यूपी में यमुना एक्सप्रेसवे बना मौत का सफर : दो भीषण हादसों में 6 की मौत, दो दर्जन से अधिक घायल
UP News
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 06:25 PM
UP News : उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में शुक्रवार की रात यमुना एक्सप्रेसवे पर दो अलग-अलग स्थानों पर हुए सड़क हादसों ने फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारी एक्सप्रेसवे व्यवस्थाएं वाकई एक्सप्रेस हैं या एक्सिडेंट का अड्डा बन चुकी हैं? इन दर्दनाक हादसों में कुल छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो की हालत नाजुक बनी हुई है। वहीं दूसरे हादसे में एक बस के दो दर्जन से अधिक यात्री घायल हो गए हैं।
पहली दुर्घटना : अज्ञात वाहन ने रौंदी जिंदगी, छह की मौत
शुक्रवार देर रात लगभग 2:30 बजे मथुरा के बलदेव थाना क्षेत्र अंतर्गत माइलस्टोन 140 किमी के समीप एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने दिल्ली से कानपुर जा रही एक ईको वैन को जबरदस्त टक्कर मार दी। वैन में कुल आठ लोग सवार थे। टक्कर इतनी भयानक थी कि गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार लोगों को बाहर निकालने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। घायलों को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने छह लोगों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान देर रात तक जारी रही, जबकि दो गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों का उपचार इमरजेंसी वार्ड में किया जा रहा है।
दूसरा हादसा : नींद बन गई हादसे की वजह
इसी रात, कुछ ही किलोमीटर दूर माइलस्टोन 131 किमी के पास दिल्ली से आगरा जा रही एक प्राइवेट बस की ट्रक से जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसे के समय बस में करीब 45 यात्री सवार थे। टक्कर के बाद बस सड़क किनारे पलट गई और यात्री चीख-पुकार करने लगे। मौके पर पहुंची पुलिस व एक्सप्रेसवे टीम ने घायलों को बाहर निकाला और एंबुलेंस की मदद से अस्पताल पहुंचाया। लगभग 20-25 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
प्रशासन मौके पर सक्रिय, जांच शुरू
घटनाओं की सूचना मिलते ही मथुरा के जिलाधिकारी श्री शैलेंद्र कुमार सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायलों से बातचीत कर चिकित्सीय सुविधाओं की जानकारी ली और उपस्थित डॉक्टरों को उपचार में किसी भी प्रकार की कोताही न बरतने का निर्देश दिया। एसएसपी श्लोक कुमार ने मीडिया को बताया कि शुरूआती जांच के आधार पर यह आशंका जताई जा रही है कि दोनों हादसे चालक की नींद या लापरवाही के कारण हुए हैं। पुलिस ने दुर्घटनाओं की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं और अज्ञात वाहन की पहचान के लिए एक्सप्रेसवे के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
क्या कहती है एक्सप्रेसवे की सच्चाई?
यमुना एक्सप्रेसवे पर आए दिन होने वाली दुर्घटनाएं अब आम होती जा रही हैं। हालिया वर्षों में यह देखा गया है कि तेज रफ्तार, ड्राइवर की झपकी, खराब रोशनी और अपर्याप्त पेट्रोलिंग यहां के हादसों के मुख्य कारण बनते जा रहे हैं। राज्य सरकार ने भले ही एक्सप्रेसवे को 'फास्ट ट्रैक सफर' का दावा किया हो, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट यह बताती है कि इन सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था बहुत कमजोर है। ड्राइवरों के लिए विश्राम केंद्र, हाईवे पेट्रोलिंग की नियमितता और स्पीड कंट्रोल तंत्र आज भी बड़े सवालों के घेरे में हैं।
दर्दनाक हादसों ने एक बार फिर सोचने पर किया मजबूर
इन दर्दनाक हादसों ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आधुनिक सड़कों के साथ-साथ आधुनिक सुरक्षा उपायों की क्या जरूरत है? यदि वाहन चालक की नींद दुर्घटना का कारण बनती है, तो क्या उसके लिए सतर्कता तंत्र मौजूद है? क्या सड़कों पर साइन बोर्ड, रेस्ट पॉइंट्स और रफ्तार नियंत्रण को और अधिक सख्त नहीं किया जाना चाहिए? अब समय आ गया है कि शासन-प्रशासन न केवल आंकड़े गिनाए, बल्कि एक ठोस सड़क सुरक्षा नीति लागू करे, ताकि ऐसी घटनाएं केवल खबर न बनें, बल्कि इतिहास बनें।