कागज से करोड़ों रुपए कमाने का फार्मूला उत्तर प्रदेश के इस युवक से सीखो
भारत
चेतना मंच
06 Sep 2025 05:21 PM
उत्तर प्रदेश का रहने वाला एक युवक बड़ा कमाल कर रहा है। उत्तर प्रदेश का रहने वाला यह युवक कागज बेचकर करोड़ों रुपए कमा रहा है। आप भी उत्तर प्रदेश के इस युवक से कागज बेचकर करोड़ों रुपए कमाने का फार्मूला सीख सकते हैं। उत्तर प्रदेश के एक छोटे कस्बे में पैदा हुए इस युवक ने कागज बेचकर बड़ा उद्योग खड़ा कर दिया है। उत्तर प्रदेश के इस युवक का कागज के कारोबार का टर्न ओवर 220 करोड़ रुपए से भी अधिक है। UP News
सफलता की कहानी हो तो अरविंद कुमार मित्तल जैसी
कागज से करोड़ों रूपए का कारोबार खड़ा करने वाले युवक का नाम अरविंद कुमार मित्तल है। अरविंद कुमार मित्तल वर्तमान समय में सफलता की कहानी (Success Story) की शानदार मिसाल हैं। अरविंद कुमार मित्तल के जानकारों का कहना है कि सफलता की कहानी (Success Story) हो तो केवल अरविंद कुमार मित्तल के जैसी हो। अरविंद कुमार मित्तल की सफलता की कहानी (Success Story) को पढ़कर आप यह जान सकते हैं कि कागज का कारोबार करके किस प्रकार से करोड़ों रुपए का बड़ा साम्राज्य खड़ा किया जा सकता है। अरविंद कुमार मित्तल उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के बहुत छोटे से कस्बे चांदपुर के मूल निवासी हैं। चांदपुर ही नहीं पूरा उत्तर प्रदेश अरविंद कुमार मित्तल के ऊपर गर्व करता है।
उत्तर प्रदेश से शुरू हुई अरविंद कुमार मित्तल की सफलता की कहानी
यह बात वर्ष-1998 की है जब अपने परिवार के सहयोग से अरविंद कुमार मित्तल ने कागज का कारोबार शुरू किया था। अरविंद कुमार मित्तल ने अपनी कंपनी का नाम अपने कस्बे चाँदपुर के नाम पर चांदपुर पेपर मिल रखा था। शुरू में उनकी कंपनी मं कुल 50 कर्मचारी काम करते थे। वर्तमान समय में चांदपुर पेपर मिल कागज उद्योग की पहचान बन गई है। आपको बता दें कि वर्तमान में चांदपुर पेपर मिल बढ़कर 20 एकड़ में फैली हुई एक बड़ी कंपनी बन गई है। इसका टर्नओवर 220 करोड़ रुपये है। इसमें 400 से ज्यादा लोग काम करते हैं। चांदपुर पेपर मिल कंपनी चांदपुर एंटरप्राइजेज लिमिटेड के नाम से रजिस्टर्ड है। यह हर दिन 140 टन पेपर बनाती है।
इसमें एमजी पोस्टर पेपर और क्रोमो पेपर शामिल हैं। पेपर बनाने के बिजनेस में दो मुख्य हिस्से होते हैं। एक हिस्सा प्रकाशन के लिए पेपर बनाता है। दूसरा हिस्सा पैकेजिंग के लिए पेपर बनाता है, जिसे एमजी पेपर कहते हैं। यह पेपर इंडस्ट्रियल कामों में इस्तेमाल होता है। चांदपुर पेपर दूसरे तरह का पेपर यानी एमजी पेपर बनाने में माहिर है। यह सफेद पेपर बनाता है जो लगभग 35-40 GSM (ग्राम प्रति वर्ग मीटर) मोटा होता है। जीएसएम पेपर की मोटाई मापने की यूनिट है। यह पेपर तंबाकू के पाउच, पाउच, जूतों को लपेटने, लेबल, साबुन को लपेटने, खाने की चीजों को लपेटने, बिलिंग में इस्तेमाल होने वाले थर्मल पेपर और टेक्सटाइल इंडस्ट्री में पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होता है। चांदपुर पेपर पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल तरीके से काम करता है। यह हर साल 35,000 टन बेकार पेपर को रीसायकल करता है। यह हर दिन 5 लाख लीटर पानी को सिंचाई के लिए साफ करता है। इसने अब तक 962 टन CO-2 उत्सर्जन को कम किया है। CO-2 एक गैस है जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है।
रद्दी कागज से बनाया जाता है नया कागज
अरविंद कुमार मित्तल ने बताया कि चांदपुर पेपर मिल बेकार पेपर खरीदती है और उसे प्रोसेस करके पेपर बनाने के लिए अच्छी क्वालिटी का मटेरियल बनाती है। फैक्ट्री कोयले का इस्तेमाल नहीं करती है। इसके बजाय, यह दूसरे और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल करती है। इसका एक मुख्य स्रोत है बगास। बगास गन्ने का रस निकालने के बाद बचा हुआ रेशेदार हिस्सा होता है। दूसरा स्रोत प्लाईवुड इंडस्ट्री से मिलने वाला बायोमास है। इसमें यूकेलिप्टस के पेड़ों की छोटी शाखाओं और पत्तियों को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। अरविंद कुमार मित्तल अपने बहनोई देवेश कुमार सिंघल के साथ मिलकर आज बिजनेस को संभालते हैं। अमित मार्केटिंग और फाइनेंस का काम देखते हैं, जबकि देवेश प्रोडक्शन का काम देखते हैं। फैक्ट्री के शुरुआती दिन मुश्किलों से भरे थे। अमित बताते हैं कि दो बड़ी दिक्कतें थीं। एक तो फाइनेंस का इंतजाम करना था।
आजकल हमें बहुत कम ब्याज दर पर लोन मिल जाता है, लेकिन उस समय यह बहुत ज्यादा था। इसलिए पैसे का इंतजाम करना एक बड़ी बात थी। इसके अलावा, यूपी में बिजली की सप्लाई अनियमित थी। यह एक और बड़ी मुश्किल थी जिसका हमने सामना किया। कंपनी रीजनल डिस्ट्रीब्यूटर और कॉर्पोरेट क्लाइंट दोनों को सर्विस देती है। पूरे भारत में 27 डिस्ट्रीब्यूटर हैं जो इसके बिजनेस का 90 प्रतिशत हिस्सा हैं। बाकी 10 प्रतिशत कॉर्पोरेट कस्टमर से आता है। बिजनेस के बढ़ने पर अमित कहते हैं, पहला साल अच्छा नहीं था। हमने 3 से 4 करोड़ रुपये पर क्लोज किया, लेकिन साल 2014 तक हम 45 करोड़ रुपये पर पहुंच गए और साल 2018 में हमने 100 करोड़ रुपये को पार कर लिया। आज हम 220 करोड़ रुपये के रेवेन्यू पर खड़े हैं। UP News