घर में लगाई गई नोट छापने की मशीन से नकली नोट छापकर पूरे उत्तर प्रदेश में सप्लाई किए जा रहे थे। उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापा मारकर नकली नोट छापने वाले गिरोह को पकड़ लिया है।

UP News : उत्तर प्रदेश के एक शहर में बाकायदा नोट छापने की मशीन लगी हुई थी। घर में लगाई गई नोट छापने की मशीन के द्वारा 500-500 रूपए के नोट छापने का बड़ा ‘‘खेला’’ किया जा रहा था। घर में लगाई गई नोट छापने की मशीन से नकली नोट छापकर पूरे उत्तर प्रदेश में सप्लाई किए जा रहे थे। उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापा मारकर नकली नोट छापने वाले गिरोह को पकड़ लिया है।
घर में नोट छापने की मशीन लगाकर नोट छापने का धंधा उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में किया जा रहा था। बाजार में 500 रूपए का नकली नोट मिलने पर उत्तर प्रदेश पुलिस को शक हुआ तो पूरा ‘‘खेला’’ सामने आ गया। दरअसल हुआ यह कि उत्तर प्रदेश के नरौरा क्षेत्र के एक बाजार में सब्जी विक्रेता को 500-500 रुपये के संदिग्ध नोट दिए गए। दुकानदार को नोट की बनावट पर शक हुआ। जांच के बाद उसने थाना नरौरा में शिकायत दर्ज कराई. इसी आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने तकनीकी और स्थानीय स्तर पर पड़ताल शुरू की। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर सिंचाई विभाग कॉलोनी के पास घेराबंदी कर तीन युवकों को हिरासत में लिया गया। तलाशी में जो मिला, उसने पूरे नेटवर्क की तस्वीर साफ कर दी। उत्तर प्रदेश के पुलिस के मुताबिक आरोपी घर में ही प्रिंटर की मदद से 500 रुपये के नोट तैयार करते थे। बरामदगी में 12 हजार रुपये के तैयार नकली नोट और 14 हजार रुपये के अधछपे नोट मिले हैं। साथ ही एक प्रिंटर, घटना में प्रयुक्त स्पलेंडर प्लस बाइक (UP38 AJ 4785) और तीन मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि नोट छापने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश के छोटे बाजारों, सब्जी की दुकानों और पशु पेंठ जैसे स्थानों पर चलाया जाता था, जहां नकदी का लेन-देन तेज होता है और नोटों की बारीकी से जांच कम होती है।
उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भूपेन्द्र यादव, राकेश यादव और कुंवरपाल के रूप में हुई है। तीनों जनपद सम्भल के निवासी बताए जा रहे हैंं। पुलिस का कहना है कि ये शातिर प्रवृत्ति के हैं और सुनियोजित तरीके से ग्रामीण बाजारों को निशाना बना रहे थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे भीड़भाड़ वाले बाजारों में 500 रुपये का नकली नोट देकर छोटे सामान की खरीदारी करते थे और बाकी रकम असली में वापस ले लेते थे। इस तरह धीरे-धीरे नकली नोट बाजार में खपाए जाते थे। एक वायरल वीडियो में कथित तौर पर नोट छापने का डेमो भी दिखा, जिस पर सोशल मीडिया में कई तरह की प्रतिक्रियाएं आईं। हालांकि पुलिस का कहना है कि वे रंगीन प्रिंटर का इस्तेमाल करते थे, ताकि नोट असली जैसे दिखें।
उत्तर प्रदेश पुलिस की पूछताछ में जो सबसे बड़ा खुलासा हुआ, वह था भविष्य की योजना। पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी भूपेन्द्र यादव के मन में प्रॉपर्टी के नाम पर 50 लाख रुपये का बैंक लोन लेने की योजना थी। आरोप है कि वे लोन की अदायगी नकली नोटों से करने का इरादा रखते थे। इसी क्रम में हाल ही में भारतीय स्टेट बैंक में ‘श्री श्याम प्रॉपर्टी’ नाम से एक करंट खाता भी खुलवाया गया था। पुलिस अब बैंक खाते की गतिविधियों की जांच कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि क्या लोन प्रक्रिया शुरू की गई थी या नहीं। बरामद मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। कॉल डिटेल, मैसेज और संभावित संपर्कों को खंगाला जा रहा है। पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या यह गिरोह किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा है या स्थानीय स्तर पर ही सक्रिय था। अपर पुलिस अधीक्षक नगर ने बताया कि अभी तक की जांच में यह सामने आया है कि नकली नोट ग्रामीण क्षेत्रों में खपाए जा रहे थे। आगे यह पता लगाया जा रहा है कि कितनी मात्रा में नोट बाजार में पहुंच चुके हैं और किन-किन इलाकों में इन्हें चलाया गया। देहात के बाजार भरोसे पर चलते हैं। एक दुकानदार ने कहा, हम हर नोट को मशीन में नहीं जांच सकते। दिनभर की मेहनत का पैसा अगर नकली निकल जाए तो भारी नुकसान होता है। फिलहाल तीनों आरोपी न्यायिक प्रक्रिया के तहत हिरासत में हैं. पुलिस नेटवर्क की गहराई, बाजार में पहुंचे नोटों की संख्या और बैंकिंग एंगल की जांच में जुटी है। UP News