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प्रदेश इस समय भीषण गर्मी और बिजली संकट की दोहरी मार झेल रहा है। तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा है, वहीं दूसरी ओर बिजली की रिकॉर्ड मांग ने पावर सिस्टम की हालत बिगाड़ दी है।

UP News : उत्तर प्रदेश इस समय भीषण गर्मी और बिजली संकट की दोहरी मार झेल रहा है। तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा है, वहीं दूसरी ओर बिजली की रिकॉर्ड मांग ने पावर सिस्टम की हालत बिगाड़ दी है। स्थिति यह हो गई है कि कई जिलों में घंटों अघोषित कटौती हो रही है, ट्रांसफॉर्मर जवाब दे रहे हैं और बिजली विभाग के कर्मचारी लगातार बढ़ते फॉल्ट से जूझ रहे हैं। राजधानी लखनऊ से लेकर नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, मेरठ और वाराणसी तक हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि भीषण गर्मी में बिजली कटौती ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है।
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ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 30 हजार मेगावाट के पार पहुंच चुकी है। चालू वित्तीय वर्ष में यह मांग 31,486 मेगावाट तक दर्ज की गई, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। गर्मी बढ़ने के साथ एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य बिजली उपकरणों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। खासतौर पर रात के समय बिजली की खपत अचानक दोगुनी हो रही है, जिससे कई फीडर ओवरलोड हो जा रहे हैं।
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ऊर्जा विभाग का दावा है कि प्रदेश में बिजली उत्पादन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। इसके बावजूद समस्या इसलिए बढ़ रही है क्योंकि वितरण व्यवस्था पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार बिजली सप्लाई सिस्टम में सबसे बड़ी चुनौती मैनपावर की कमी और ओवरलोड फीडरों की है। रात के समय कई इलाकों में ट्रिपिंग, तार टूटने और ट्रांसफॉर्मर फॉल्ट की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार पिछले वर्षों की तुलना में संविदा कर्मचारियों की संख्या काफी घटा दी गई है। पहले शहरी क्षेत्रों में निगरानी और फॉल्ट सुधार के लिए 36 कर्मचारी तैनात रहते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 22 रह गई है। ग्रामीण इलाकों में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है, जहां पहले 20 कर्मचारियों की टीम रहती थी, अब केवल 12 लोगों के भरोसे व्यवस्था चल रही है। रात के समय तो हालात और गंभीर हो जाते हैं। कई उपकेंद्रों पर केवल 2 या 3 कर्मचारी ही ड्यूटी पर रहते हैं। ऐसे में एक फॉल्ट ठीक करने में 2 से 3 घंटे लग जाते हैं और दूसरे इलाकों में शिकायतें बढ़ती चली जाती हैं।
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राजधानी लखनऊ के फैजुल्लागंज, पारा, चिनहट, जानकीपुरम, राजाजीपुरम, नीलमथा और सरोजनी नगर जैसे इलाकों में लोगों को 24 से 36 घंटे तक बिजली संकट झेलना पड़ा। लगातार कटौती से परेशान लोगों ने कई जगह सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। पारा इलाके में लोगों ने गुस्से में जूनियर इंजीनियर को घेर लिया और विभागीय वाहन के टायर तक पंक्चर कर दिए। प्रदेश के अन्य जिलों में भी उपभोक्ताओं का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और खराब बताए जा रहे हैं, जहां लंबे समय तक बिजली गुल रहने से पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है।
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गर्मी बढ़ने के साथ ट्रांसफॉर्मर फेल होने, तार टूटने और फीडर ट्रिपिंग की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। कई जगह पुराने उपकरण लगातार ओवरलोड झेल रहे हैं, जिससे सप्लाई बार-बार बाधित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द अतिरिक्त मैनपावर और तकनीकी संसाधन नहीं बढ़ाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। हालात बिगड़ते देख उत्तर प्रदेश सरकार ने कई बिजली घरों पर पीएसी तैनात कर दी है ताकि विरोध प्रदर्शन के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने।
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