उत्तर प्रदेश के इस युवा तुर्क ने कर दिया सबसे बड़ा कमाल, 40 हजार से बना दिए पांच हजार करोड़ रूपए
UP News
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 07:37 PM
UP News : उत्तर प्रदेश के एक युवा तुर्क ने सबसे बड़ा कमाल कर दिया है। जब उत्तर प्रदेश के युवा तुर्क का जिक्र होता है तो उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रहने वाले पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चन्द्रशेखर की याद आती है। यहां हम चन्द्रशेखर की बात नहीं कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के जीते-जागते युवा तुर्क उद्योगपति की। उत्तर प्रदेश के इस युवा तुर्क उद्योगपति ने मात्र 40 हजार रूपए खर्च करके पांच हजार करोड़ रूपए बना दिए हैं। उत्तर प्रदेश के इस युवा तुर्क की बात आज पूरी दुनिया कर रही है।
कौन है उत्तर प्रदेश का युवा तुर्क
उत्तर प्रदेश के इस युवा तुर्क का पूरा नाम दिनेश अग्रवाल है। दिनेश अग्रवाल का जन्म उत्तर प्रदेश के बहराईच जिले के नानपारा शहर गरीब परिवार में हुआ था। इन दिनों दिनेश अग्रवाल उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी नोएडा शहर के आलीशान बंगले में रहते हैं। दिनेश अग्रवाल भारत की प्रसिद्ध कंपनी इंडियामार्ट के मालिक हैं। दिनेश अग्रवाल की नेटवर्थ आज 5 हजार करोड़ रूपए से भी अधिक की है। यह नेटवर्थ उत्तर प्रदेश के इस लाड़ले युवा तुर्क ने मात्र 40 हजार रूपए खर्च करके अर्जित की है। हम आपको विस्तार से बता रहे हैं इंडियामार्ट के मालिक दिनेश अग्रवाल की सफलता की कहानी। हो सकता है कि इस सफलता की कहानी से प्रेरणा लेकर आप भी हजारों करोड़ की कंपनी के मालिक बन जाएं।
उत्तर प्रदेश से अमेरिका और फिर वापस उत्तर प्रदेश की यात्रा
इंडियामार्ट कंपनी के संस्थापक दिनेश अग्रवाल का जन्म 19 फरवरी 1969 को उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के नानपारा शहर में हुआ था। इन दिनों दिनेश अग्रवाल उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर में रहते हैं। उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के हारकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर साइंस की डिग्री लेने के बाद उन्होंने कुछ कंपनियों के साथ जुडक़र इसी फील्ड में अनुभव हासिल किया। उनका करियर सीएमसी कंपनी से शुरू हुआ था। जिसको बाद में टाटा की कंपनी टीसीएस ने खरीद लिया। सीएमसी में दिनेश ने भारत का पहला ‘रेलवे रिजर्वेशन सिस्टम’ डेवलप किया। यहीं से पता चल गया था कि दिनेश अग्रवाल जिंदगी में कुछ बहुत बड़ा करने वाले हैं।
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सीएमसी कंपनी छोडऩे के बाद उत्तर प्रदेश के बेटे दिनेश अग्रवाल ने सैम पित्रोदा (Sam Pitroda) की टीम में जॉइन किया। यहां वे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स के लिए काम कर रहे थे। मौजूदा जानकारियों के मुताबिक, यहां उन्होंने भारत की पहली डिजिटल टेलीफोन एक्सचेंज बनाने के लिए काम किया। फिर 1992 में उन्होंने अमेरिका में बड़ी टेक कंपनी एचसीएल (HCL) को जॉइन कर लिया और वहां सेवाएं देने लगे। एचसीएल में काम करते हुए ही उन्होंने अमेरिका में इंटरनेट को बढ़ते देखा. यहीं से उन्होंने अंदाजा लगा लिया था कि भारत के लोगों पर भी इंटरनेट का क्या असर पड़ेगा। वर्ष- 1995 के अगस्त का महीना था, जब दिनेश अग्रवाल उत्तर प्रदेश वापस लौट आए। उनकी पत्नी और बच्चे भी उनके साथ थे। वे उत्तर प्रदेश में कोई नौकरी करने के इरादे से नहीं आए थे। उनके इरादे और हौसले बड़े थे।
खड़ी कर दी इंडियामार्ट कंपनी
उत्तर प्रदेश लौटने के बाद उन्होंने पाया कि वे भारतीय एक्सपोर्ट करने वालों के लिए एक वेबसाइट बनाई जा सकती है. वे निर्यातकों और विक्रेताओं की एक ऑनलाइन डायरेक्टरी बनाना चाहते थे. मगर, इस बाबत उत्तर प्रदेश सरकार से परमिशन नहीं मिली। बाद में उन्होंने एक फ्री लिस्टिंग फॉर्म बनाया और सभी सेलर्स को भेज दिया. इस तरह उनकी अनुमति लेकर उन्होंने सेलर्स की जानकारी सार्वजनिक करने में कामयाबी पाई. इसी समय इंडियामार्ट का जन्म हुआ। इंडियामार्ट की शुरुआती टैगलाइन भी यही थी- द ग्लोबल गेटवे टू इंडियन मार्केटप्लेस. अग्रवाल ने यह कंपनी केवल 40,000 रुपये के निवेश से शुरू की थी।
शुरुआत में इंडियामार्ट ने केवल एक्सपोर्ट करने वालों पर फोकस किया। एक इंटरव्यू में दिनेश अग्रवाल ने बताया, "1997 से लेकर 2001 तक, हमने हर एक्सपोर्ट की फ्री में लिस्टिंग की। उन बिजनेस के बारे में जब हमें रोज इंक्वायरी मिलती थीं, हम उन्हें शाम में छापते थे और रातों-रात फैक्स के जरिए भेजते थे। और अगले दिन, उन्हीं इंक्वायरीज़ को पोस्ट से भेजते थे।" इसी ऑनलाइन-ऑफलाइन हाइब्रिड मॉडल ने इंडियामार्ट को भारतीय एक्सपोर्ट बिजनेस की दुनिया में एक बड़ा नाम बना दिया।
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2007-08 में अमेरिका एक बड़े आर्थिक संकट में घिर गया. दुनियाभर में मंदी का असर दिखने लगा. एक्सपोर्ट का काम भी धीमा पडऩे लगा। इसी दौरान दिनेश और उनके कजिन बृजेश ने इंडियामार्ट का फोकस एक्सपोर्ट से भारत में बीटूबी (B2B) मार्केट पर शिफ्ट कर दिया। मतलब थोक विक्रेता और रिटेलर एक ही प्लेटफार्म पर आ गए। वे अपनी जरूरतों के हिसाब से इंक्वायरी डाल सकते थे और माल खरीद सकते थे। उधर, दोनों का (थोक विक्रेता और रिटेल विक्रेता) काम बहुत आसान हो गया, और इधर इंडियामार्ट का भी काम चल निकला। इसके बाद जो हुआ, वह तो सब जानते हैं। बिजनेस तेजी से बढ़ा। कंपनी ने 2010 में 52 सप्ताहों के अंदर 52 ऑफिस खोल दिए। मतलब हर हफ्ते एक नया ऑफिस खोला. बात करें दिनेश अग्रवाल की नेट वर्थ की तो यह 5,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। ट्रेंडलाइन के अनुसार, 31 मार्च 2024 तक दिनेश अग्रवाल के पास 9 कंपनियों में हिस्सेदारी है. इन्हीं के आधार पर उनकी नेट वर्थ 5,316.9 करोड़ रुपये हो चुकी है।
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रूकने वाला नहीं है उत्तर प्रदेश का युवा तुर्क
एक प्रसिद्ध संस्था ने दिनेश अग्रवाल को युवा तुर्क का खिताब दिया है। जानकारों का दावा है कि उत्तर प्रदेश का यह युवा तुर्क रूकने वाला नहीं है। दिनेश अग्रवाल का सपना पहले उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा पूंजीपति फिर भारत का सबसे बड़ा पूंजीपति तथा दुनिया का सबसे बड़ा पूंजीपति बनने का है। अपने सपने को पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश का युवा तुर्क दिनेश अग्रवाल आए दिन किसी न किसी बड़ी कंपनी में निवेश कर रहा है। उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर में दिनेश अग्रवाल को जानने वाले कहते हैं कि वह एक अदभुत इंसान है।
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