चौधरी चरण सिंह के बड़े सपने को पूरा करेंगे योगी, बनाई योजना
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भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 02:18 AM
UP News : भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह का एक बड़ा सपना जल्दी ही पूरा हो सकता है। स्व. चौधरी चरण सिंह के अधूरे सपने को पूरा करने का बीड़ा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उठाया है। CM योगी के निर्देश पर उत्तर प्रदेश की सरकार ने एक ऐसी योजना तैयार की है जिसके द्वारा कम से कम उत्तर प्रदेश में तो स्व. चौधरी चरण सिंह का बड़ा सपना साकार हो सकता है। हम यहां आपको विस्तार से बता रहे हैं कि क्या था स्व. चौधरी चरण सिंह का सपना? और उत्तर प्रदेश में कैसे पूरा होगा वह सपना?
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चौधरी चरण सिंह सपना
आपको पता ही है कि भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के ही रहने वाले थे। वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे थे। हाल ही में स्व. चौधरी चरण सिंह को भारत सरकार ने भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया है। चौ. चरण सिंह भारत को गांवों का देश कहते थे। यह बात सत्य भी है कि भारत गांवों का देश है। चौधरी चरण सिंह का सपना था कि भारत के गांवों का विकास शहरों के विकास की तरह से ही किया जाए। वें कहते थे कि गांव में तथा गांव के आसपास छोटे-छोटे उद्योग स्थापित किए जाएं। ताकि गांवों के लोगों को गांव छोडक़र बाहर न जाना पड़े। गांव में उद्योग स्थापित करके गांवों का संपूर्ण विकास कराना चौधरी चरण सिंह का सबसे बड़ा सपना था।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री करेंगे सपना पूरा
स्व. चौधरी चरण सिंह के सपने को पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ी पहल की है। दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार की एक बड़ी योजना सामने आई है। इस योजना को उत्तर प्रदेश सरकार की सबसे बड़ी योजना कहा जा सकता है। इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार की इस योजना को उत्तर प्रदेश के इतिहास की सबसे बड़ी योजना का नाम भी दिया जा सकता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बनाई गई इस योजना से उत्तर प्रदेश के सभी 90 हजार गांवों की तकदीर बदल जाएगी। इस प्रकार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्व. चौधरी चरण सिंह के अधूरे सपने को पूरा करने की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं।
यह है उत्तर प्रदेश सरकार की योजना
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने शहरों के साथ ही साथ गांवों को भी विकसित करने का अभियान चला रखा है। उत्तर प्रदेश सरकार के इसी अभियान के तहत गांवों में गांव पंचायत की जमीन पर अलग-अलग प्रकार की फैक्टरी लगाने की योजना तैयार की गयी है। उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में 90 हजार गांव हैं। इन सभी 90 हजार गांवों में जहां-जहां भी गांव पंचायत की पांच एकड़ या उससे अधिक जमीन मिल जाएगी वहीं उसी गांव में औद्योगिक केन्द्र स्थापित कर दिया जाएगा। गांवों में फैक्टरी लगने से उत्तर प्रदेश के हर गांव की तकदीर बदल जाएगी।
उत्तर प्रदेश सरकार की इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में उद्योग लगाने के लिए ग्राम सभा की जमीनों का अधिग्रहण किया जाएगा। ग्राम सभा की पांच एकड़ या इससे अधिक जमीन चिह्नित कर उद्योग निदेशालय को मुफ्त में दी जाएगी। इन जमीनों को मिनी इंडस्ट्रियल एरिया की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। उद्यमियों को जमीन का आवंटन संबंधित जिले के सर्किल रेट से होगा। जिस गांव की जमीन अधिग्रहीत की जाएगी, प्राथमिकता के आधार पर उस ब्लॉक के उद्यमियों को पहले जमीन दी जाएगी।
योजना से होगी हर गांव की बल्ले-बल्ले
उत्तर प्रदेश सरकार की इस योजना से पूरे प्रदेश के गांवों की तकदीर बदल जाएगी। गांव से पलायन रोकने के लिए ग्रामीण इलाकों को ही उद्योगों से लैस करने की योजना बनाई गई है। गांव-गांव में इंडस्ट्री के तहत इसका खाका तैयार किया गया है। इससे एक तरफ एमएसएमई इकाइयों को शहरों की तुलना में सस्ते दाम पर जमीन मिलेगी तो दूसरी तरफ ग्रामीणों को अपने ही गांव के आसपास रोजगार मिल सकेगा। इसके तहत ग्रामीण इलाकों में ग्राम सभा की जमीन को लघु औद्योगिक आस्थान (मिनी इंडस्ट्रियल क्लस्टर) के रूप में विकसित किया जाएगा। कम से कम पांच एकड़ जमीन पर क्लस्टर बसाए जाएंगे। राजस्व विभाग ग्राम सभा की जमीन एमएसएमई विभाग को उपलब्ध कराएगा। इस जमीन को उद्योगों के लिए तैयार करने का जिम्मा उद्योग व उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय को दिया गया है। कामन ट्रीटमेंट प्लांट, इफ्युलिएंट ट्रीटमेंट प्लांट, सडक़, सीवर, अबाध बिजली व पानी सहित सभी सुविधाओं से लैस करने के बाद ये जमीन संबंधित जिले के सर्किल रेट से उद्यमियों को दी जाएगी। सभी एक्सप्रेसवे सहित निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे से पांच किमी की दूरी में आने वाली ग्राम सभा की जमीन का भी अधिग्रहण किया जाएगा। इन्हें विकसित कर उद्यमियों को सौंपा जाएगा।
अनुमान के मुताबिक इस पहल से पहले चरण में कम से कम 500 नए मिनी क्लस्टर का जन्म होगा और 11 हजार करोड़ का निवेश होगा। कम से कम 25000 नई इकाइयों बनेंगी। इनमें करीब ढाई लाख लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा। एमएसएमई मंत्री राकेश सचान का कहना है कि ग्रामीणों को उनके घर के आसपास ही रोजगार व स्वरोजगार देने की पहल की जा रही है। इसके लिए ग्राम सभा की जमीन पर मिनी औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने का प्रस्ताव है। इस पहल से गांव-गांव की आर्थिक स्थिति में अप्रत्याशित बदलाव आएगा। कुशल और अकुशल दोनों ही हाथों को उनके घर पर रोजगार मिलेगा।