संगठन का कहना है कि यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारी पर सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें सरकारी सेवा से बाहर किया जाए। इस कदम के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया है तथा प्रशासन पर निर्णय लेने का दबाव भी बढ़ता दिख रहा है।

UP News : उत्तर प्रदेश के बरेली में निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में नया मोड़ आ गया है। जहां बीते दिनों कुछ संगठनों और समाज के एक वर्ग ने उनके समर्थन में आवाज उठाई थी, वहीं अब भीम आर्मी ने उनके खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर प्रदर्शन कर बर्खास्तगी और संपत्ति की जांच की मांग उठाई।
भीम आर्मी और भारत एकता मिशन से जुड़े पदाधिकारी व कार्यकर्ता गुरुवार को बरेली कलेक्ट्रेट गेट पर एकत्र हुए और नारेबाजी के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के बाद संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीएम रत्निका श्रीवास्तव को सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि अलंकार अग्निहोत्री के पूरे कार्यकाल से जुड़ी गतिविधियों की विस्तृत व निष्पक्ष जांच कराई जाए। संगठन का कहना है कि यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारी पर सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें सरकारी सेवा से बाहर किया जाए। इस कदम के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया है तथा प्रशासन पर निर्णय लेने का दबाव भी बढ़ता दिख रहा है।
भीम आर्मी का आरोप है कि अलंकार अग्निहोत्री ने पद पर रहते हुए जातिवादी मानसिकता के साथ काम किया और सरकारी दायित्वों को निष्पक्षता के बजाय “एक वर्ग विशेष” के हित में मोड़ा। पदाधिकारियों का कहना है कि कार्यालय में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर का चित्र न लगाए जाने को लेकर आपत्ति भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन कथित तौर पर इस पर ध्यान नहीं दिया गया। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में सरकारी कार्यालय का इस्तेमाल निजी प्रभाव बढ़ाने के लिए किया गया और प्रशासनिक मर्यादाओं को दरकिनार करते हुए सोशल मीडिया/व्हाट्सएप व कुछ संस्थाओं के जरिए जाति आधारित नेटवर्क तैयार किया गया। भीम आर्मी ने मांग की कि इन आरोपों की सूक्ष्म स्तर पर पड़ताल हो और कार्यकाल से जुड़े कथित मामलों/घोटालों की भी जांच कराई जाए। अलंकार अग्निहोत्री को लेकर उत्तर प्रदेश में पहले ही माहौल गर्म रहा है। उनके समर्थन में कुछ संगठनों के सामने आने के बाद अब भीम आर्मी के सड़क पर उतरने से यह मामला और हाई-प्रोफाइल हो गया है। स्थानीय स्तर पर इसे प्रशासनिक मुद्दे से आगे बढ़कर सामाजिक-राजनीतिक टकराव के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि अलंकार अग्निहोत्री पहले भी अपने बयानों और यूजीसी नियमों को लेकर दिए गए रुख के कारण चर्चा में रहे हैं। बाद में घटनाक्रम तेज हुआ और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई के बाद उन्हें बरेली से हटाकर लखनऊ भेजे जाने की बात भी सामने आई। अब भीम आर्मी का कहना है कि पूरे प्रकरण में उनके कार्यकाल की भूमिका और गतिविधियों की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि सच्चाई सार्वजनिक हो सके। UP News