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उत्तर प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश में अब गर्भवती महिलाओं की पूरी गर्भावस्था अवधि के दौरान चार नहीं, बल्कि कम से कम छह प्रसव पूर्व जांचें (एंटीनोटल चेकअप-ANC) कराई जाएंगी।

UP News : उत्तर प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश में अब गर्भवती महिलाओं की पूरी गर्भावस्था अवधि के दौरान चार नहीं, बल्कि कम से कम छह प्रसव पूर्व जांचें (एंटीनोटल चेकअप-ANC) कराई जाएंगी। परिवार कल्याण विभाग की ओर से जारी नई गाइडलाइन का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और गर्भस्थ शिशुओं की बेहतर निगरानी सुनिश्चित करना है, ताकि संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान कर उनका उपचार किया जा सके। परिवार कल्याण महानिदेशक डॉ. एच.डी. अग्रवाल द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने के बाद गर्भावस्था के प्रत्येक महत्वपूर्ण चरण में स्वास्थ्य जांच अनिवार्य होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मातृ मृत्यु दर और नवजात शिशुओं से जुड़ी जटिलताओं को कम करने में मदद मिलेगी। UP News
प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों के अनुसार, अतिरिक्त जांचों से गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। एनीमिया, गर्भकालीन मधुमेह (जेस्टेशनल डायबिटीज), उच्च रक्तचाप, भ्रूण के विकास में रुकावट और अन्य गंभीर समस्याओं की समय पर पहचान संभव होगी। इससे कम वजन वाले बच्चों के जन्म, समय से पहले प्रसव और नवजात शिशुओं में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। नई गाइडलाइन के तहत आशा, एएनएम और अन्य फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका भी अधिक महत्वपूर्ण होगी। वे गर्भवती महिलाओं को पोषण, आयरन-फोलिक एसिड की खुराक, टीकाकरण, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, सुरक्षित प्रसव और नवजात शिशु की देखभाल से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराएंगे। UP News
स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिया है कि दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान कम से कम एक जांच प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के अंतर्गत कराना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श, रेफरल और समय पर उपचार उपलब्ध कराना है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में फिलहाल करीब 52 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं ही चार प्रसव पूर्व जांचें पूरी कर पाती हैं। नई व्यवस्था के जरिए इस अनुपात को बढ़ाने और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। UP News
पहली जांच: गर्भावस्था का पंजीकरण होने के बाद, 12 सप्ताह के भीतर
दूसरी जांच: 16 से 20 सप्ताह के बीच
तीसरी जांच: 24 से 28 सप्ताह के बीच
चौथी जांच: 28 से 32 सप्ताह के बीच
पांचवीं जांच: 32 से 36 सप्ताह के बीच
छठी जांच: 36 से 40 सप्ताह के बीच UP News
स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। डॉ. सुमन को स्वास्थ्य महानिदेशालय में निदेशक नर्सिंग नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे झांसी मंडल में अपर निदेशक के पद पर कार्यरत थीं। वहीं, पूर्व निदेशक नर्सिंग डॉ. सीमा श्रीवास्तव को कानपुर नगर स्थित यूएचएम चिकित्सालय में निदेशक एवं प्रमुख अधीक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा डॉ. खालिद रिजवान अहमद, डॉ. सुमन कुमार चौधरी, डॉ. निर्मेश भल्ला और मोहम्मद अतहर को पदोन्नत कर निदेशक बनाया गया है। स्वास्थ्य विभाग में संयुक्त निदेशक स्तर के 13 अधिकारियों के तबादले भी किए गए हैं UP News
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