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प्रदेश में सड़क बुनियादी ढांचे को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। एक्सप्रेस-वे और राष्ट्रीय राजमार्गों के बाद अब राज्य सरकार की नजर स्टेट हाईवे नेटवर्क को आधुनिक बनाने पर है।

UP News : उत्तर प्रदेश में सड़क बुनियादी ढांचे को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। एक्सप्रेस-वे और राष्ट्रीय राजमार्गों के बाद अब राज्य सरकार की नजर स्टेट हाईवे नेटवर्क को आधुनिक बनाने पर है। इसी कड़ी में प्रदेश के 21 प्रमुख स्टेट हाईवे को फोरलेन में विकसित करने की योजना तैयार की गई है। लोक निर्माण विभाग ने सर्वेक्षण का काम पूरा कर प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। इस परियोजना के पूरा होने का लक्ष्य दिसंबर 2027 निर्धारित किया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि इन मार्गों के चौड़ीकरण से न केवल यात्रा का समय घटेगा, बल्कि औद्योगिक, व्यावसायिक और ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी। इससे लाखों यात्रियों और व्यापारिक गतिविधियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
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प्रदेश में वर्तमान समय में करीब 142 स्टेट हाईवे हैं। इनमें से बड़ी संख्या में सड़कों का चौड़ीकरण पहले ही किया जा चुका है। अब सरकार का फोकस उन प्रमुख मार्गों पर है जहां यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। 21 नए हाईवे को फोरलेन में बदलने के बाद शेष महत्वपूर्ण मार्गों को भी चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड किए जाने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने और छोटे शहरों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने में यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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फोरलेन बनने के बाद इन मार्गों पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा बढ़ाई जाएगी। वर्तमान में कई स्टेट हाईवे पर 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा लागू है, लेकिन चौड़ीकरण और सुरक्षा मानकों के उन्नयन के बाद यह सीमा 90 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यात्रियों और माल परिवहन क्षेत्र को होगा। लंबी दूरी का सफर कम समय में पूरा हो सकेगा, जिससे ईंधन की बचत और लॉजिस्टिक लागत में भी कमी आने की संभावना है।
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फोरलेन परियोजना में वाराणसी, हरदोई, अमेठी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, देवरिया, कुशीनगर, जालौन, फरुर्खाबाद, लखनऊ, मुरादाबाद, बुलंदशहर, मेरठ, सोनभद्र, संभल, मुजफ्फरनगर, चंदौली और जौनपुर समेत 18 जिलों के महत्वपूर्ण मार्ग शामिल किए गए हैं। इन सड़कों की मौजूदा चौड़ाई 7 से 14 मीटर के बीच है, जिसे बढ़ाकर 14 से 25 मीटर तक किया जाएगा। इससे भारी वाहनों और स्थानीय यातायात दोनों के लिए आवागमन अधिक सुगम होगा।
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परियोजना में जगदीशपुर रोड, बहराइच-भिंगा-सिरसिया मार्ग, देवरिया-पडरौना राजमार्ग, पानवाड़ी मार्ग, बिलग्राम-उन्नाव-प्रयागराज रोड, वाराणसी-कछवा मार्ग, कछवा-चौबेपुर रोड, फतेहगढ़-गुरसहायगंज रोड, बुलंदशहर रोड, गोसाईगंज-बनी मोहन मार्ग, मुरादाबाद-बुलंदशहर रोड, प्रयागराज-गोरखपुर रोड, बड़ौत-मेरठ रोड, लुंबिनी रोड और कैराना-खटौली मार्ग समेत कई महत्वपूर्ण सड़कें शामिल हैं। इन मार्गों का उपयोग प्रतिदिन हजारों वाहन करते हैं। चौड़ीकरण के बाद इन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की संभावना है।
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सिर्फ सड़क चौड़ीकरण ही नहीं, बल्कि इन हाईवे पर आधुनिक सड़क सुरक्षा सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इनमें सुरक्षित डिवाइडर, क्रैश बैरियर, रंबल स्ट्रिप्स, रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड, सर्विस रोड, अंडरपास, ओवरपास और बाईपास जैसी व्यवस्थाएं शामिल होंगी। इसके अलावा ड्रेनेज सिस्टम, ट्रक पार्किंग, पेट्रोल पंप, रेस्टोरेंट, इमरजेंसी कॉलिंग बॉक्स और स्मार्ट ट्रैफिक संकेतक भी विकसित किए जाएंगे। इन सुविधाओं का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और यात्रियों को सुरक्षित एवं आरामदायक सफर उपलब्ध कराना है। प्रदेश में पहले से संचालित एक्सप्रेस-वे नेटवर्क के साथ जब ये स्टेट हाईवे भी फोरलेन हो जाएंगे, तब उत्तर प्रदेश का सड़क ढांचा देश के सबसे मजबूत नेटवर्क में शामिल हो सकता है। बेहतर सड़कें निवेश, उद्योग, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में भी अहम भूमिका निभाएंगी। आने वाले वर्षों में यह परियोजना न केवल यात्रा को आसान बनाएगी, बल्कि प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को भी नई रफ्तार देने का माध्यम बनेगी।
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