हालांकि इस अहम फैसले के बाद भी आजम खां की जेल यात्रा फिलहाल खत्म होती नहीं दिख रही, क्योंकि दो पैन कार्ड और दस्तावेजी गड़बड़ी से जुड़े एक अन्य मामले में वे और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म अभी भी रामपुर जेल में न्यायिक हिरासत में बंद हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत में लंबे समय से चर्चा के केंद्र बने समाजवादी पार्टी के कद्दावर चेहरा और रामपुर से पूर्व सांसद आजम खां के लिए रामपुर की एमपी–एमएलए स्पेशल कोर्ट से बड़ी राहत की खबर आई है। सेना के जवानों पर कथित विवादित टिप्पणी से जुड़े आठ साल पुराने मामले में विशेष अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया और दोषमुक्त घोषित कर दिया। हालांकि इस अहम फैसले के बाद भी आजम खां की जेल यात्रा फिलहाल खत्म होती नहीं दिख रही, क्योंकि दो पैन कार्ड और दस्तावेजी गड़बड़ी से जुड़े एक अन्य मामले में वे और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म अभी भी रामपुर जेल में न्यायिक हिरासत में बंद हैं।
उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में दर्ज इस पुराने मुकदमे की जड़ें साल 2017 के चुनावी माहौल से जुड़ी हैं। 30 जून 2017 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और मौजूदा विधायक आकाश सक्सेना ने आजम खां के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि चुनाव प्रचार के दौरान आज़म खां ने भारतीय सेना के जवानों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जो सेना की गरिमा और अनुशासन के खिलाफ है। इसी शिकायत के आधार पर उत्तर प्रदेश की एमपी–एमएलए अदालत में उनके खिलाफ मामला चला। करीब आठ साल तक गवाही, जिरह और सुनवाई के बाद रामपुर की इस विशेष अदालत ने गुरुवार, 11 दिसंबर 2025 को अपना अंतिम फैसला सुना दिया।
रामपुर एमपी–एमएलए स्पेशल कोर्ट के जज ने आदेश में कहा कि इस पूरे केस में अभियोजन पक्ष पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश करने में नाकाम रहा। अदालत की नजर में न तो ऐसे दस्तावेज और न ही ऐसी गवाही सामने आ सकी, जिनके आधार पर यह सिद्ध हो सके कि आजम खां ने सेना के जवानों के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी की थी। इसी आधार पर अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आज़म खां को सभी आरोपों से बरी कर दिया और उन्हें इस केस में पूरी तरह दोषमुक्त घोषित कर दिया। उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह फैसला एक अहम मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि यह वही रामपुर है, जहां आज़म खां की सियासी पकड़ सालों तक चर्चा में रही है।
अदालत से यह राहत मिल जाने के बावजूद आज़म खां की रिहाई फिलहाल संभव नहीं दिख रही। उत्तर प्रदेश की ही अदालत ने कुछ समय पहले दो पैन कार्ड रखने और उससे जुड़े दस्तावेजी गड़बड़ी के मामले में आज़म खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म को दोषी ठहराया था। इसी सजा के सिलसिले में दोनों इन दिनों रामपुर जेल में बंद हैं और वही मामला उनकी रिहाई के रास्ते में सबसे बड़ी कानूनी बाधा बना हुआ है।
रामपुर की इस स्पेशल कोर्ट के फैसले के बाद समाजवादी पार्टी के समर्थकों और कार्यकर्ताओं में स्पष्ट रूप से राहत और उत्साह देखा जा रहा है। अदालत में सुनवाई के दिन कोर्ट परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे। उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की अफरा–तफरी या कानून-व्यवस्था की समस्या न खड़ी हो। फैसला आज़म खां के पक्ष में आते ही रामपुर से लेकर लखनऊ तक सियासी गलियारों में नई चर्चाओं की शुरुआत हो गई है। समर्थक इसे आज़म खां के लिए “मोरल विक्ट्री” बता रहे हैं, जबकि विरोधी अब भी उनके खिलाफ चल रहे दूसरे मामलों का हवाला दे रहे हैं। UP News