
Uttar Pradesh State Teacher Award : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्वीकृति के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के बेसिक विद्यालयों में पढ़ाने वाले गुरूजनों (अध्यापकों) के लिए राज्य पुरस्कार की घोषणा कर दी है। राज्य पुरस्कार पाना किसी भी गुरूजी (अध्यापक) के लिए गर्व की बात होती है। उत्तर प्रदेश सरकार की इस घोषणा में प्रदेश के हाथरस तथा कौशाम्बी जिले के हाथ भारी निराशा लगी है। इन दोनों ही जिलों के "गुरूजी" फिसड्डी साबित हुए हैं।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की सरकार प्रदेश के प्रत्येक जिले के एक-एक अध्यापक को हर साल राज्य पुरस्कार से सम्मानित करती है। वर्ष-2023 में इस पुरस्कार में मिलने वाली नगद राशि बढ़ाकर 25 हजार कर दी गई थी। साथ ही अध्यापक को मेडल, प्रशस्ति-पत्र भी दिया जाता है। पुरस्कृत अध्यापकों को उत्तर प्रदेश रोडवेज की बसों में फ्री यात्रा करने का मौका मिलता है। उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं किन्तु उत्तर प्रदेश का राज्य पुरस्कार केवल 73 अध्यापकों को ही मिला है। हाथरस तथा कौशाम्बी जिलों में कोई भी अध्यापक पुरस्कार के लायक नहीं पाया गया है। नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा को मिलाकर बने गौतमबुद्धनगर जिले में यह पुरस्कार एक महिला अध्यापक को मिला है।
आपको बता दें कि बुधवार को उत्तर प्रदेश के जिन 73 अध्यापकों के नाम उत्तर प्रदेश राज्य पुरस्कारों की सूची में शामिल किए गए हैं। उनमें गीता रानी का नाम भी शामिल है। गीता रानी गौतमबुद्धनगर जिले के दनकौर कस्बे के पास स्थित सलेमपुर गुर्जर गांव के बेसिक शिक्षा विद्यालय की अध्यापक हैं। गीता रानी को राज्य पुरस्कार मिलने की घोषणा से यह साबित हो गया है कि गौतमबुद्धनगर जिले में महिला अध्यापक पुरूष अध्यापकों से अव्वल दर्जे पर हैं।