जगतगुरु परमहंस आचार्य ने अपने बयान में खुद को भाजपा का समर्थक बताते हुए कहा कि वे देश में किसी तरह का वैमनस्य नहीं चाहते। उनके मुताबिक, वे आशंका जता रहे हैं कि नई नियमावली से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है और राजनीतिक स्तर पर भी असर पड़ सकता है।

UP News : उत्तर प्रदेश समेत देशभर में UGC के नए नियमों को लेकर विरोध का माहौल लगातार तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश की धर्मनगरी अयोध्या से एक विवादित लेकिन चर्चा में आने वाला बयान सामने आया है। अयोध्या की एक प्राचीन धार्मिक छावनी से जुड़े संत जगतगुरु परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर UGC की नई नियमावली वापस लेने की मांग की है। संत ने पत्र में कहा है कि यदि तय समयसीमा के भीतर नियम वापस नहीं लिए गए, तो उन्हें इच्छा-मृत्यु की अनुमति दी जाए। सूत्रों के मुताबिक, जगतगुरु परमहंस आचार्य का कहना है कि उन्होंने यह कदम देश में बढ़ते तनाव और सामाजिक विभाजन की आशंका को देखते हुए उठाया है। उन्होंने दावा किया कि नई नियमावली से समाज में टकराव की स्थिति बन सकती है और इसके गंभीर सामाजिक परिणाम हो सकते हैं।
संत ने पत्र में 40 दिन के भीतर निर्णय की मांग की है। उन्होंने कहा कि वे इस अवधि में प्रधानमंत्री के जवाब का इंतजार करेंगे। अयोध्या में इस बयान के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा बढ़ गई है। हालांकि, इस मुद्दे पर प्रशासन या केंद्र सरकार/UGC की तरफ से इस मांग को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जगतगुरु परमहंस आचार्य ने अपने बयान में खुद को भाजपा का समर्थक बताते हुए कहा कि वे देश में किसी तरह का वैमनस्य नहीं चाहते। उनके मुताबिक, वे आशंका जता रहे हैं कि नई नियमावली से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है और राजनीतिक स्तर पर भी असर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि UGC के नए नियमों को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र संगठनों, शिक्षक समूहों और सामाजिक संगठनों की ओर से अलग-अलग तर्क दिए जा रहे हैं। कहीं इन्हें समानता और निगरानी व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है, तो कहीं एकतरफा बताकर विरोध किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में भी कई शहरों से विरोध-प्रदर्शन और बयानबाजी की खबरें सामने आ रही हैं, जिनमें अब अयोध्या का यह मामला भी जुड़ गया है। UP News