जब 48 लाख का विदेशी पैकेज छोड़ बनीं आईपीएस : जानिए कौन हैं अंजली विश्वकर्मा
UP News
भारत
चेतना मंच
30 Jun 2025 10:03 PM
UP News : उत्तर प्रदेश के कानपुर में हाल ही में एक क्रिकेट मैच के दौरान एडीसीपी अंजली विश्वकर्मा और विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) अरुण पाठक के बीच हुई तीखी बहस ने सोशल मीडिया पर सुर्खियाँ बटोरी हैं। विवाद का केंद्र सुरक्षाकर्मियों की एंट्री और डील शब्द को लेकर हुआ, जिसे लेकर दोनों के बीच सार्वजनिक रूप से असहमति देखने को मिली। लेकिन इस विवाद से अलग, अंजली विश्वकर्मा की कहानी त्याग, संघर्ष और सेवा के प्रति समर्पण की मिसाल है।
उत्तराखंड से यूपी कैडर तक : एक टॉपर की कहानी
अंजली ने देहरादून के कॉन्वेंट आॅफ जीसस एंड मैरी स्कूल से हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। 2011 में उन्होंने 97.7% अंकों के साथ राज्य में टॉप किया था। पहले उनका सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन बाद में रुचि इंजीनियरिंग में विकसित हुई।
जन्म : 11 जनवरी 1993
निवास : सहस्त्रधारा रोड, देहरादून
पिता : अरुण कुमार (इंजीनियर, आर्डनेंस फैक्ट्री)
माता : नीलम विश्वकर्मा (गृहिणी)
48 लाख का पैकेज छोड़कर चुनी देश सेवा
अंजली ने कानपुर से नेविगेशन इंजीनियरिंग में बीटेक किया। 2015 में उन्हें एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कंपनी में 48 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिला। इसके बाद उन्होंने मैक्सिको, नार्वे, यूके, मलेशिया, सिंगापुर, अबू धाबी और न्यूजीलैंड में काम कर बहुराष्ट्रीय अनुभव हासिल किया। लेकिन 2018 में उन्होंने यह सुनहरा करियर छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी। पहले प्रयास में असफल रहने के बाद, दूसरे प्रयास में सफलता पाई और 2021 बैच की भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी बनीं। उनकी पहली तैनाती झांसी में हुई, जहाँ उन्होंने एक नाबालिग लड़की के अपहरण का केस सुलझाकर सराहना पाई। UP News
व्यक्तिगत जीवन : दोस्त से जीवनसाथी तक
अंजली की मुलाकात उदित पुष्कर से आईआईटी कानपुर में हुई थी। दोनों 12 साल पुराने दोस्त हैं और दोनों ने साथ में यूपीएससी परीक्षा भी पास की। उदित वर्तमान में छत्तीसगढ़ कैडर में आईपीएस अधिकारी हैं। वर्तमान में अंजली विश्वकर्मा कानपुर में एडीसीपी (पूर्वी) के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वे एसीपी कैंट के रूप में कार्य कर चुकी हैं। UP News
विवादों में क्यों आईं अंजली?
ग्रीन पार्क स्टेडियम में एक क्रिकेट मैच के दौरान सुरक्षा गार्ड की एंट्री को लेकर एमएलसी अरुण पाठक और अंजली विश्वकर्मा के बीच कहा-सुनी हो गई। डील शब्द के इस्तेमाल पर पाठक ने आपत्ति जताई, जिससे बहस और तेज हो गई। हालांकि बाद में अंजली वहां से रवाना हो गईं। यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में कैद हुआ और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना। आईपीएस अंजली विश्वकर्मा उन चंद युवा अधिकारियों में से हैं जिन्होंने कम्फर्ट जोन छोड़कर सेवा का रास्ता चुना। उनका करियर, मेहनत और व्यक्तिगत जीवन इस बात की मिसाल है कि त्याग और लगन से कोई भी मुकाम पाया जा सकता है। UP News