योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, अब इस वर्ग को भी मिलेगा कैशलेस इलाज
सरकार के इस निर्णय से उत्तर प्रदेश के 1.28 लाख से अधिक शिक्षक और कर्मचारी लाभान्वित होंगे। योजना के तहत लाभार्थियों को सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ संबद्ध निजी अस्पतालों में भी इलाज की सुविधा मिलेगी। कैशलेस इलाज की सीमा 5 लाख रुपये तक तय की गई है।

UP News : उत्तर प्रदेश में शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोक भवन में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़े एक बड़े वर्ग को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त महाविद्यालयों, राज्य विश्वविद्यालयों तथा स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में कार्यरत नियमित और स्ववित्तपोषित शिक्षकों के साथ-साथ शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ मिल सकेगा। सरकार के इस निर्णय से उत्तर प्रदेश के 1.28 लाख से अधिक शिक्षक और कर्मचारी लाभान्वित होंगे। योजना के तहत लाभार्थियों को सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ संबद्ध निजी अस्पतालों में भी इलाज की सुविधा मिलेगी। कैशलेस इलाज की सीमा 5 लाख रुपये तक तय की गई है।
शिक्षक दिवस की घोषणा को कैबिनेट ने दिया अमलीजामा
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस फैसले के जरिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस घोषणा को धरातल पर उतार दिया है, जो उन्होंने 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर की थी। उस समय उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का आश्वासन दिया गया था। अब योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह फैसला लागू होने की दिशा में आगे बढ़ गया है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि इस योजना में अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के नियमित शिक्षक, स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में पढ़ाने वाले शिक्षक, स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षक और उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत नियमित व स्ववित्तपोषित शिक्षक शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इस सुविधा के दायरे में लाया गया है।
उत्तर प्रदेश सरकार पर कितना आएगा सालाना खर्च
इस स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत प्रति शिक्षक 2479.70 रुपये का प्रीमियम खर्च आएगा। सरकार के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कुल 1,28,725 लाभार्थियों को इसका फायदा मिलेगा। इस पर राज्य सरकार को हर साल करीब 31 करोड़ 92 लाख 38 हजार रुपये खर्च करने होंगे। इस राशि की व्यवस्था उच्च शिक्षा विभाग के बजट से की जाएगी। उत्तर प्रदेश में इस योजना का संचालन राज्य समग्र स्वास्थ्य एवं एकीकृत सेवा एजेंसी (साचीज) के माध्यम से किया जाएगा। लाभार्थियों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को सरकारी और पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। इलाज की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा तय मानकों के आधार पर लागू होंगी।
हर साल 30 जून तक देना होगा लाभार्थियों का ब्योरा
योजना के क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग हर वर्ष 30 जून तक शिक्षकों, कर्मचारियों और उनके आश्रितों का विवरण साचीज को उपलब्ध कराएगा। हालांकि, जो व्यक्ति पहले से केंद्र या राज्य सरकार की किसी दूसरी स्वास्थ्य योजना के तहत कवर होंगे, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा संस्थानों से जुड़े शिक्षक और कर्मचारी लंबे समय से इस तरह की सुविधा की मांग कर रहे थे। खासतौर पर सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक लगातार यह मुद्दा उठा रहे थे कि जब वे वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं, तो उन्हें भी सरकारी स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में शामिल किया जाना चाहिए। इससे पहले जनवरी में हुई एक कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार ने बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा क्षेत्र के कुछ वर्गों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की थी, लेकिन उस समय उच्च शिक्षा के कई शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी योजना से बाहर रह गए थे। इसके बाद विभिन्न शिक्षक संगठनों, जिनमें उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ और लुआक्टा जैसे संगठन भी शामिल हैं, ने सरकार से छूटे हुए वर्ग को भी योजना में शामिल करने की मांग की थी।
फैसले से शिक्षकों और कर्मचारी संगठनों में खुशी
अब योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में खुशी का माहौल है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह फैसला न सिर्फ कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े हजारों परिवारों को भी राहत देगा। माना जा रहा है कि इस निर्णय से उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा। मंगलवार को हुई बैठक में कैशलेस इलाज योजना के अलावा उत्तर प्रदेश के विकास, प्रशासन और सुशासन से जुड़े करीब 30 प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा उच्च शिक्षा क्षेत्र के शिक्षकों और कर्मचारियों को चिकित्सा बीमा योजना में शामिल किए जाने के फैसले की रही। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश में शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोक भवन में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़े एक बड़े वर्ग को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त महाविद्यालयों, राज्य विश्वविद्यालयों तथा स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में कार्यरत नियमित और स्ववित्तपोषित शिक्षकों के साथ-साथ शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ मिल सकेगा। सरकार के इस निर्णय से उत्तर प्रदेश के 1.28 लाख से अधिक शिक्षक और कर्मचारी लाभान्वित होंगे। योजना के तहत लाभार्थियों को सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ संबद्ध निजी अस्पतालों में भी इलाज की सुविधा मिलेगी। कैशलेस इलाज की सीमा 5 लाख रुपये तक तय की गई है।
शिक्षक दिवस की घोषणा को कैबिनेट ने दिया अमलीजामा
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस फैसले के जरिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस घोषणा को धरातल पर उतार दिया है, जो उन्होंने 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर की थी। उस समय उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का आश्वासन दिया गया था। अब योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह फैसला लागू होने की दिशा में आगे बढ़ गया है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि इस योजना में अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के नियमित शिक्षक, स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में पढ़ाने वाले शिक्षक, स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षक और उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत नियमित व स्ववित्तपोषित शिक्षक शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इस सुविधा के दायरे में लाया गया है।
उत्तर प्रदेश सरकार पर कितना आएगा सालाना खर्च
इस स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत प्रति शिक्षक 2479.70 रुपये का प्रीमियम खर्च आएगा। सरकार के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कुल 1,28,725 लाभार्थियों को इसका फायदा मिलेगा। इस पर राज्य सरकार को हर साल करीब 31 करोड़ 92 लाख 38 हजार रुपये खर्च करने होंगे। इस राशि की व्यवस्था उच्च शिक्षा विभाग के बजट से की जाएगी। उत्तर प्रदेश में इस योजना का संचालन राज्य समग्र स्वास्थ्य एवं एकीकृत सेवा एजेंसी (साचीज) के माध्यम से किया जाएगा। लाभार्थियों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को सरकारी और पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। इलाज की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा तय मानकों के आधार पर लागू होंगी।
हर साल 30 जून तक देना होगा लाभार्थियों का ब्योरा
योजना के क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग हर वर्ष 30 जून तक शिक्षकों, कर्मचारियों और उनके आश्रितों का विवरण साचीज को उपलब्ध कराएगा। हालांकि, जो व्यक्ति पहले से केंद्र या राज्य सरकार की किसी दूसरी स्वास्थ्य योजना के तहत कवर होंगे, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा संस्थानों से जुड़े शिक्षक और कर्मचारी लंबे समय से इस तरह की सुविधा की मांग कर रहे थे। खासतौर पर सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक लगातार यह मुद्दा उठा रहे थे कि जब वे वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं, तो उन्हें भी सरकारी स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में शामिल किया जाना चाहिए। इससे पहले जनवरी में हुई एक कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार ने बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा क्षेत्र के कुछ वर्गों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की थी, लेकिन उस समय उच्च शिक्षा के कई शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी योजना से बाहर रह गए थे। इसके बाद विभिन्न शिक्षक संगठनों, जिनमें उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ और लुआक्टा जैसे संगठन भी शामिल हैं, ने सरकार से छूटे हुए वर्ग को भी योजना में शामिल करने की मांग की थी।
फैसले से शिक्षकों और कर्मचारी संगठनों में खुशी
अब योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में खुशी का माहौल है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह फैसला न सिर्फ कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े हजारों परिवारों को भी राहत देगा। माना जा रहा है कि इस निर्णय से उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा। मंगलवार को हुई बैठक में कैशलेस इलाज योजना के अलावा उत्तर प्रदेश के विकास, प्रशासन और सुशासन से जुड़े करीब 30 प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा उच्च शिक्षा क्षेत्र के शिक्षकों और कर्मचारियों को चिकित्सा बीमा योजना में शामिल किए जाने के फैसले की रही। UP News












