छठ महापर्व पर उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल लौटने वाले यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली, मुंबई, गुजरात और जयपुर से आने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ के कारण जनरल डिब्बों में पैर रखने तक की जगह नहीं बच रही है।

UP News : उत्तर प्रदेश में छठ महापर्व मनाने के लिए अपने घर लौट रहे लोगों को इस बार रेल यात्रा के दौरान भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली, मुंबई, गुजरात और देश के दूसरे बड़े शहरों से उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र की ओर आने वाली ट्रेनों में यात्रियों की जबरदस्त भीड़ देखने को मिल रही है। हालात इतने खराब हैं कि कई ट्रेनों के जनरल डिब्बों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। कोई यात्री ट्रेन के दरवाजे पर लटककर सफर कर रहा है तो किसी ने डिब्बे के भीतर सीटों के बीच चादर बांधकर झूला बना लिया है। छठ महापर्व पर अपने परिवार के पास पहुंचने की चाहत में लोग कठिन और जोखिम भरी यात्रा करने को मजबूर दिखाई दे रहे हैं।
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उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में छठ महापर्व का विशेष महत्व है। वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, बलिया, मऊ, देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, आजमगढ़ और आसपास के जिलों में बड़ी संख्या में परिवार छठ पर्व मनाते हैं। इन जिलों के लाखों लोग रोजगार और कारोबार के सिलसिले में दिल्ली, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद और देश के दूसरे महानगरों में रहते हैं। छठ पर्व के अवसर पर बड़ी संख्या में प्रवासी अपने घर लौटते हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल से होकर गुजरने वाली ट्रेनों में यात्रियों का दबाव काफी बढ़ जाता है। सबसे अधिक परेशानी उन यात्रियों को उठानी पड़ रही है, जिनके पास आरक्षित टिकट नहीं हैं और जो जनरल डिब्बों में सफर कर रहे हैं।
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उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर छठ पर्व के दौरान ट्रेनों में यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। यह रेलवे स्टेशन उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच रेल यातायात का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। दिल्ली से चलकर कानपुर, प्रयागराज और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन होते हुए आगे जाने वाली पुरुषोत्तम एक्सप्रेस में यात्रियों की भारी भीड़ देखी गई। जनरल डिब्बों में यात्रियों को बैठने की जगह नहीं मिल रही थी। कई यात्री घंटों से खड़े होकर यात्रा कर रहे थे। ट्रेन में चढ़ने और उतरने के दौरान भी यात्रियों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी। भीड़ के कारण महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
छठ पर्व पर रेल यात्रियों की परेशानी की तस्वीर मुंबई से आने वाली लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस में भी देखने को मिली। इस ट्रेन के जनरल डिब्बों में इतनी भीड़ थी कि यात्रियों को बैठने के लिए भी जगह नहीं मिल पा रही थी। कुछ यात्रियों ने डिब्बे में सीटों के बीच चादर बांधकर झूले जैसी व्यवस्था कर ली थी। लंबी दूरी की यात्रा में थकान से बचने के लिए यात्री इसी अस्थायी व्यवस्था का सहारा लेते दिखाई दिए। कई यात्री ट्रेन के दरवाजों के पास बैठे हुए थे, जबकि कुछ दरवाजे पर लटककर सफर कर रहे थे। इस प्रकार की यात्रा बेहद खतरनाक है। चलती ट्रेन से गिरने या अचानक झटका लगने पर गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
छठ पर्व पर अपने घर लौट रहे यात्रियों ने रेल यात्रा के दौरान होने वाली परेशानियों को साझा किया है। दिल्ली से गया जा रहे गुरु प्रसाद ने बताया कि ट्रेन में इतनी अधिक भीड़ थी कि उन्हें दिल्ली से ही खड़े होकर यात्रा करनी पड़ रही थी। ट्रेन के भीतर पैर रखने तक की जगह नहीं थी। भुसावल से गया जा रहे पिंटू कुमार ने बताया कि उन्हें सीधी ट्रेन नहीं मिल सकी। दूसरी ट्रेन से यात्रा करनी पड़ी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन तक खड़े होकर सफर करना पड़ा। जयपुर से गया जा रहे संदीप कुमार ने भी ट्रेन में भीड़ के कारण दरवाजे पर लटककर यात्रा करने की परेशानी बताई। यात्रियों के ये अनुभव बताते हैं कि उत्तर प्रदेश से होकर बिहार और पूर्वांचल की ओर जाने वाले रेल मार्गों पर त्योहारों के दौरान कितना दबाव रहता है।
ट्रेनों में भारी भीड़ के कारण यात्रियों को केवल सीट नहीं मिलने की समस्या ही नहीं है। जनरल डिब्बों में शौचालय तक पहुंचना भी मुश्किल हो रहा है। कई यात्रियों ने पानी की कमी, गंदगी और बदबू जैसी समस्याओं की शिकायत की है। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों के लिए ऐसी परिस्थितियां और अधिक परेशान करने वाली हैं। घंटों खड़े रहकर यात्रा करने से यात्रियों की थकान बढ़ रही है। छठ पर्व पर घर पहुंचने की मजबूरी के कारण यात्री इन परेशानियों के बावजूद अपना सफर जारी रखे हुए हैं।
छठ पर्व पर यात्रियों की भीड़ को देखते हुए उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था की जा रही है। चंदौली के पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर जीआरपी और आरपीएफ के जवानों के साथ रेलवे के कमर्शियल विभाग के कर्मचारियों की तैनाती की गई है। रेलवे द्वारा त्योहारों के मद्देनजर विशेष ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं। इसके बावजूद नियमित ट्रेनों के जनरल डिब्बों में भारी भीड़ दिखाई दे रही है। यात्रियों की मांग है कि पूर्वांचल और बिहार जाने वाले रेल मार्गों पर विशेष ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाए। साथ ही नियमित ट्रेनों में अतिरिक्त जनरल कोच लगाए जाएं, ताकि गरीब और सामान्य यात्रियों को सुरक्षित यात्रा करने का अवसर मिल सके।
छठ महापर्व के अवसर पर पूर्वांचल और बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ कोई नई समस्या नहीं है। त्योहारों के समय यात्रियों की संख्या में अचानक वृद्धि होने से रेलवे की मौजूदा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल से बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं। इनमें मजदूर, फैक्ट्री कर्मचारी, छोटे कारोबारी और निजी संस्थानों में नौकरी करने वाले लोग शामिल हैं। इन यात्रियों के लिए छठ पर्व पर अपने घर लौटना विशेष महत्व रखता है। कई लोग महीनों तक परिवार से दूर रहते हैं और त्योहार के अवसर पर ही घर पहुंच पाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि त्योहारों के दौरान यात्रियों की संख्या का अनुमान लगाकर अतिरिक्त ट्रेनों और जनरल कोच की व्यवस्था को और प्रभावी क्यों नहीं बनाया जा सकता?
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में छठ महापर्व सूर्य उपासना और पारिवारिक आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण त्योहार है। इस अवसर पर परिवार के सदस्य एक साथ मिलकर पूजा-अर्चना करते हैं।
यही कारण है कि दिल्ली, मुंबई और दूसरे महानगरों में रहने वाले लोग किसी भी तरह अपने गांव और घर पहुंचना चाहते हैं। लेकिन घर लौटने की यह इच्छा यात्रियों की जान के लिए खतरा नहीं बननी चाहिए। ट्रेन के दरवाजे पर लटककर सफर करना या डिब्बे के भीतर असुरक्षित तरीके से चादर बांधकर सोना गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है।
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