उत्तर प्रदेश में अगस्त में सामान्य से 24% अधिक बारिश हुई। जानिए सितंबर के पहले सप्ताह में यूपी के मौसम का हाल, 47 जिलों में बारिश का अलर्ट और मानसून की वापसी कब होगी।

UP News : उत्तर प्रदेश में इस साल मानसून ने मौसम का पूरा मिजाज ही बदल दिया है। जून और जुलाई में कमजोर रही बारिश की भरपाई अगस्त की झमाझम बारिश ने काफी हद तक कर दी। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में प्रदेश में सामान्य से करीब 24 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। इसके बावजूद 1 जून से 31 अगस्त तक पूरे मानसून सीजन की बारिश सामान्य से करीब 7 प्रतिशत कम रही। अब सितंबर की शुरुआत भी बारिश के लिहाज से महत्वपूर्ण है। प्रदेश में कई स्थानों पर भारी बारिश, गरज-चमक और आकाशीय बिजली का खतरा बना हुआ है। पिछले दिनों मौसम विभाग ने 47 जिलों में बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया था। UP News
जून और जुलाई में बारिश अपेक्षाकृत कमजोर रहने के कारण उत्तर प्रदेश में मानसून का आंकड़ा सामान्य से नीचे चल रहा था। लेकिन अगस्त में मौसम ने अचानक करवट ली और कई हिस्सों में लगातार भारी बारिश हुई। 1 जून से 31 अगस्त तक प्रदेश में 552.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश का आंकड़ा 593.1 मिलीमीटर है। यानी पूरे सीजन में बारिश अभी भी सामान्य से करीब 7 प्रतिशत कम है। हालांकि अगस्त की बारिश ने स्थिति में बड़ा सुधार किया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश सामान्य से ऊपर पहुंची, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में अभी भी कमी बनी हुई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 1 सितंबर तक प्रदेश में कुल 571.6 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 600.2 मिमी है। UP News
अगस्त की बारिश सिर्फ सामान्य से ज्यादा ही नहीं रही, बल्कि कुछ जिलों में लंबे समय के रिकॉर्ड भी टूटे हैं। प्रयागराज में अगस्त के दौरान 631.6 मिमी और बांदा में 646 मिमी बारिश दर्ज की गई। उपलब्ध मौसम रिकॉर्ड के अनुसार दोनों जिलों में यह अगस्त की अब तक की सबसे अधिक बारिश बताई गई है। इससे साफ है कि प्रदेश में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा। कहीं बादल कम बरसे तो कहीं कम समय में अत्यधिक बारिश ने बाढ़ और जलभराव की स्थिति पैदा कर दी। UP News
अगस्त खत्म होने के साथ मानसून के कमजोर पड़ने की उम्मीद थी, लेकिन सितंबर की शुरुआत में भी कई इलाकों में बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1 से 5 सितंबर के बीच भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। पश्चिमी यूपी में भी इस दौरान बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। वहीं 1 सितंबर को प्रदेश के दक्षिणी हिस्से के 11 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट और 24 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया था। इसके अलावा कई अन्य जिलों में गरज-चमक और वज्रपात की चेतावनी थी। UP News
अगस्त के अंतिम दिनों में प्रदेश के 47 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया था। उस दौरान लगातार बारिश से प्रदेश के कई हिस्सों में नदियों का जलस्तर बढ़ा और 16 जिले बाढ़ से प्रभावित बताए गए। इसका मतलब यह है कि सितंबर की शुरुआत में भी निचले इलाकों, नदी किनारे बसे गांवों और पहले से जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी की जरूरत है। बारिश के साथ आकाशीय बिजली और तेज हवाएं भी परेशानी बढ़ा सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और आम लोगों को खुले खेतों, पेड़ों तथा बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी जाती है। UP News
उत्तर प्रदेश में मानसून की स्थिति क्षेत्रवार अलग दिखाई दे रही है। पश्चिमी यूपी में पूरे सीजन के दौरान बारिश सामान्य के आसपास अथवा कुछ ऊपर रही है, जबकि पूर्वी यूपी में बारिश की कमी अभी भी बनी हुई है। 1 जून से 1 सितंबर तक पश्चिमी यूपी में सामान्य से करीब 3 प्रतिशत अधिक, जबकि पूर्वी यूपी में करीब 10 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। यही वजह है कि प्रदेश के एक हिस्से में अत्यधिक बारिश और दूसरे हिस्से में बारिश की कमी एक साथ दिखाई दे रही है।
यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि सितंबर में पूरे उत्तर प्रदेश में लगातार भारी बारिश होगी। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक सितंबर की शुरुआत सक्रिय रह सकती है, लेकिन इसके बाद बारिश की गतिविधियों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। राष्ट्रीय स्तर पर भी तस्वीर मिश्रित है। IMD के ताजा अनुमान के अनुसार सितंबर 2026 में देशभर में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है और सितंबर की औसत बारिश दीर्घकालिक औसत के 91 प्रतिशत से कम रहने की संभावना जताई गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि उत्तर प्रदेश में बारिश नहीं होगी। स्थानीय मौसम प्रणालियों के कारण कुछ दिनों में भारी बारिश और उसके बाद कई दिनों तक कमजोर गतिविधि दोनों संभव हैं। UP News
मानसून की वापसी किसी एक तारीख को पूरे प्रदेश से एक साथ नहीं होती। इसके लिए बारिश की गतिविधि में लगातार कमी, हवाओं के बदलते रुख और वातावरण में नमी सहित कई मौसमी संकेत देखे जाते हैं। इसलिए सितंबर शुरू होते ही मानसून की विदाई मान लेना सही नहीं होगा। मौजूदा अनुमानों में सितंबर के मध्य से मानसून की गतिविधि कमजोर पड़ने और तीसरे सप्ताह के आसपास वापसी की प्रक्रिया तेज होने की संभावना बताई जा रही है। हालांकि वास्तविक तारीख मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। UP News
सितंबर की बारिश उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। धान समेत कई खरीफ फसलों के लिए इस समय पर्याप्त नमी फायदेमंद है। लेकिन लगातार तेज बारिश होने पर खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान भी हो सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां पहले ही भारी बारिश हो चुकी है, किसानों को खेतों से पानी की निकासी पर ध्यान देना होगा। दूसरी तरफ जिन इलाकों में बारिश की कमी है, वहां सितंबर की शुरुआती बारिश फसलों के लिए राहत लेकर आ सकती है। UP News
उत्तर प्रदेश के इस मानसून की सबसे बड़ी खासियत यही रही कि जून-जुलाई की कमजोरी के बाद अगस्त में बारिश ने अचानक रफ्तार पकड़ ली। अगस्त की सामान्य से 24 प्रतिशत अधिक बारिश ने पूरे मानसून सीजन के आंकड़े को काफी सुधारा, लेकिन प्रदेश अभी भी सामान्य से नीचे है। अब सितंबर के शुरुआती दिनों में बारिश का एक और दौर प्रदेश के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। इसके बाद धीरे-धीरे मानसून कमजोर होने की संभावना है। ऐसे में यूपी के लोगों के लिए अगले कुछ दिन बारिश, बाढ़, जलभराव और आकाशीय बिजली के लिहाज से सतर्क रहने वाले हैं। UP News
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