प्रदेश भर के बुजुर्ग माता पिता उत्तर प्रदेश सरकार के ताजा फैसले को ऐतिहासिक फैसला बता रहे हैं। दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश के बुजुर्गों के हक में एक बड़ा फैसला किया था।

UP News : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक फैसले की खूब तारीफ हो रही है। प्रदेश भर के बुजुर्ग माता पिता उत्तर प्रदेश सरकार के ताजा फैसले को ऐतिहासिक फैसला बता रहे हैं। दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश के बुजुर्गों के हक में एक बड़ा फैसला किया था। उत्तर प्रदेश सरकार के इस बड़े फैसले से प्रदेश में कलयुगी बेटे-बेटियों के ऊपर बड़ी पाबंदी लगाने का प्रावधान है। UP News
आपको बता दें कि मंगलवार को हुई उत्तर प्रदेश की कैबिनेट की बैठक बहुत बड़ा फैसला किया गया है। इस फैसले में तय किया गया है कि अगर कोई कलयुगी बेटा-बेटी या अन्य संतान अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल नहीं करती, उनके साथ दुव्र्यवहार करती है या उन्हें मानसिक अथवा शारीरिक परेशानी देती है, तो माता-पिता के लिए ऐसी संतान को अपनी संपत्ति और उत्तराधिकार से बाहर करने की राह आसान होगी। योगी सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के हित में नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी दी है। उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले को प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। खास बात यह है कि बुजुर्गों को अपनी शिकायतों के समाधान के लिए व्यवस्था को अधिक सरल बनाने की तैयारी है। इसके लिए टोल-फ्री नंबर की व्यवस्था भी किए जाने की जानकारी सामने आई है। UP News
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण से जुड़े नियमों में बदलाव को मंजूरी दी है। नई व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे बुजुर्ग माता-पिता को सुरक्षा देना है, जिन्हें अपनी ही संतान की उपेक्षा या प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। सरकार की व्यवस्था के मुताबिक, यदि संतान माता-पिता की देखभाल नहीं करती या उनके साथ दुर्व्यवहार करती है तो माता-पिता अपनी संपत्ति से उसे बेदखल करने की कार्रवाई कर सकेंगे। रिपोर्टों के अनुसार, ऐसी संतान को माता-पिता की संपत्ति के उत्तराधिकार से भी बाहर किया जा सकेगा। इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू शिकायतों के त्वरित निस्तारण से जुड़ा है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, शिकायत दर्ज होने के बाद कार्रवाई को 30 दिनों के भीतर पूरा करने की व्यवस्था की जा रही है। इसका उद्देश्य बुजुर्गों को लंबे समय तक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया में उलझने से बचाना है। यानी सरकार का फोकस सिर्फ नियम बनाने पर नहीं, बल्कि बुजुर्गों को अपेक्षाकृत तेज राहत उपलब्ध कराने पर भी है। UP News
बढ़ती उम्र में माता-पिता को अक्सर आर्थिक, शारीरिक और भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है। लेकिन कई मामलों में बुजुर्गों को अपनी ही संतान से उपेक्षा, दुर्व्यवहार या संपत्ति को लेकर विवाद का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में बुजुर्गों के पास अपनी संपत्ति और रहने के अधिकार को लेकर प्रभावी सुरक्षा होना बेहद महत्वपूर्ण है। योगी सरकार का नया फैसला इसी दिशा में वरिष्ठ नागरिकों की स्थिति मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा असर उन मामलों में दिखाई दे सकता है, जहां संतान माता-पिता की संपत्ति में हिस्सेदारी या अधिकार चाहती है, लेकिन माता-पिता की देखभाल करने से इनकार करती है। सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था में बुजुर्ग माता-पिता को ऐसी संतान के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता मिलेगा। हालांकि, किस मामले में किस संपत्ति पर क्या कानूनी प्रभाव पड़ेगा, यह संबंधित संपत्ति के स्वरूप, दस्तावेजों और लागू कानून पर निर्भर करेगा। इसलिए हर पारिवारिक संपत्ति विवाद में स्वतः संतान को बेदखल मान लेना सही नहीं होगा। UP News
वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति और सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी हाल में महत्वपूर्ण टिप्पणी कर चुका है। अदालत ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हुए कहा है कि उचित परिस्थितियों में माता-पिता की संपत्ति पर जबरन कब्जा करने वाले बच्चों को बेदखल किया जा सकता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा और संपत्ति की सुरक्षा से जुड़े व्यापक कानूनी ढांचे के अनुरूप महत्वपूर्ण माना जा रहा है। UP News
योगी सरकार की नई व्यवस्था में बुजुर्गों के लिए शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को भी आसान बनाने की तैयारी है। इसके लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन की व्यवस्था किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसका उद्देश्य यह है कि बुजुर्गों को अपनी समस्या लेकर अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उनकी शिकायत को संबंधित स्तर तक पहुंचाकर कार्रवाई की जा सके। योगी सरकार के इस फैसले का संदेश केवल संपत्ति विवाद तक सीमित नहीं है। इसके पीछे वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने की सोच भी दिखाई देती है। माता-पिता ने जिस संतान के पालन-पोषण और भविष्य के लिए अपना जीवन लगा दिया, उसी संतान की ओर से बुढ़ापे में उपेक्षा या प्रताड़ना की स्थिति में सरकार का यह कदम बुजुर्गों को एक मजबूत कानूनी सहारा देने वाला माना जा रहा है। UP News
यह फैसला ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए कई स्तरों पर सामाजिक सुरक्षा और सुविधा से जुड़े कदम उठाए हैं। हालिया कैबिनेट फैसलों में 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र की महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की योजना को भी मंजूरी दी गई है। इस तरह बुजुर्गों से जुड़े हालिया फैसलों में आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा, परिवहन सुविधा और अब पारिवारिक संपत्ति एवं सम्मान की सुरक्षाकृतीनों पहलू प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। योगी सरकार के इस फैसले का सबसे स्पष्ट संदेश उन संतानों के लिए है जो माता-पिता की संपत्ति पर अपना अधिकार तो चाहती हैं, लेकिन उनके बुढ़ापे में जिम्मेदारी निभाने से बचती हैं। नई व्यवस्था के बाद बुजुर्ग माता-पिता के अधिकार को अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के आधार पर ही होगी। UP News
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