UP Politics : वीरेश तिवारी ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को कलराज मिश्र और डॉ. दिनेश शर्मा के अनुभव का उपयोग कर सर्वसमाज से संवाद मजबूत करने का सुझाव दिया।

UP News : उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी के सामने जहां सत्ता में वापसी की चुनौती है, वहीं अपने सामाजिक आधार को और मजबूत करने की भी बड़ी जरूरत है। ऐसे में पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर के सामाजिक कार्यकर्ता, जनतंत्र एवं विभिन्न मंचों पर स्तंभकार, चंद्रावती ग्रुप के चेयरमैन तथा नोएडा प्राधिकरण की शिकायत निवारण समिति के सदस्य वीरेश तिवारी ने उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर लिखे अपने एक महत्वपूर्ण आलेख में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा को बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की जरूरत पर जोर दिया है। वीरेश तिवारी का मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति केवल चुनावी गणित का विषय नहीं है। प्रदेश की सामाजिक विविधता को देखते हुए किसी भी राजनीतिक दल की सफलता के लिए सर्वसमाज के बीच विश्वास, संवाद और राजनीतिक भागीदारी की भावना जरूरी है। उनके अनुसार भाजपा को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ऐसी रणनीति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, जिसमें वरिष्ठ नेतृत्व के अनुभव और नई पीढ़ी की राजनीतिक ऊर्जा का बेहतर समन्वय हो। UP News
अपने आलेख में वीरेश तिवारी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में कलराज मिश्र का राजनीतिक अनुभव उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई दशकों तक फैला हुआ है। वे उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे, विधायक और सांसद के रूप में जिम्मेदारी संभाली तथा केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। इसके बाद उन्हें संवैधानिक जिम्मेदारी देते हुए राज्यपाल बनाया गया। वीरेश तिवारी के अनुसार संगठन से लेकर सरकार और फिर संवैधानिक पद तक की उनकी लंबी राजनीतिक यात्रा उन्हें उत्तर प्रदेश की राजनीति के उन वरिष्ठ नेताओं में शामिल करती है, जिनके पास प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक समूहों के साथ लंबे समय का अनुभव और संपर्क है। उनका मानना है कि ऐसे वरिष्ठ नेताओं की उपयोगिता केवल किसी पद तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यदि पार्टी उनके अनुभव का उपयोग सामाजिक संवाद और संगठनात्मक समन्वय के लिए करती है तो इससे भाजपा को व्यापक स्तर पर लाभ मिल जाएगा। UP News
वीरेश तिवारी ने अपने आलेख में आगे लिखा है कि उत्तर प्रदेश में डॉ. दिनेश शर्मा भी एक बड़ा नाम है। डॉ. दिनेश शर्मा लखनऊ के महापौर रहे और वर्ष 2017 से 2022 तक उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं। उनके अनुसार डॉ. दिनेश शर्मा के पास संगठन, शिक्षा, प्रशासन और संसदीय राजनीति का अनुभव है। यही अनुभव उन्हें वरिष्ठ नेतृत्व और नई पीढ़ी के बीच एक प्रभावी सेतु बनाने में मदद कर सकता है। वीरेश तिवारी का कहना है कि डॉ. शर्मा को केवल किसी एक सामाजिक पहचान के आधार पर देखना उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को सीमित करना होगा। उनकी वास्तविक उपयोगिता संगठनात्मक अनुभव और विभिन्न वर्गों के साथ संवाद की क्षमता में है। UP News
अपने आलेख में वीरेश तिवारी ने भाजपा के सामने मौजूद राजनीतिक चुनौती को केवल जातीय समीकरणों से जोड़कर देखने के बजाय सर्वसमाज के विश्वास से जोड़ने की बात कही है। उन्होंने लिखा है कि भाजपा के सामने मूल प्रश्न यह होना चाहिए कि क्या पार्टी फिर ऐसा सामाजिक विश्वास कायम कर सकती है, जिसमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, पिछड़े, दलित, किसान, व्यापारी, युवा, महिलाएं और समाज के अन्य वर्ग स्वयं को पार्टी की राजनीतिक यात्रा का समान भागीदार महसूस करें। उनके अनुसार कलराज मिश्र और डॉ. दिनेश शर्मा को इसी व्यापक दृष्टिकोण के साथ जिम्मेदारी दी जा सकती है। दोनों नेताओं को किसी एक जाति अथवा वर्ग के प्रतिनिधि के तौर पर पेश करने के बजाय सर्वसमाज के बीच संवाद और विश्वास मजबूत करने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। UP News
वीरेश तिवारी के अनुसार यदि भाजपा नेतृत्व इन दोनों नेताओं की भूमिका बढ़ाने पर विचार करता है तो यह केवल उन्हें कोई संगठनात्मक पद देने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्हें प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में जनसंवाद, सामाजिक समन्वय, कार्यकर्ताओं से संपर्क और नए मतदाता वर्गों तक पहुंच बनाने की स्पष्ट राजनीतिक जिम्मेदारी दी जा सकती है। उनका मानना है कि ऐसी जिम्मेदारी से दोनों नेताओं का अनुभव पार्टी के लिए व्यापक सामाजिक संपर्क अभियान में बदल सकता है। UP News
आलेख में वीरेश तिवारी ने यह भी रेखांकित किया है कि कलराज मिश्र की उम्र भले ही अधिक हो चुकी है, लेकिन राजनीतिक अनुभव का मूल्य केवल उम्र के आंकड़े से निर्धारित नहीं किया जा सकता। वहीं डॉ. दिनेश शर्मा अपेक्षाकृत नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं और वरिष्ठ नेतृत्व तथा युवा पीढ़ी के बीच संवाद का माध्यम बन सकते हैं। उनके अनुसार भाजपा को ऐसे संतुलन की आवश्यकता है, जिसमें वरिष्ठ नेताओं का अनुभव और वर्तमान पीढ़ी की राजनीतिक ऊर्जा एक साथ दिखाई दे। UP News
वीरेश तिवारी का कहना है कि उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी समय से दूर दिखाई दे सकता है, लेकिन राजनीतिक दलों के लिए इसकी तैयारी का समय यही है। भाजपा को अपने संगठनात्मक ढांचे के साथ-साथ सामाजिक संपर्क और जनसंवाद की रणनीति पर भी अभी से काम करना होगा। उनके अनुसार किसी भी राजनीतिक दल की दीर्घकालिक सफलता केवल एक जाति, एक वर्ग या एक चेहरे के सहारे संभव नहीं है। उत्तर प्रदेश की सामाजिक संरचना इतनी व्यापक और विविध है कि यहां राजनीतिक सफलता के लिए सर्वसमाज का विश्वास जरूरी है। UP News
वीरेश तिवारी ने अपने आलेख के निष्कर्ष में कहा है कि केवल कलराज मिश्र और डॉ. दिनेश शर्मा को जिम्मेदारी देने से भाजपा की जीत सुनिश्चित होने का दावा करना जल्दबाजी होगा। हालांकि, यदि पार्टी इन दोनों नेताओं के अनुभव, राजनीतिक संपर्क और स्वीकार्यता का व्यापक उपयोग करती है तो उत्तर प्रदेश में अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर उसके सामने हो सकता है। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश में भाजपा की वापसी केवल चुनावी नारों और गणित से नहीं, बल्कि संवाद, विश्वास और सर्वसमाज को साथ लेकर चलने वाली राजनीति से संभव होगी। वीरेश तिवारी ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और उत्तर प्रदेश संगठन से इस संभावना पर गंभीरता से विचार करने की अपेक्षा जताई है। उनका मानना है कि 2027 की राजनीतिक चुनौती के बीच अनुभवी नेतृत्व और नई पीढ़ी के बीच बेहतर समन्वय भाजपा की रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। UP News
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