फिलहाल उत्तर प्रदेश में करीब 67.50 लाख बुजुर्गों को वृद्धावस्था पेंशन मिल रही है। नए सिस्टम से अनुमान है कि प्रदेश के और भी ज्यादा वरिष्ठ नागरिक आसानी से इस योजना की छतरी के नीचे आ सकेंगे।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बुजुर्गों के लिए चल रही वृद्धावस्था पेंशन योजना को लेकर बड़ा सुधारात्मक कदम उठाया है। अब उत्तर प्रदेश में 60 वर्ष से अधिक उम्र के पात्र बुजुर्गों को पेंशन के लिए अलग से फॉर्म भरने की दौड़–भाग नहीं करनी पड़ेगी। कैबिनेट ने फैसला किया है कि उत्तर प्रदेश सरकार खुद ही परिवारों के डेटा के आधार पर लाभार्थियों की पहचान कर पेंशन स्वीकृत करेगी। फिलहाल उत्तर प्रदेश में करीब 67.50 लाख बुजुर्गों को वृद्धावस्था पेंशन मिल रही है। नए सिस्टम से अनुमान है कि प्रदेश के और भी ज्यादा वरिष्ठ नागरिक आसानी से इस योजना की छतरी के नीचे आ सकेंगे।
शुक्रवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट बैठक में बताया गया कि राज्य सरकार ‘एक परिवार, एक पहचान’ योजना के तहत तैयार हो रहे परिवार पहचान पत्र (Family ID) के डेटा का उपयोग करेगी। इस डेटाबेस में उत्तर प्रदेश के हर परिवार के 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के सदस्य का विवरण दर्ज होगा। इसी डेटा के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किस बुजुर्ग को वृद्धावस्था पेंशन का लाभ दिया जाना है। यानी अब उत्तर प्रदेश में किसी वरिष्ठ नागरिक को दफ्तरों के चक्कर काटकर फॉर्म भरने या कागज़ी प्रक्रिया में उलझने की जरूरत नहीं होगी।
समाज कल्याण विभाग के प्रभारी मंत्री असीम अरुण ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश में तैयार हो रही इस प्रणाली के तहत 60 साल की उम्र के करीब पहुंच रहे लोगों को डिजिटल तरीके से ट्रैक किया जाएगा।
मंत्री के अनुसार, उत्तर प्रदेश में लाभार्थी की सहमति मिलते ही अधिकतम 15 दिन के भीतर पेंशन स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।
नए नियमों के तहत उत्तर प्रदेश सरकार वृद्धावस्था पेंशन सीधे लाभार्थी के आधार से लिंक बैंक खाते में ट्रांसफर करेगी। इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि बिचौलियों और देरी की संभावनाएं भी काफी हद तक खत्म होंगी। इस व्यवस्था से उत्तर प्रदेश के उन बुजुर्गों को बड़ी राहत मिलेगी जो अब तक बैंक, तहसील या विभागीय दफ्तरों के चक्कर लगाकर पेंशन से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करते रहे हैं।
कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार ने दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम, 1962 में संशोधन को भी मंजूरी दी है। अब यह प्रावधान केवल शहरी नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी लागू होगा। श्रम मंत्री अनिल राजभर के मुताबिक, संशोधित ढांचे का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के कामगारों को बेहतर श्रम सुरक्षा देना है, साथ ही यह ध्यान रखा गया है कि छोटे व्यापारियों और छोटे प्रतिष्ठानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश में मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच विवाद कम करने के लिए किरायेदारी नियमों को सरल बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी।
सरकारी बयान के अनुसार, अब एक वर्ष के लिए 2 लाख रुपये तक के किराये वाले समझौते पर स्टांप शुल्क घटाकर 500 रुपये कर दिया गया है। इससे उत्तर प्रदेश के शहरी और अर्ध–शहरी इलाकों में किरायेदारी व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, इस कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसले उत्तर प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा, श्रम कल्याण और शहरी–किरायेदारी व्यवस्था को एक साथ मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर देखे जा रहे हैं। वृद्धावस्था पेंशन को ‘एक परिवार, एक पहचान’ के डिजिटल ढांचे से जोड़कर उत्तर प्रदेश सरकार ने बुजुर्गों के लिए लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया को ज्यादा सरल, तेज और पारदर्शी बनाने का संदेश दिया है।