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उत्तर प्रदेश सरकार शुक्रवार 12 जून 2026 को (आज) दिवस दिवस मना रही है। उत्तर प्रदेश सरकार का विजय दिवस भारत के महान सम्राट सूरजमल को समर्पित किया गया है। 265 वर्ष पूर्व महाराजा सूरजमल ने 12 जून को ही उत्तर प्रदेश के आगरा के किले पर जीत हासिल की थी।

UP News : उत्तर प्रदेश सरकार शुक्रवार 12 जून 2026 को (आज) दिवस दिवस मना रही है। उत्तर प्रदेश सरकार का विजय दिवस भारत के महान सम्राट सूरजमल को समर्पित किया गया है। 265 वर्ष पूर्व महाराजा सूरजमल ने 12 जून को ही उत्तर प्रदेश के आगरा के किले पर जीत हासिल की थी। आगरा के जिस किले को महाराजा सूरजमल ने बहादुरी के साथ हासिल किया था उसी किले में उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से विजय दिवस का भव्य आयोजन हो रहा है। इस आयोजन के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह हैं। UP News
महाराजा सूरजमल भारत के महान सम्राट थे। उत्तर प्रदेश सरकार ने उनकी याद में हर साल 12 जून को विजय दिवस मनाने का फैसला किया है। उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह का कहना है कि भारत के प्रत्येक नागरिक को महाराजा सूरजमल का इतिहास पता होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के बच्चे-बच्चे को महाराजा सूरजमल के ऊपर गर्व है। उत्तर प्रदेश सरकार का प्रयास है कि हर नागरिक तक महाराजा सूरजमल की शौर्य गाथा को पहुंचाया जाए। इसी कारण उत्तर प्रदेश सरकार उनको समर्पित करते हुए विजय दिवस का आयोजन कर रही है। UP News
महाराजा सूरजमल के इतिहास की बात करें तो उनका इतिहास बेहद खास है। महाराजा सूरजमल का जन्म 13 फरवरी 1707 को हुआ था। महाराजा सूरजमल के पिता का नाम राजा बदन सिंह तथा माता का नाम देवकी सिंह था। महाराजा सूरजमल की हाईट 7 फुट थी। उन्हें दोनों हाथों से तलवार चलाने में महारत हासिल थी। महाराजा सूरजमल ने अपने जीवनकाल में 80 युद्ध लडक़र अपने युद्ध कौशल की बहुत बड़ी मिसाल पेश की थी। 25 दिवंबस 1763 को दिल्ली की रक्षा के लिए युद्ध लड़ते हुए महाराजा सूरजमल वीर गति को प्राप्त हो गए थे। भारत के इतिहास में महाराजा सूरजमल हमेशा अमर रहेंगे। UP News
महाराजा सूरजमल के विषय में बताते हुए प्रसिद्ध वरिष्ठ इतिहासकार राजकिशोर ‘राजे’ बताते हैं कि, सन 1707 में मुगल बादशाह औरंगजेब की मौत के बाद मुगल सल्तनत कमजोर होती चली गई। उस समय राजस्थान के भरतपुर के जाट महाराजा सूरजमल ने मजबूत और शक्तिशाली थे। महाराजा सूरजमल ने तब अलीगढ़ को अपने अधीन किया था। लगातार जाट महाराजा सूरजमल अपनी सेना के दम पर राज्य का दायरा बढ़ाने में लगे थे। महाराजा सूरजमहल की 4000 सैनिकों की फौज थी। महाराज सूरजमल ने तभी आगरा किला पर अधिकार की योजना बनाई। जिसके चलते ही जाट सेना नायक बलराम ने 3 मई 1761 को आगरा किला के बाहर डेरा डाल दिया था। उस समय आगरा किला के किलेदार के पास महज 400 सैनिक थे। मगर, किलेदार ने 400 सैनिकों से जाट सेना का करीब एक माह तक मुकाबला किया। जिस पर 4 जून 1761 को अलीगढ़ से महाराजा सूरजमल जलेसर होकर आगरा आए। उन्होंने भी सेना के साथ आगरा किला पर कब्जा करने की रणनीति बनाई। महाराजा सूरजमल ने साम, दाम, दंड और भेद से आगरा किला पर कब्जे की रणनीति बनाई। जाट सेना ने आगरा शहर में रहने वाले किला के रक्षकों के परिवार को बंधक बना लिया। जिससे किला के रक्षकों का मनोबल टूट गया। जिस पर महाराजा सूरजमल ने आगरा किला के किलेदार को एक लाख रुपये और पांच गांव देने के आश्वासन देकर 12 जून 1761 को आगरा किला पर अधिकार कर लिया। जो आगरा किला पर किसी गैर मुस्लिम शासक का पहली बार अधिकार था। महाराजा सूरजमल ने आगरा किला पर अधिकार के बाद किलेदार को ना तो एक लाख रुपए दिए और ना ही गांव। बल्कि, आगरा किला से खजाने का हिसाब भी किलेदार से मांग लिया। UP News
वरिष्ठ इतिहासकार राजकिशोर ‘राजे’ बताते हैं कि, महाराजा सूरजमल ने एक माह की घेराबंदी और रणनीति के बाद आगरा किला पर अपना अधिकार किया। महाराजा सूरजमल को आगरा किले के खजाने से करीब 50 लाख रुपये मिले। आगरा किला से उन्होंने हाथी, घोड़ा, गोला, बारूद, तोप और पत्थर के सामान भरतपुर भेज दिया। महाराजा सूरजमल के निर्देश पर ताजमहल के मुख्य गुम्मद में मुमताज की कब्र का चांदी से बना दरवाजा उतरवा कर भरतपुर में भेज दिया था। आगरा किला पर जाट राजाओं के अधिकार के बारे में ‘राजे’ ने अपनी पुस्तक ‘तवारीख-ए-आगरा’ में विस्तार से लिखा है। वरिष्ठ इतिहासकार राजकिशोर ‘राजे’ बताते हैं कि आगरा किला पर अधिकार होने से जाट राजाओं का खजाना भर गया था। उनकी वीरता और रणनीति के देश और दुनिया में होने लगे थे। आगरा किला से खजाना बटारने के साथ ही यहां से बेशकीमती पत्थर और गहने भी भरतपुर भेजे गए। जाट राजाओं ने आगरा किला पर अधिकार के समय दीवान-ए-आम के पास राजा ‘रतन सिंह की हवेली’ का निर्माण कराया था। जो बेहद खूबसूरत है। यह हवेली आगरा किला में 18वीं शताब्दी के आसपास बनाई गई थी। अभी यह हवेली आम पर्यटकों के लिए बंद हैं। UP News
अखिल भारतीय प्रगतिशील जाट महासभा के संरक्षक यादराम सिंह वर्मा ने बताया कि मुगलों की सबसे पहली राजधानी आगरा था। इसके बाद मुगलों की राजधानी दिल्ली बना। भले ही मुगलों ने दिल्ली राजधानी बना ली थी। मगर, आगरा का मुगल काल में विशेष महत्व था। यहां पर हिंदू राजाओं की वजह से मुगल अधिक सेना आगरा में रखते थे। 12 जून 1761 को महाराजा सूरजमल के अपनी वीरता, रणनीति और विजय कौशल से आगरा किला पर अधिकार किया था। करीब 681 साल कहें तो शताब्दी के बाद आगरा किला पर अधिकार किसी हिंदू राजा का अधिकार हुआ। इसलिए, उनकी जीत का अधिक महत्व है। करीब 14 साल के शासन काल में जाट राजाओं ने मुगल वंश के पतन की नींव रखी। अखिल भारतीय प्रगतिशील जाट महासभा के प्रदेश अध्यक्ष पुरुषोत्तम फौजदार ने बताया कि आगरा किला में आयोजित होने वाले आगरा विजय दिवस कार्यक्रम के लिए भरतपुर, धौलपुर, मथुरा, आगरा, हाथरस सहित आसपास के अन्य जिलों में जनसंपर्क किया है। जिससे जाट समाज के लोग कार्यक्रम में आए। इसके साथ ही महाराजा सूरजमल के वंशज राजा विश्वेंद्र सिंह से भी मिले हैं। उन्होंने भी कार्यक्रम में आने की जानकारी दी है। इसके साथ ही आसपास के समाज के लोग आएंगे। UP News
आगरा के छावनी से भाजपा विधायक डॉ जीएस धर्मेश ने बताया कि मुगल बादशाह औरंगजेब ने गोकुल जाट को बंदी बनाकर आगरा के फुव्वारा में सरेआम कत्ल कराया था। आक्रांता औरंगजेब लगातार हिंदूओं पर अत्याचार कर रहा था। जिससे भी महाराजा सूरजमल बेहद आहत थे। तभी महाराजा सूरजमल ने प्रण किया था कि एक दिन मुगलों से बदला लेना है। इसलिए, जब औरंगजेब की मौत हुई तो मुगल कमजोर हुए। तभी महाराजा सूरजमल तब शक्तिशाली राजा हो गए। उन्होंने तब आगरा किला पर आक्रमण किया। उन्होंने आगरा किला पर कब्जा किया। इसके साथ ही ताजमहल में भूसा भर कर उसे घुडसाल के रूप में उपयोग किया था। महाराजा सूरजमल के आगरा किला पर अधिकार को विजय दिवस के रुप में मनाया जाता है। आगरा किला में इस महाराजा सूरजमल की शौर्यगाथा आगरा विजय दिवस कार्यक्रम में गूूंजेगी। सन् 25 दिसंबर 1763 में जाट महाराजा सूरजमहल का निधन हो गया। इसके बाद जाट राजाओं की शक्ति भी कम हो गई। इससे राज्य में उनकी पकड़ कमजोर हुई। ऐसे में उस समय दिल्ली में मुगलिया सल्तनत संभाल रहे मुगल बादशाह शाह आलम ने आगरा किला पर दोबारा अधिकार की योजना बनाई। मुगल बादशाह शाह आलम ने अपने खास फौजदार मिर्जा नजफ खां को बड़ी फौज के साथ आगरा भेजा। फौजदार मिर्जा नजफ खां ने 18 फरवरी 1774 में आगरा किला पर अधिकार किया। जिससे आगरा किला पर दोबारा से मुगलों का अधिकार हो गया। इस तरह आगरा किला पर करीब 13 साल तक जाट राजाओं का अधिकार रहा। UP News
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