उत्तर प्रदेश में एक से बढ़कर एक होनहार युवक मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश के होनहार बेटों की पंक्ति में संजय गुप्ता एक बड़ा नाम है। उत्तर प्रदेश के सिकन्द्राबाद में एक बड़ा सपना देखने वाले संजय गुप्ता की सफलता की कहानी बेमिसाल कहानी है।

UP News : उत्तर प्रदेश में एक से बढ़कर एक होनहार युवक मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश के होनहार बेटों की पंक्ति में संजय गुप्ता एक बड़ा नाम है। उत्तर प्रदेश के सिकन्द्राबाद में एक बड़ा सपना देखने वाले संजय गुप्ता की सफलता की कहानी बेमिसाल कहानी है। बनिया समाज में पैदा हुए संजय गुप्ता ने 52 हजार करोड़ रूपए की कंपनी खड़ी करके बहुत बड़ी मिसाल तैयार की है।
उत्तर प्रदेश के जिस संजय गुप्ता की बात हो रही है वह संजय गुप्ता और कोई नहीं बल्कि स्टील की प्रसिद्ध कंपनी एपीएल अपोलो कंपनी (APL Apollo) के मालिक हैं। APL Apollo अपोलो कंपनी इन दिनों भारत के स्टील मार्केट में स्थापित प्रमुख कंपनी है। वर्ष-1986 में स्टील की एक बड़ी कंपनी का सपना देखते हुए संजय गुप्ता ने उत्तर प्रदेश के सिकन्द्राबाद (बुलंदशहर) कस्बे में एक बड़ा सपना देखा था। वह सपना आज 51 हजार करोड़ रूपए की वैल्यू वाली कंपनी के रूप में साकार होकर पूरी दुनिया के सामने है।
उत्तर प्रदेश के होनहार बेटे संजय गुप्ता की यात्रा वर्ष-1986 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के सिकन्द्राबाद कस्बे से शुरू हुई थी। उनकी कंपनी का पूरा नाम एपीएल अपोलो ट्यूब्स लिमिटेड (APL Apollo Tubes Limited) भारत की सबसे बड़ी स्ट्रक्चरल स्टील ट्यूब्स और पाइप्स बनाने वाली कंपनी है। यह मुख्य रूप से ERW (Electric Resistance Welded) स्टील ट्यूब्स, पाइप्स और हॉलो सेक्शन्स बनाने का काम करती है, जो कंस्ट्रक्शन, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री में इस्तेमाल होते हैं। APL Apollo कंपनी के भारत में 11 स्टेट-ऑफ-द-आर्ट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं। इनमें से सिकंदराबाद, रायपुर, बेंगलुरु, हैदराबाद आदि के प्लांट्स तो काफी मशहूर हैं। UAE में भी एक प्लांट है। इसकी कुल प्रोडक्शन कैपेसिटी 5 मिलियन टन प्रति वर्ष (5 MTPA) है। दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम नरेंद्र मोदी स्टेडियम (मोतेरा, अहमदाबाद), भारत मंडपम (नई दिल्ली), यशोभूमि (भारत इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर), केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (बेंगलुरु)- टर्मिनल-2, जेवर एयरपोर्ट और तिरुपति रेलवे स्टेशन के डेवलपमेंट में APL Apollo के प्रोडक्ट्स इस्तेमाल हुए हैं।
संजय गुप्ता ने परिवार के कारोबार में लगाए चार चांद
उत्तर प्रदेश के मूल निवासी संजय गुप्ता की कंपनी एपीएल अपोलो ने अब बेशक बड़े-बड़े आइकॉनिक प्रोजेक्ट्स पर काम किया है, लेकिन इसकी शुरुआत भी किसी भी आम कंपनी की तरह ही थी. बात 1980 के दशक की है, जब भारत एक बदलाव के मुहाने पर खड़ा था. संजय गुप्ता ने अपने पारिवारिक बिजनेस को करीब से देखा था, जो 1986 में शुरू हुआ था. उस समय स्टील ट्यूब्स और पाइप्स का बाजार बहुत बिखरा हुआ था. कोई भी दुकानदार या ठेकेदार यह नहीं पूछता था कि पाइप किस ब्रांड का है, बस यह देखा जाता था कि सबसे सस्ता कहां मिल रहा है। स्टील को एक कमोडिटी माना जाता था. यानी ऐसी चीज जिसकी कोई अपनी अलग पहचान नहीं होती. संजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि लोग उनके उत्पाद को सिर्फ लोहे के भाव न तौलें, बल्कि उसकी गुणवत्ता की कीमत समझें। जब उन्होंने पहली बार स्टील को ब्रांड बनाने की बात की, तो कुछ लोगों ने उनके आइडिया को सही नहीं बताया। उनके लिए स्टील सिर्फ स्टील था, लेकिन संजय के लिए यह भारत की तरक्की का ढांचा था.
शुरुआती दिन संघर्ष भरे थे. संजय गुप्ता अक्सर फैक्ट्रियों के चक्कर काटते और इंजीनियरों से घंटों बातें करते. उन्हें समझ आया कि जो लोग देश के बड़े प्रोजेक्ट्स बना रहे हैं, उनके लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि ढांचा मौसम और वक्त की मार झेल पाएगा या नहीं. उन्होंने महसूस किया कि अगर वह क्वालिटी में शुद्धता और साइज में सटीकता दे सकें, तो लोग ज्यादा पैसा देने को भी तैयार होंगे. लेकिन यह सिर्फ कहने-भर से नहीं होने वाला था. इसके लिए उन्होंने अपनी पूरी जमापूंजी और तकनीक को दांव पर लगा दिया. उन्होंने पारंपरिक तरीकों को छोड़कर मॉडर्न टेक्नोलॉजी अपनाई, ताकि पाइप की फिनिशिंग और मजबूती में कोई कमी न रहे. यह एक बड़ा जुआ था, क्योंकि अगर बाजार ने ब्रांडेड स्टील को स्वीकार नहीं किया होता, तो कंपनी डूब सकती थी
संजय गुप्ता की कहानी का असली टर्निंग पॉइंट तब आया जब उन्होंने स्ट्रक्चरल स्टील (Structural Steel) पर फोकस करना शुरू किया. उन्होंने देखा कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर का जो तूफान आने वाला है, उसमें भारी और पुराने ढंग के ढांचों की जगह हल्के लेकिन मजबूत स्टील ट्यूब्स लेंगे. उन्होंने आर्किटेक्ट्स और बिल्डर्स को यह समझाना शुरू किया कि कैसे उनके पाइप्स निर्माण की लागत कम कर सकते हैं और काम की रफ्तार बढ़ा सकते हैं. उन्होंने मार्केटिंग का सहारा लिया, विज्ञापन दिए और पहली बार टीवी पर स्टील के पाइप्स को चमकते हुए दिखाया गया. यह भारत के मध्यम वर्गीय परिवार और बड़े कॉर्पोरेट्स के लिए एक नया अनुभव था. लोग अब दुकान पर जाकर पूछने लगे थे- क्या अपोलो का पाइप है?
बिजनेस मॉडल की बात करें तो संजय गुप्ता ने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया. उन्होंने देशभर में हजारों डीलरों का एक ऐसा जाल बिछाया कि छोटे से छोटे गांव में भी अगर किसी को घर बनाना हो, तो उसे अपोलो स्टील आसानी से मिल जाए. उन्होंने अपनी रेंज को इतना बड़ा कर दिया कि घर की खिड़की से लेकर एयरपोर्ट के बड़े शेड तक, हर जगह उनके उत्पाद फिट बैठने लगे. 2026 की शुरुआत तक, एपीएल अपोलो ने भारत के स्ट्रक्चरल स्टील बाजार के करीब 50% हिस्से पर कब्जा कर लिया है. आज कंपनी की वैल्यू हजारों करोड़ में है, लेकिन संजय के लिए यह आंकड़ा सिर्फ एक नंबर है. उनकी असली जीत उस भरोसे में है जो हर इंजीनियर उनकी कंपनी पर करता है। वर्तमान में संजय गुप्ता की एपीएल अपोलो सिर्फ पाइप नहीं बना रही, बल्कि वह एक लाइफस्टाइल ब्रांड की तरह उभर रही है. संजय गुप्ता ने साबित कर दिया कि अगर आपकी सोच में दम है, तो आप उस चीज को भी ब्रांड बना सकते हैं जिसे लोग दीवार के अंदर छिपा देते हैं. उनका सफर उन सभी उद्यमियों के लिए एक सबक है जो सोचते हैं कि उनके पास जो प्रोडक्ट है वह बहुत आम है. संजय ने उस आम लोहे को खास पहचान दी. आज जब हम आधुनिक भारत के आसमान छूते ढांचे देखते हैं, तो वह संजय गुप्ता के उसी विजन की गवाही देते हैं जिसने कहा था कि लोहा सिर्फ लोहा नहीं होता, वह देश का भविष्य होता है।
कंपनी की वैल्यूएशन 52,493 करोड़ रुपये की है. कंपनी और बिजनेस बहुत खास है और इस बात का सबूत है कंपनी की शेयर होल्डिंग मार्च 2026 को खत्म हुई तिमाही तक कंपनी में 28.27% हिस्सेदारी प्रमोटर्स की है. प्रमोटर की हिस्सेदार से ज्यादा इसमें विदेशी निवेशक हैं. उनका प्रतिशत 33.12 है. भारत के म्यूचुअल फंडों ने भी इस कंपनी के 19.91 प्रतिशत शेयर अपने पास रखे हुए हैं. 2023 के बाद से FIIs और DIIs की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है. कंपनी का शेयर मल्टीबैगर रिटर्न दे चुका है. 9 अप्रैल 2020 में इसके एक शेयर की कीमत 133.59 रुपये थी। 2026 के 7 अप्रैल को इसकी कीमत 1890.60 रुपये है. फरवरी 2026 में इसका शेयर 2245.90 रुपये का हाई भी बना चुका है। 31 मार्च 2026 को शेयरहोल्डिंग घोषणाओं के आधार पर संजय गुप्ता की कुल संपत्ति लगभग 109.7 करोड़ रुपये आंकी गई है। UP News