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उत्तर प्रदेश में ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में “काम नहीं तो बेरोजगारी भत्ता” मॉडल पर आधारित नई योजना को मंजूरी दे दी गई है।

UP News : उत्तर प्रदेश में ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में “काम नहीं तो बेरोजगारी भत्ता” मॉडल पर आधारित नई योजना को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत उत्तर प्रदेश में 1 जुलाई से “विकसित भारत–रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन ग्रामीण (वीबी-जीरामजी)” योजना लागू की जाएगी। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अब ग्रामीण मजदूरों को रोजगार की गारंटी के साथ-साथ बेरोजगारी भत्ता और देरी होने पर मुआवजा भी दिया जाएगा। UP News
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नई योजना के तहत ग्रामीण श्रमिकों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार किया गया है। यदि पंजीकरण के बाद किसी श्रमिक को 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो उसे 16वें दिन से प्रतिदिन बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान किया गया है। वहीं, मजदूरी भुगतान में देरी होने पर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए 0.05 प्रतिशत प्रतिदिन की दर से मुआवजा तय किया है, जिससे श्रमिकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित हो सके। इस महत्वाकांक्षी योजना को ग्राम विकास विभाग के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने बाई सर्कुलेशन के माध्यम से मंजूरी दी है। वित्तीय संरचना के तहत योजना का 60 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी, जिससे इसकी स्थिरता और व्यापक क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। योजना के अंतर्गत ग्रामीण विकास कार्यों को चार प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जिनमें जल संरक्षण, बुनियादी ढांचे का विकास, आजीविका संवर्धन और आपदा प्रबंधन एवं जलवायु से जुड़ी तैयारियां शामिल हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बहुआयामी मजबूती मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही, योजना में यह भी तय किया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों के अकुशल श्रमिकों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी दी जाएगी। कृषि कार्यों के चरम मौसम को देखते हुए 60 दिनों की विशेष अवधि निर्धारित की गई है, जिसमें कार्य सीमित रहेंगे। मजदूरी का भुगतान मास्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से करना होगा, अन्यथा देरी की स्थिति में मुआवजा स्वतः लागू हो जाएगा। UP News
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार ने एक बहुस्तरीय और मजबूत प्रशासनिक ढांचा तैयार किया है, ताकि हर स्तर पर निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। इस व्यवस्था के शीर्ष पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद होगी, जबकि मुख्य सचिव या उनके समकक्ष वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में संचालन समिति योजना की निगरानी करेगी। जिला स्तर पर जिलाधिकारी को कार्यक्रम समन्वयक की जिम्मेदारी दी गई है, वहीं ब्लॉक स्तर पर बीडीओ कार्यक्रम अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे। ग्राम पंचायतों को श्रमिकों के पंजीकरण, रोजगार कार्ड जारी करने और स्थानीय स्तर पर कार्य आवंटन की अहम भूमिका सौंपी गई है। पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत बनाने के लिए अब श्रमिकों की उपस्थिति बायोमेट्रिक प्रणाली के माध्यम से दर्ज की जाएगी। कार्य के दौरान किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने पर श्रमिकों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में लाभार्थियों को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही शिकायत निवारण तंत्र को भी और अधिक सशक्त बनाया गया है, जिसके तहत श्रमिकों को हर स्तर पर अपनी समस्याएं दर्ज कराने और सुनवाई का पूरा अवसर मिलेगा। योजना के प्रावधानों के उल्लंघन पर सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित व्यक्ति या संस्था पर 10 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया है, जिससे व्यवस्था में अनुशासन और पारदर्शिता बनी रहे। UP News
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