इस पूरे निर्णय को लेकर गोस्वामी समाज ने कड़ा एतराज जताते हुए हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी पर मनमानी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन की निगरानी में बनी कमेटी को ऐसे फैसले लेने से पहले परंपरागत सेवादारों और गोस्वामी समाज से विस्तृत बातचीत करनी चाहिए थी।

उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित विश्वप्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में भक्तों के दर्शन को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के नाम पर मंदिर के जगमोहन हिस्से से दर्शन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में धार्मिक हलकों से लेकर गोस्वामी समाज तक में नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है।
जानकारी के मुताबिक, ठाकुर बांके बिहारी हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी की बैठक 20 नवंबर को उत्तर प्रदेश के मथुरा में आयोजित की गई थी। बैठक के अगले ही दिन, 21 नवंबर को कमेटी के अध्यक्ष और सदस्य मंदिर पहुंचे और मौके की स्थिति का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान यह देखा गया कि मंदिर के अंदर जगमोहन क्षेत्र में पुरुष, महिलाएं और बच्चे सीड़ियों पर खड़े होकर दर्शन कर रहे थे। इतना ही नहीं, कुछ लोग जगमोहन में लगे बैरिकेड्स पर बच्चों को उठाकर खड़ा कर देते थे, जिससे न सिर्फ व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो रही थी बल्कि किसी बड़े हादसे की आशंका भी बढ़ गई थी। इसी पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश की इस हाई प्रोफाइल धार्मिक स्थली के लिए कमेटी ने सख्त निर्णय लेते हुए जगमोहन से होने वाले दर्शन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी कर दिया।
कमेटी के ताज़ा आदेश के मुताबिक, 22 नवंबर से किसी भी श्रद्धालु को जगमोहन में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। यानी अब भक्त इस हिस्से से खड़े होकर ठाकुर बांके बिहारी के दर्शन नहीं कर पाएंगे। सिर्फ इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े चंदन स्थान की ओर जाने वाले मार्ग पर भी रोक लगा दी गई है। वहीं, मंदिर के अंदर स्थित गणेश मंदिर का ताला खोल दिया गया है, लेकिन यहां कोई सेवादार तैनात नहीं किया जाएगा। गणेश मंदिर में केवल दानपत्र रखा जाएगा, जहां भक्त अपनी श्रद्धानुसार दान डाल सकेंगे।
इस पूरे निर्णय को लेकर गोस्वामी समाज ने कड़ा एतराज जताते हुए हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी पर मनमानी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन की निगरानी में बनी कमेटी को ऐसे फैसले लेने से पहले परंपरागत सेवादारों और गोस्वामी समाज से विस्तृत बातचीत करनी चाहिए थी।
उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की संरचना अपने आप में बेहद खास मानी जाती है। यहां गर्भगृह वह स्थान है, जहां ठाकुर जी की मूर्ति विराजमान है, जबकि आम श्रद्धालुओं के खड़े होकर दर्शन करने की जगह को ‘जगमोहन’ कहा जाता है। जगमोहन दरअसल गर्भगृह और भक्तों के बीच का वह मुख्य स्थल है, जहां विशेष अवसरों पर भीड़ सबसे ज्यादा उमड़ती है। वर्षों से भक्त यहीं खड़े होकर ठाकुर बांके बिहारी के दर्शन करते आए हैं। अब हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी के ताज़ा आदेश के बाद उत्तर प्रदेश के इस ऐतिहासिक मंदिर में दर्शन व्यवस्था का यह महत्वपूर्ण हिस्सा काफी बदल चुका है।
एक तरफ कमेटी का तर्क है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य से आने वाले भारी भक्त-समूह को देखते हुए सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। भीड़ नियंत्रण, भगदड़ की आशंका और बच्चों की सुरक्षा जैसे मुद्दों को आधार बनाकर ही जगमोहन में प्रवेश और सीढ़ियों से दर्शन पर प्रतिबंध लगाया गया है। दूसरी तरफ, गोस्वामी समाज और पारंपरिक सेवादारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से जुड़े इस मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं को बिना संवाद के बदलना उचित नहीं है। उनका मानना है कि व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना ज़रूरी है, लेकिन इसके लिए ऐसे रास्ते भी निकाले जा सकते थे, जिनसे भावनाएं आहत न हों।
हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी पिछले कुछ समय से बांके बिहारी मंदिर में व्यवस्था सुधार के लिए लगातार बैठकें कर रही है। उत्तर प्रदेश सरकार, स्थानीय प्रशासन और न्यायिक निर्देशों की पृष्ठभूमि में मंदिर की भीड़ प्रबंधन नीति को बार–बार अपडेट किया जा रहा है। हालांकि, ताज़ा आदेश के बाद यह साफ हो गया है कि आने वाले समय में बांके बिहारी मंदिर में दर्शन की परंपरागत शैली में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अब नज़रें इस पर टिकी हैं कि उत्तर प्रदेश के इस प्रमुख तीर्थस्थल में बढ़ती नाराज़गी के बीच क्या कमेटी अपने फैसले में किसी प्रकार की नरमी दिखाती है, या फिर सुरक्षा के नाम पर यह सख्ती आगे भी जारी रहेगी।