उत्तर प्रदेश में किरायानामा विलेखों के स्टांप और पंजीकरण शुल्क की नई व्यवस्था लागू। ₹10 लाख तक के सालाना किराये पर नई दरें, योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला।

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार के इस बड़े फैसले से उत्तर प्रदेश में मकान, दुकान, गोदाम अथवा अन्य संपत्ति किराये पर लेने और देने वालों के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार का यह फैसला बेहद फायदेमंद होगा। उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले के तहत प्रदेश में किरायेदारी और पट्टा विलेखों के पंजीकरण को आसान बनाने के लिए स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क की रियायती व्यवस्था में संशोधन किया गया है। अब किरायेदारी की अवधि और औसत वार्षिक किराये के आधार पर निर्धारित शुल्क देना होगा।
यह फैसला उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 15 सितंबर 2026 को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में मंजूर किया गया। स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग की ओर से जारी जानकारी में बताया गया है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य उत्तर प्रदेश किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ किरायानामा विलेखों के पंजीकरण को प्रोत्साहित करना है। स्टाम्प एवं न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन मंत्री रवीन्द्र जायसवाल ने इस निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि नई व्यवस्था से किरायानामा पंजीकरण कराने वालों पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ कम होगा। विभाग का मानना है कि शुल्क को तर्कसंगत और निर्धारित करने से अधिक से अधिक किरायेदारी विलेख पंजीकृत हो सकेंगे।UP News
नई व्यवस्था में औसत वार्षिक किराये को आधार बनाकर तीन श्रेणियां बनाई गई हैं। किरायेदारी की अवधि के अनुसार स्टांप शुल्क और प्रभावी पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है।
प्रेस नोट के अनुसार, उपरोक्त दरें प्रभावी स्टांप शुल्क तथा प्रभावी पंजीकरण शुल्क दोनों के लिए लागू होंगी। यानी पात्र किरायानामा विलेखों के मामले में दोनों शुल्कों की गणना इसी निर्धारित संरचना के आधार पर होगी।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ₹10 लाख से अधिक औसत वार्षिक किराये वाले किरायानामा विलेखों को पूरी तरह रियायत से बाहर नहीं किया गया है। ऐसे मामलों में पहले ₹10 लाख तक की वार्षिक किराये की राशि पर निर्धारित रियायती शुल्क व्यवस्था लागू होगी। इसके बाद बची हुई राशि पर भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 के संबंधित प्रावधानों के अनुसार स्टांप शुल्क और सामान्य पंजीकरण शुल्क की गणना की जाएगी। इससे बड़े किराये वाले विलेखों के मामले में भी शुरुआती ₹10 लाख की राशि पर निर्धारित राहत उपलब्ध रहेगी।UP News
विभागीय आंकड़ों के आधार पर सरकार ने पिछली व्यवस्था के प्रभाव का भी आकलन किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 19 नवंबर 2025 से 19 मई 2026 के बीच पंजीकृत विलेखों के आंकड़ों के आधार पर लगभग ₹8.31 करोड़ की अतिरिक्त राजस्व हानि का अनुमान सामने आया। इसके बाद सरकार ने छूट की व्यवस्था को नए सिरे से तर्कसंगत बनाने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य एक तरफ आम किरायेदार और मकान मालिक को राहत देना और दूसरी तरफ सरकारी राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव को नियंत्रित करना है।
नई व्यवस्था मुख्य रूप से 10 वर्ष तक की अवधि वाले किरायेदारी/पट्टा विलेखों पर लागू है। सरकार का लक्ष्य है कि मकान मालिक और किरायेदार अपने समझौते को औपचारिक रूप से पंजीकृत कराएं। हाईकोर्ट अथवा अन्य न्यायिक विवादों की स्थिति में पंजीकृत दस्तावेज पक्षों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी रिकॉर्ड बन सकते हैं। केंद्र और राज्य के संबंधित कानूनों के तहत एक वर्ष से अधिक अवधि वाले कई प्रकार के पट्टा/लीज दस्तावेजों के पंजीकरण का महत्व भी है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि टोल संबंधी पट्टे और खनन पट्टे इस रियायती व्यवस्था के दायरे में नहीं आएंगे। इन पर संबंधित सामान्य नियमों के अनुसार शुल्क देय होगा।
सरकार की नई व्यवस्था का सीधा संबंध रोजमर्रा की किरायेदारी से है। मकान के साथ-साथ दुकान, कार्यालय, गोदाम अथवा अन्य किराये की संपत्ति लेने-देने वालों को किरायानामा पंजीकृत कराने में शुल्क का सामना करना पड़ता है। सरकार का तर्क है कि शुल्क व्यवस्था को सरल और अपेक्षाकृत कम लागत वाला बनाने से लोग अनौपचारिक अथवा अपंजीकृत किरायेदारी के बजाय पंजीकृत किरायानामा कराने के लिए प्रोत्साहित होंगे। इससे किरायेदार और मकान मालिक के अधिकारों तथा दायित्वों को दस्तावेजी आधार मिलने में मदद मिल सकती है।
उत्तर प्रदेश में किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 लागू है। नई शुल्क व्यवस्था को इसी कानूनी ढांचे के प्रभावी क्रियान्वयन से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का उद्देश्य किरायेदारी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और औपचारिक बनाना है। उत्तर प्रदेश स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग की वेबसाइट पर नागरिकों के लिए किराया/लीज विलेख का स्टांप एवं पंजीकरण शुल्क कैलकुलेटर, किरायानामा सत्यापन और अन्य ऑनलाइन सेवाएं भी उपलब्ध हैं।
योगी आदित्यनाथ सरकार के इस निर्णय में दो प्रमुख पहलू सामने आए हैं। पहला, सामान्य किरायेदारों और संपत्ति मालिकों के लिए किरायानामा पंजीकरण की लागत को सरल और कम करना। दूसरा, अधिक किराये वाले विलेखों में पूरी तरह शुल्क छूट के कारण होने वाली संभावित राजस्व हानि को नियंत्रित करना। इस तरह ₹10 लाख तक के औसत वार्षिक किराये वाले किरायानामा विलेखों के लिए निर्धारित शुल्क व्यवस्था लागू की गई है, जबकि इससे अधिक किराये वाले मामलों में ₹10 लाख तक रियायत और अतिरिक्त राशि पर सामान्य शुल्क का प्रावधान रखा गया है।UP News
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