प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर के मुख्य शिखर पर विशेष केसरिया ध्वज फहराएंगे, जिसे अहमदाबाद के ध्वज–शिल्पकार भरत मेवाड़ा ने तैयार किया है। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश की धरती से लहराने वाला यह ध्वज दुनिया को साफ संदेश देगा कि श्रीराम मंदिर का प्रमुख निर्माण अब अपने निर्णायक और लगभग पूर्ण

उत्तर प्रदेश का अयोध्या शहर आज एक और ऐतिहासिक घड़ी का साक्षी बनने जा रहा है। उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक राजधानी अयोध्या आज ऐसे ऐतिहासिक क्षण की दहलीज़ पर खड़ी है, जहाँ आस्था, संस्कृति और समकालीन राजनीति तीनों एक साथ नया अध्याय लिखते दिख रहे हैं। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में 25 नवंबर को होने वाला ध्वजारोहण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गौरव और आत्मसम्मान का जीवंत प्रतीक बनेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर के मुख्य शिखर पर विशेष केसरिया ध्वज फहराएंगे, जिसे अहमदाबाद के ध्वज–शिल्पकार भरत मेवाड़ा ने तैयार किया है। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश की धरती से लहराने वाला यह ध्वज दुनिया को साफ संदेश देगा कि श्रीराम मंदिर का प्रमुख निर्माण अब अपने निर्णायक और लगभग पूर्ण चरण में प्रवेश कर चुका है।
प्रधानमंत्री मोदी महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, अयोध्या पहुंचने के बाद हेलीकॉप्टर से उत्तर प्रदेश के प्रमुख शिक्षा संस्थान साकेत महाविद्यालय आएंगे। यहीं से उनका भव्य रोड शो श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की ओर आगे बढ़ेगा। इस पूरे मार्ग को उत्तर प्रदेश की संस्कृति, लोक कला और पारंपरिक आतिथ्य का जीवंत कैनवस बनाने की तैयारी है। रास्ते के दोनों ओर स्थानीय निवासियों के साथ–साथ स्कूली बच्चे और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं पारंपरिक अंदाज़ में प्रधानमंत्री का स्वागत करेंगी। सुरक्षा और प्रबंधन को सुचारु बनाने के लिए रोड शो के रूट को 8 जोन में विभाजित किया गया है, जिनकी कमान अलग–अलग महिला समूहों को सौंपी गई है, ताकि उत्तर प्रदेश की महिला शक्ति की भागीदारी भी सशक्त रूप से दिखे। कार्यक्रम से जुड़ी शुरुआती जानकारी के मुताबिक, फिलहाल प्रधानमंत्री के अयोध्या प्रवास में केवल राम मंदिर दर्शन और ध्वजारोहण समारोह ही शामिल हैं। हनुमानगढ़ी में किसी स्वतंत्र कार्यक्रम को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के अनुसार राम मंदिर पर होने वाला ध्वजारोहण महज़ एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि दुनिया के लिए यह ऐलान है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम अब अपने वास्तविक और न्यायसम्मत आसन पर प्रतिष्ठित हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम के साथ माता सीता, लक्ष्मण और भगवन हनुमान के विग्रह अब मंदिर की पहली मंजिल पर विराजमान हैं और इनकी विशेष आरती की व्यवस्था की गई है, जिसमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से लेकर देशभर से पहुंचे श्रद्धालु सम्मिलित होंगे। नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि यह केसरिया ध्वज श्रीराम के गौरव, भारतीय सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक सौहार्द का जीवंत प्रतीक बनेगा। अयोध्या की पावन धरती से उठने वाला यह संदेश सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया भर के श्रद्धालुओं को यह एहसास कराएगा कि राम मंदिर का प्रमुख निर्माण अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुँच चुका है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पूरे आयोजन की बागडोर अपने हाथ में लिए हुए हैं। उनका कहना है कि इस पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करते समय ‘सामाजिक समरसता’ को केंद्र में रखा गया है, ताकि उत्तर प्रदेश की पावन धरती से उठने वाला संदेश पूरे देश में सौहार्द और एकता की मिसाल बन सके। चंपत राय ने बताया कि समारोह के लिए देशभर के विभिन्न समुदायों, जातियों और सामाजिक समूहों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है, ताकि अयोध्या का मंच सचमुच ‘मिनी भारत’ जैसा दिखे। खास तौर पर पूर्वांचल और उत्तर प्रदेश के अलग–अलग जिलों से जुड़े लगभग 6000–8000 श्रद्धालुओं की सूची तैयार की गई है। ट्रस्ट की मंशा साफ है – अयोध्या से उठने वाली यह आवाज न किसी एक वर्ग की हो, न किसी एक क्षेत्र की, बल्कि पूरे भारत और वैश्विक भारतीय समुदाय तक पहुंचने वाला समावेशी संदेश बने।