UP Senior Team Trial में चयनकर्ताओं की अनुपस्थिति पर सवाल उठे हैं। दो मैदानों पर हो रहे ट्रायल मैचों में खिलाड़ियों के मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया पर चर्चा तेज है।

कानपुर। उत्तर प्रदेश की सीनियर क्रिकेट टीम के चयन के लिए आयोजित ट्रायल मैचों में युवा खिलाड़ियों (से ने मैदान पर अपना दमखम दिखाया, लेकिन उनके प्रदर्शन का आकलन करने वाले चयनकर्ताओं की अनुपस्थिति सवालों के घेरे में है। शहर के दो मैदानों पर एक साथ मुकाबले कराए जा रहे हैं, जबकि पांच सदस्यीय सीनियर चयन समिति में से केवल रिजवान शमशाद ही मौके पर मौजूद रहें, जबकि चयन समिति के चेयरमैन प्रवीण कुमार भी अब तक कानपुर नहीं पहुंचें हैं।
दो स्थानों पर मुकाबले होने के कारण सभी खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर नजर रखने के लिए चयन समिति के सदस्यों की मौजूदगी अहम मानी जा रही है। चयनकर्ताओं की अनुपस्थिति के बीच मैदान पर पिछले सत्र में कोच की भूमिका निभा चुके स्थानीय पूर्व क्रिकेटर आमिर खान रहें।
एक साथ अलग-अलग मैदानों पर मैच होने की स्थिति में चयनकर्ताओं के लिए प्रत्येक खिलाड़ी के प्रदर्शन को करीब से देखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में ट्रायल की निगरानी और खिलाड़ियों के मूल्यांकन की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
ट्रायल मैचों की चयन प्रक्रिया को लेकर कुछ पूर्व खिलाड़ियों ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिस स्तर पर प्रदेश की सीनियर टीम का चयन होना है, उसके मुकाबले प्रक्रिया में अपेक्षित गंभीरता और निगरानी नजर नहीं आ रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
कुछ खिलाड़ियों और पूर्व क्रिकेटरों के बीच यह चर्चा भी है कि अलग-अलग मुकाबलों में टीमों के संयोजन से खिलाड़ियों को प्रदर्शन का असमान अवसर मिल सकता है। कहीं मजबूत बल्लेबाजी क्रम के सामने अपेक्षाकृत कमजोर गेंदबाजी और कहीं कमजोर बल्लेबाजी के सामने अनुभवी गेंदबाजों को उतारे जाने की बातें कही जा रही हैं। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
घरेलू क्रिकेट सत्र शुरू होने के करीब होने के बावजूद चयन प्रक्रिया की निगरानी और टीम के कोचिंग व सपोर्ट स्टाफ को लेकर स्पष्टता नहीं होने से खिलाड़ियों के बीच असमंजस की स्थिति बताई जा रही है।
अब निगाहें यूपीसीए प्रबंधन पर हैं कि ट्रायल मैचों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किस व्यवस्था के तहत किया जाता है और चयन प्रक्रिया को कितना पारदर्शी रखा जाता है। खिलाड़ियों के लिए समान अवसर और निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करना इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
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