उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने संकेत दिए हैं कि राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद कराए जा सकते हैं। इसी बीच पंचायत चुनाव का मामला उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट में पहुंच गया है।

UP News : उत्तर प्रदेश में पंचायत के चुनाव कब होंगे ? यह सवाल पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस बीच पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा अपडसामने आया है। उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने संकेत दिए हैं कि राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद कराए जा सकते हैं। इसी बीच पंचायत चुनाव का मामला उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट में पहुंच गया है। अब हाईकोर्ट ही अंतिम फैसला करेगा कि राज्य में पंचायत चुनाव कब होंगे।
उत्तर प्रदेश की राजनीति को समझने वाले विश्लेषकों ने पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा दावा किया है। विश्लेषकों का दावा है कि उत्तर प्रदेश में निर्धारित समय पर नई पंचायतों का गठन संभव नहीं है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद ही हो सकेंगे। उच्चपदस्थ सूत्र भी इसकी पुष्टि कर रहे हैं। सत्ता पक्ष और . विपक्ष दोनों का फोकस वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव पर है। कोई भी पार्टी स्थानीय चुनावों में नहीं उलझना चाह रही है। साथ ही पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन और आरक्षण की प्रक्रिया भी अधूरी है।
प्रदेश में ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों के निर्वाचन का कार्यकाल क्रमशः 26 मई, 19 जुलाई और 11 जुलाई को समाप्त हो रहा है जबकि, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए फाइनल मतदाता सूची 15 अप्रैल को प्रकाशित होगी। चुनाव से पहले समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन और आरक्षण की प्रक्रिया भी अधूरी है। इस सबसे एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि मौजूदा "पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने से पहले नई पंचायतों के गठन की प्रक्रिया अब पूरी नहीं सकती। उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने का विकल्प ही अब बचा है। अगर कार्यकाल बढ़ाने में किसी तरह की कोई कानूनी अड़चन आई तो प्रशासक भी बैठाए जा सकते हैं। अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा की ओर से भी पंचायत चुनाव कराने की कोई मांग नहीं उठ रही है। हालांकि, चुनाव को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है।
आप को बता दें कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने का मामला हाईकोर्ट भी पहुंच चुका है। इस संबंध में याचिका दायर की गई है। याची का कहना है कि अगर मतदाता सूची ही अप्रैल के मध्य तक फाइनल होगी तो आरक्षण की जटिल प्रक्रिया और चुनाव संपन्न कराने के लिए बहुत कम समय बचेगा। ऐसी स्थिति में चुनाव टलने की आशंका बढ़ गई है जिससे पूर्व की भांति प्रशासकों की नियुक्ति की नौबत आ सकती है। इस संबंध में अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से एफिडेविट भी मांगा। सूत्रों के मुताबिक राज्य निर्वाचन आयोग ने एफिडेविट दे दिया है। इसमें अपनी तैयारियों की स्थिति स्पष्ट कर दी है।
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण की प्रक्रिया राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की जनसंख्या संबंधी रिपोर्ट के बाद ही आगे बढ़ेगी। अभी इस आयोग का भी गठन नहीं हुआ है। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग विभिन्न जिलों में जाकर ओबीसी वर्ग की आबादी के बारे में जानकारी लेकर अपनी रिपोर्ट सौंपता है। किसी भी ब्लॉक में ओबीसी की जनसंख्या 27% से अधिक होने के बावजूद उस ब्लॉक में ग्राम प्रधान के पद 27% से अधिक आरक्षित नहीं हो सकते। अगर यह प्रतिशत उस ब्लॉक में 27% से कम है तो उसी अनुपात में पद आरक्षित होंगे। अलबत्ता, प्रदेश स्तर पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (ग्राम, क्षेत्र व जिला पंचायत) में ओबीसी के लिए आरक्षण 27% रखना अनिवार्य है।
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने स्पष्ट संकेत दिए हैं। मीडिया से बातचीत करते हुए उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर कहा है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष, कोई भी अभी पंचायत चुनाव नहीं चाहता है। है। सपा और कांग्रेस की ओर से भी ऐसी कोई मांग नहीं उठ रही है। हालांकि, मामला हाईकोर्ट में चला गया है। अब सबकी निगाह न्यायालय के फैसले पर है। UP News