यूएई का यूपी पर भरोसा : उन्नाव में शाही निवेश, बनेगा मछली पालन का इंटरनेशनल हब
UP News
उत्तर प्रदेश
RP Raghuvanshi
13 May 2025 10:34 PM
UP News : उत्तर प्रदेश अब सिर्फ कृषि या औद्योगिक निवेश का केंद्र नहीं, बल्कि मछली पालन के क्षेत्र में भी देश का अगुवा बनने जा रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के शाही परिवार ने उन्नाव में 4000 करोड़ रुपये के मेगा प्रोजेक्ट में निवेश का फैसला किया है। इस निवेश से राज्य में मछली पालन से जुड़ा एशिया का सबसे आधुनिक एक्वाकल्चर इकोसिस्टम विकसित होगा। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को हरी झंडी यूएई के शाही परिवार के सदस्य और एक्वॉब्रिज होल्डिंग्स के चेयरमैन शेख अहमद बिन मना बिन खलीफा अल मकतूम ने दी है। उन्होंने 461 मिलियन डॉलर (लगभग 4000 करोड़ रुपये) की मंजूरी दी है।
यह प्रोजेक्ट शामिल करेगा
-फिश हैचरी (मछलियों के अंडे से बच्चों तक की नर्सरी)
-फिश प्रोसेसिंग प्लांट (उत्पादन और पैकेजिंग)
-सेंटर आॅफ एक्सीलेंस (प्रशिक्षण और अनुसंधान केंद्र)
-फिश फीड प्लांट (मछलियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाला आहार निर्माण)
योगी सरकार की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति रंग लाई
मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह की अगुवाई में दुबई दौरे के दौरान सरकार ने इस निवेश प्रस्ताव को तेजी से आगे बढ़ाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की "न्यू यूपी" नीति और निवेशक-हितैषी नीतियों ने विदेशी निवेशकों का भरोसा जीता है। यूएई के अर्थव्यवस्था मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से रणनीतिक वातार्एं हुर्इं। वॉटरफ्रंट फिश मार्केट का दौरा किया, जिसका मॉडल अब यूपी में अपनाया जाएगा।
एफडीआई विशेषज्ञों और निवेश सलाहकारों को यूपी की एक्वाकल्चर नीति से अवगत कराया गया। जिसके बाद यह निवेश यूपी में होने जा रहा है।
विश्व बैंक की महत्वपूर्ण भूमिका
इस मेगा प्रोजेक्ट में विश्व बैंक ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। विश्व बैंक और शाही परिवार मॉरीशस में पहले भी इसी तरह के प्रोजेक्ट में साझेदार रहे हैं। यूपी सरकार की तरफ से इस मॉडल को राज्य में दोहराने के लिए उत्साह दिखाया गया है। इस प्रोजेक्ट को अंतिम रूप देने से पहले, शाही परिवार की टेक्निकल टीम ने उन्नाव के जल स्रोतों का परीक्षण किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मछली पालन के लिए जल की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरती है या नहीं। UP News
लक्ष्य : एक लाख मत्स्य पालकों को मिलेगा प्रशिक्षण
इस निवेश का एक प्रमुख उद्देश्य एक लाख स्थानीय मत्स्य पालकों को आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित करना है। इससे उन्हें न केवल बेहतर उत्पादन मिलेगा, बल्कि अवैध रूप से बांग्लादेश से आने वाले मछली के बच्चों पर भी निर्भरता खत्म होगी। यह निवेश न केवल उन्नाव, बल्कि पूरे यूपी को मछली पालन के क्षेत्र में नई पहचान देगा। वर्तमान में यूपी और बिहार में मछली पालन का बड़ा हिस्सा बांग्लादेश पर निर्भर है, लेकिन अब यह परिदृश्य बदलने जा रहा है। "मेक इन इंडिया" और "लोकल टू ग्लोबल" की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। UP News