उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर आयोग को “वर्तमान में सबसे भ्रष्ट आयोग” बताने वाले मुकेश कुमार वर्मा नामक व्यक्ति के खिलाफ प्रयागराज के सिविल लाइंस थाने में FIR दर्ज कराई गई है।

UP News : उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर आयोग को “वर्तमान में सबसे भ्रष्ट आयोग” बताने वाले मुकेश कुमार वर्मा नामक व्यक्ति के खिलाफ प्रयागराज के सिविल लाइंस थाने में FIR दर्ज कराई गई है। यह मामला पूरे उत्तर प्रदेश बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। अलग-अलग मीडिया समूह इस मामले अपने अपने ढंग से प्रकाशित कर रहे हैं। FIR की कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है और विपक्षी दलों ने योगी सरकार पर सवाल उठाते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब UPPSC पहले से ही भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक, आरक्षण के क्रियान्वयन और कथित अनियमितताओं को लेकर विवादों में रहा है। ऐसे में FIR की कार्रवाई ने प्रदेश की सियासत और छात्र राजनीति दोनों में नई बहस छेड़ दी है। UP News
मुकेश कुमार वर्मा, जो स्वयं को सोशल मीडिया पर पत्रकार, शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं, लगातार यूपीपीएससी से संबंधित समाचार और आरक्षण व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों को साझा कर रहे थे। हाल ही में उन्होंने विभिन्न मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर लिखा था कि “उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग वर्तमान में सबसे भ्रष्ट आयोग बन गया है।” मुकेश वर्मा ने अपनी पोस्ट में यूपीपीएससी-जे परीक्षा, आरओ-एआरओ पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं और आरक्षण से जुड़े कथित विवादों का उल्लेख किया था। इसके अलावा उन्होंने यह दावा भी किया था कि आयोग ने हाईकोर्ट में दायर हलफनामे में अनारक्षित सीटों के संबंध में कुछ तथ्य स्वीकार किए हैं। UP News
यूपीपीएससी के अनुभाग अधिकारी वकार अहमद अंसारी की शिकायत पर सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1), 197 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के तहत मामला दर्ज किया गया है। आयोग का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई जानकारी भ्रामक है और इससे अभ्यर्थियों तथा आम जनता के बीच भ्रम फैल सकता है। आयोग ने यह भी कहा कि ऐसी पोस्ट से एक संवैधानिक संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता प्रभावित होती है तथा सामाजिक वैमनस्य की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। UP News
एफआईआर दर्ज होने के बाद विपक्षी दलों ने योगी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति भर्ती प्रक्रिया और आरक्षण संबंधी सवाल उठा रहा है, तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करना उचित नहीं है।
समाजवादी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि यूपी में आरक्षण और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर उठने वाले सवालों को दबाने की कोशिश की जा रही है। वहीं कुछ पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। UP News
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का नाम इससे पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है। पिछले वर्षों में पेपर लीक, परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों और भर्ती विवादों के मामले न्यायालय तक पहुंचे हैं। 2021 में UPPSC की एक पुरानी परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच में सीबीआई ने भी कार्रवाई की थी। इसी प्रकार, आयोग से संबंधित कई मामलों में अभ्यर्थियों ने पारदर्शिता और आरक्षण के नियमों के पालन को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया है। UP News
विज्ञापन