौंपी गई और न ही किसी प्रकार की धमकी या दबाव का प्रमाण सामने आया। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि जिस एक करोड़ रुपये नकद की चर्चा की गई, उसकी कोई बरामदगी नहीं हुई। उनकी ओर से इस पूरे विवाद को प्रतिस्पर्धा, प्रशासनिक भ्रम और अपुष्ट आरोपों का परिणाम बताया गया।
हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद बदला माहौल
फरवरी 2026 में जब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने चार्जशीट को साक्ष्य के अभाव में रद्द किया, तब इस मामले का पूरा परिदृश्य बदल गया। अदालत की इस टिप्पणी के बाद उत्तर प्रदेश में अभिषेक प्रकाश की बहाली की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। प्रशासनिक हलकों में इसे एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है। यही कारण है कि अब यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या उत्तर प्रदेश सरकार उन्हें फिर से जिम्मेदारी सौंप सकती है।
कौन हैं आईएएस अभिषेक प्रकाश
अभिषेक प्रकाश उत्तर प्रदेश कैडर के 2006 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 21 दिसंबर 1982 को हुआ था। मूल रूप से बिहार से ताल्लुक रखने वाले अभिषेक प्रकाश ने आईआईटी रुड़की से बीटेक की पढ़ाई की। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2005 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया 8वीं रैंक हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया और उत्तर प्रदेश के कई अहम जिलों में जिम्मेदारी संभाली। अभिषेक प्रकाश लखीमपुर खीरी, लखनऊ, हमीरपुर, बरेली और अलीगढ़ जैसे जिलों में डीएम और कलेक्टर रह चुके हैं। उत्तर प्रदेश में उनकी पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में रही है, जिन्होंने प्रशासनिक और निवेश संबंधी भूमिकाओं में महत्वपूर्ण काम किया। UP News












