उत्तर प्रदेश के इस गांव में करवा चौथ का व्रत करना माना जाता है पाप, 250 साल से चली आ रही यह परंपरा
भारत
चेतना मंच
04 Oct 2025 07:22 PM
उत्तर प्रदेश में करवा चौथ का व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए रखती हैं। पूरे देश में महिलाएं निर्जला व्रत रखकर 16 श्रृंगार करती हैं, चांद का दीदार कर व्रत खोलती हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में मथुरा जनपद के सुरीर कस्बे के पास स्थित बघा गांव इस परंपरा से बिल्कुल अलग है। उत्तर प्रदेश के इस गांव में पिछले 250 साल से कोई भी महिला करवा चौथ का व्रत नहीं रखती। स्थानीय मान्यता है कि करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिला के पति की मृत्यु हो जाती है। इसलिए बघा गांव की महिलाएं केवल सती माता के मंदिर में पूजा करती हैं और श्रृंगार से दूर रहती हैं। UP News :
परंपरा का इतिहास
इस परंपरा का इतिहास यह है कि 250 साल पहले राम नगला गांव से गुजरते समय एक ब्राह्मण दंपती करवा चौथ के दिन यात्रा कर रहा था। ठाकुर समाज के कुछ लोगों ने ब्राह्मण युवक पर झूठा आरोप लगाया और उसे पीट-पीटकर मार डाला। दुखी पत्नी ने उसी समय श्राप दिया कि इस गांव में जो भी महिला करवा चौथ का व्रत रखेगी, उसके पति की मृत्यु होगी। इसके बाद वह महिला भी सती हो गई और वहां पर सती माता का मंदिर बना। तभी से गांव में करवा चौथ व्रत नहीं रखा जाता।
बघा गांव की महिलाओं की परंपरा
महिलाएं करवा चौथ के दिन सती माता की पूजा करती हैं। श्रृंगार, सिंदूर, चूड़ियां और अन्य पारंपरिक व्रत अनुष्ठान नहीं करती। बुजुर्ग महिलाओं के अनुसार, कुछ नवविवाहिता महिलाओं ने पहले परंपरा तोड़ी थी, जिसके बाद उनके पतियों की असामयिक मृत्यु हुई। तभी से यह परंपरा आज भी सख्ती से मानी जाती है और गांव के लिए यह संस्कृति और विश्वास का प्रतीक बनी हुई है। UP News