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UP RERA New Guidelines: अगर कोई एजेंट तय समय पर रिपोर्ट नहीं देता है तो उसे संबंधित तिमाही के लिए 10 हजार रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा। अब तक एजेंटों के लिए इस तरह का कोई स्पष्ट नियम नहीं था लेकिन नए बदलाव के बाद उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है।

उत्तर प्रदेश में काम करने वाले पंजीकृत रियल एस्टेट एजेंटों के लिए अब नए नियम लागू किए गए हैं। यूपी रेरा ने साफ कर दिया है कि एजेंटों को अपने सभी लेन-देन का रिकॉर्ड रखना होगा और हर तीन महीने में इसकी रिपोर्ट भी जमा करनी होगी। अगर कोई एजेंट तय समय पर रिपोर्ट नहीं देता है तो उसे संबंधित तिमाही के लिए 10 हजार रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा। अब तक एजेंटों के लिए इस तरह का कोई स्पष्ट नियम नहीं था लेकिन नए बदलाव के बाद उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
नए नियमों के तहत रियल एस्टेट एजेंटों को अपने ग्राहकों से जुड़े सभी लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा। इसका मतलब है कि किसी भी प्रॉपर्टी की खरीद, बिक्री या लीज से जुड़ी जानकारी को सही तरीके से दर्ज करना जरूरी होगा। यूपी रेरा ने इसके लिए कुछ जरूरी रिकॉर्ड तय किए हैं। एजेंटों को कैश बुक, जर्नल, लेजर और ग्राहक रजिस्टर जैसे दस्तावेज तैयार रखने होंगे। इन रिकॉर्ड्स को लंबे समय तक सुरक्षित रखना भी जरूरी होगा ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें दिखाया जा सके।
यूपी रेरा के नए नियम के अनुसार एजेंटों को अपने रिकॉर्ड कम से कम पांच साल तक सुरक्षित रखने होंगे। यह समय प्रोजेक्ट पूरा होने या बिक्री अथवा लीज डीड के रजिस्ट्रेशन की तारीख से गिना जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि भविष्य में किसी विवाद, शिकायत या जांच की स्थिति में पूरी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सके।
नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव तिमाही रिपोर्ट को लेकर किया गया है। अब हर पंजीकृत रियल एस्टेट एजेंट को तीन महीने के दौरान हुए सभी लेन-देन की जानकारी यूपी रेरा की वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। यह जानकारी तिमाही खत्म होने के 15 दिनों के भीतर जमा करनी होगी। यदि कोई एजेंट निर्धारित समय सीमा के अंदर रिपोर्ट जमा नहीं करता है तो उस पर 10 हजार रुपये का विलंब शुल्क लगाया जाएगा।
सिर्फ प्रॉपर्टी से जुड़े लेन-देन ही नहीं बल्कि एजेंसी में काम करने वाले कर्मचारियों की जानकारी भी यूपी रेरा को देनी होगी। एजेंटों को अपनी तिमाही रिपोर्ट में कर्मचारियों से जुड़ी जरूरी जानकारी भी शामिल करनी होगी। इससे रियल एस्टेट कारोबार में अधिक पारदर्शिता आएगी और एजेंटों की गतिविधियों पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी।
यूपी रेरा ने यह भी तय किया है कि जब कोई एजेंट पहली बार रिपोर्ट जमा करेगा तो उसे अपने रजिस्ट्रेशन की तारीख से लेकर अब तक किए गए सभी लेन-देन की जानकारी देनी होगी। इसके बाद आगे आने वाली हर तिमाही की रिपोर्ट अलग-अलग जमा करनी होगी। इससे एजेंटों का पूरा रिकॉर्ड एक जगह उपलब्ध रहेगा।
अगर किसी मामले की जांच होती है या यूपी रेरा किसी जानकारी की मांग करता है तो एजेंटों को अपने सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। नियामक संस्था या उसके अधिकृत अधिकारी जब भी मांग करेंगे एजेंटों को रिकॉर्ड प्रस्तुत करना होगा। इसलिए अब रिकॉर्ड को सही तरीके से संभालकर रखना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।
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