यूपी में आमों की चाक-चौबंद सुरक्षा : वाराणसी में 'मियाजाकी' की रखवाली में तैनात भालेधारी पहरेदार
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भारत
चेतना मंच
28 Nov 2025 01:35 AM
UP News : उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के एक छोटे से गांव में इन दिनों छह आमों की चर्चा पूरे देश में हो रही है। कारण? ये आम कोई साधारण फल नहीं, बल्कि लाखों की कीमत वाले जापानी मियाजाकी आम हैं, जिनकी देखरेख में दो हथियारबंद पहरेदार दिन-रात तैनात हैं। वाराणसी के चोलापुर ब्लॉक के बबियाँव गांव में शैलेन्द्र रघुवंशी नामक किसान की नर्सरी में ये दुर्लभ आम सुर्खियों में हैं।
क्या है मियाजाकी आम की खासियत?
मियाजाकी आम मूल रूप से जापान के क्यूशू द्वीप स्थित मियाजाकी प्रांत में उगाया जाता है। यह आम अपने गहरे लाल रंग, उच्च मिठास, रसीले स्वाद और स्वास्थ्यवर्धक गुणों के लिए जाना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीआक्सिडेंट, कैरोटिन और फोलिक एसिड होता है, जिससे यह न केवल स्वादिष्ट बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद लाभकारी माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 1.5 से 3 लाख रुपये प्रति किलो तक होती है। UP News
चार साल की मेहनत, छह 'हीरे' तैयार
शैलेन्द्र रघुवंशी ने वर्ष 2021 में पुणे से दो मियाजाकी आम के पौधे मंगवाए थे और दिसंबर 2021 में अपने नर्सरी फार्म पर इनका रोपण किया। शुरुआती परीक्षण सफल रहने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे और पौधे तैयार किए। चार साल की मेहनत के बाद, इस मौसम में उनके एक पौधे पर छह आम आए हैं जिनका वजन औसतन 300-400 ग्राम है। UP News
चाक-चौबंद सुरक्षा : दो पहरेदार और सीसीटीवी निगरानी
जैसे ही आम के बारे में लोगों को पता चला कि ये 'लखटकिया आम' हैं, आम को देखने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी। संभावित चोरी या नुकसान को देखते हुए शैलेन्द्र ने दो सुरक्षा गार्डों को नियुक्त किया है जो भालों के साथ 24 घंटे तैनात रहते हैं। साथ ही आम के पेड़ पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। UP News
वैज्ञानिक परीक्षण की तैयारी
शैलेन्द्र अब इन आमों को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) भेजकर इनकी पोषक तत्वों की जांच करवाना चाहते हैं। उद्देश्य यह जानना है कि भारत की जलवायु में उगाए गए मियाजाकी आम जापानी आमों के मुकाबले किस स्तर पर खड़े हैं। क्या इनमें मिनरल्स की मात्रा अधिक है या कम? क्या इनकी मिठास में फर्क है? UP News
नर्सरी में तैयार हो रहा है नया बाजार
शैलेन्द्र अब इन आमों के पौधों को भी बेच रहे हैं, जिसकी कीमत 1,000 रुपये प्रति पौधा है। यह एक संकेत है कि भविष्य में भारत में मियाजाकी आम का बाजार उभर सकता है। अगर इसकी खेती और स्वाद दोनों ही स्तर पर सफलता मिलती है। छोटे किसान के बड़े सपने ने जापानी फल को वाराणसी की मिट्टी में पनपने का मौका दिया है। यदि प्रयोग सफल रहता है, तो यह भारत में फलों की खेती के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी पहल बन सकता है। फिलहाल, छह आमों की रखवाली में भालेधारी पहरेदार और कैमरे यह दर्शाते हैं कि इन लाल हीरों की कीमत सिर्फ पैसे में नहीं, प्रतीकात्मकता में भी है। यह आत्मनिर्भर भारत की कृषि-शक्ति का एक नया अध्याय हो सकता है। UP News