उत्तर प्रदेश को हर हाल में बनाया जाएगा गरीब मुक्त प्रदेश

उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश में ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी कि पूरे प्रदेश में एक भी नागरिक गरीबी की रेखा के नीचे नहीं रहेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत के सबसे बड़े प्रदेश को गरीब मुक्त प्रदेश बनाकर पूरी दुनिया के सामने एक बड़ा उदाहरण पेश किया जाएगा।

गरीब मुक्त उत्तर प्रदेश के विजन पर बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
गरीब मुक्त उत्तर प्रदेश के विजन पर बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar05 Dec 2025 04:11 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर दोहराया है कि उत्तर प्रदेश को हर हाल हमें गरीब मुक्त प्रदेश बनाया जाएगा। एक निजी टीवी चैनल के साथ वार्ता करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह बात कही है। उन्होंने टीवी चैनल को बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश को गरीब मुक्त प्रदेश बनाने की योजना पर तेजी के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने यह भी बताया कि 15 अगस्त 2025 को उन्होंने खुद ही उत्तर प्रदेश को गरीब मुक्त प्रदेश बनाने की योजना की घोषणा की थी।

स्वतंतत्रता दिवस के मौके पर की गई थी उत्तर प्रदेश को गरीब मुक्त बनाने की घोषणा

आपको बता दें कि 15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश को गरीब मुक्त प्रदेश बनाने की घोषणा की गई थी। यह घोषणा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की थी। उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश में ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी कि पूरे प्रदेश में एक भी नागरिक गरीबी की रेखा के नीचे नहीं रहेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत के सबसे बड़े प्रदेश को गरीब मुक्त प्रदेश बनाकर पूरी दुनिया के सामने एक बड़ा उदाहरण पेश किया जाएगा।

क्या है उत्तर प्रदेश को गरीब मुक्त प्रदेश बनाने की पूरी योजना?

उत्तर प्रदेश को गरीब मुक्त बनाने की योजना के तहत प्रदेश के प्रत्येक परिवार की परिवार आईडी बनाकर सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ प्रत्येक परिवार तक पहुंचाया जाएगा। परिवार आईडी बन जाने के बाद यह पता लग जाएगा कि कौन-कौन से परिवार गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के सदस्यों को रोजगार तथा दूसरे संसाधन उपलब्ध कराकर एक-एक परिवार को गरीबी की रेखा से ऊपर उठाया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार के सभी सरकारी विभाग इस योजना पर तेजी के साथ काम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि गरीब मुक्त प्रदेश बनाने की योजना उत्तर प्रदेश सरकार की सर्वश्रेष्ठ योजना है। जब यह योजना उत्तर प्रदेश में सफल हो जाएगी तो धीरे-धीरे पूरे देश में लागू होगी। गरीब मुक्त योजना पूरे देश में लागू होने से एक दिन पूरा भारत देश गरीब मुक्त प्रदेश बन जाएगा।

जन कल्याण की योजनाओं से बनेगा गरीब मुक्त उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पूरा भरोसा है कि उनकी जन कल्याण की योजनाएं असर दिखा रही हैं। इन्हीं जन कल्याण की योजनाओं को पूरा करके उत्तर प्रदेश को गरीब मुक्त प्रदेश बनाया जाएगा। गरीब मुक्त प्रदेश बनने का अर्थ यह होगा कि उत्तर प्रदेश में एक भी व्यक्ति गरीबी की रेखा के नीचे नहीं रहेगा। उत्तर प्रदेश सरकार की यह योजना पूरी हो गयी तो भारत में उत्तर प्रदेश नम्बर-1 राज्य बन जाएगा। इतना ही नहीं प्रदेश के गरीब मुक्त हो जाने पर पूरी दुनिया में उत्तर प्रदेश प्रसिद्ध हो जाएगा। यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार का यह बड़ाा फैसला कब तक साकार रूप में उत्तर प्रदेश के ष्टरू योगी के सपने को पूरा करेगा। UP News

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बड़ी खबर: दो पासपोर्ट मामले में अब्दुल्ला आजम को 7 साल की जेल

यूपी के रामपुर स्थित अदालत ने दो पासपोर्ट और दो जन्म प्रमाण पत्र से जुड़े मामले में अब्दुल्ला आजम को 7 साल की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना देने का आदेश दिया। यह फैसला उत्तर प्रदेश की सियासत में विवादित पहचान बना चुके इस पिता–पुत्र की मुश्किलों को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के रामपुर से बड़ी खबर, कागजी  हेरफेर के आरोपों के बीच अब्दुल्ला आजम को 7 साल कैद
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locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar05 Dec 2025 02:44 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से चर्चा में चल रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां के बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को रामपुर की एमपी–एमएलए स्पेशल कोर्ट ने बड़ी सजा सुनाई है। यूपी के रामपुर स्थित अदालत ने दो पासपोर्ट और दो जन्म प्रमाण पत्र से जुड़े मामले में अब्दुल्ला आजम को 7 साल की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना देने का आदेश दिया। यह फैसला उत्तर प्रदेश की सियासत में विवादित पहचान बना चुके इस पिता–पुत्र की मुश्किलों को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

यूपी की जेल में बंद बाप–बेटे की तीसरी सजा

उत्तर प्रदेश के रामपुर जेल में बंद आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को इससे पहले भी जन्म प्रमाण पत्र और दो पैन कार्ड वाले प्रकरण में 7–7 साल की सजा सुनाई जा चुकी है। ताजा केस में आई सजा के साथ अब्दुल्ला आजम के खिलाफ यह तीसरी बड़ी सजा है। यूपी की कानून व्यवस्था और सियासी गलियारों में इसे सख्त संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है कि संवैधानिक पदों पर बैठे या बैठ चुके लोगों को भी कानून से बाहर नहीं माना जाएगा।

यूपी में सुर्खियों में रहा दो पासपोर्ट और दो जन्मतिथि का मामला

यह मुकदमा लंबे समय से उत्तर प्रदेश के रामपुर और लखनऊ तक की राजनीतिक चर्चाओं में बना हुआ था। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने दो अलग–अलग जन्मतिथियों के आधार पर दो पासपोर्ट बनवाए और उनका उपयोग भी किया। जांच के दौरान सामने आया कि एक पासपोर्ट में उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 दर्ज थी दूसरे पासपोर्ट में 30 सितंबर 1990 जन्मतिथि लिखी गई थी इसी विरोधाभास को आधार बनाकर धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज और गलत जानकारी देने की धाराओं में केस दर्ज हुआ, जिसकी सुनवाई यूपी की एमपी–एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) में चल रही थी।

बीजेपी विधायक ने कराया था केस दर्ज

उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी दल भाजपा के विधायक आकाश सक्सेना ने इस मामले में पहल करते हुए रामपुर के सिविल लाइंस कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अब्दुल्ला आजम ने ‘कूटरचित और असत्य दस्तावेज’ तैयार कराए, इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट हासिल किया और फिर उसका इस्तेमाल भी किया पुलिस जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट में केवल अब्दुल्ला आजम को ही नामजद किया गया।

कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी

दूसरा पासपोर्ट संख्या Z 4307442 अब्दुल्ला आजम को 10 जनवरी 2018 को जारी किया गया था। जांच में जानकारी गलत पाए जाने के बाद यह पासपोर्ट जब्त कर लिया गया।

यह पूरा मामला यूपी की एमपी–एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) में विचाराधीन था। गवाहों के बयान और बहस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

फैसले वाले दिन अब्दुल्ला आजम को उत्तर प्रदेश की रामपुर जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया और वहीं से उन्हें 7 साल कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।

बचाव पक्ष की प्रतिक्रिया

फैसला आने के बाद रामपुर जेल पहुंचे उनके वकील नासिर सुल्तान ने बताया कि वे आजम खां से मुलाकात करने पहुंचे थे, लेकिन तबीयत खराब होने के कारण मुलाकात नहीं हो पाई।

फैसले पर सवाल किए जाने पर वकील ने कहा कि “कोर्ट जो भी निर्णय देगा, हम उसका सम्मान करते हैं”। हालांकि कानूनी जानकारों का मानना है कि बचाव पक्ष ऊपरी अदालत में अपील करने का विकल्प इस्तेमाल कर सकता है। UP News

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उत्तर प्रदेश में होगा मंडल तथा कमंडल का बड़ा मुकाबला

उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ सालों से मंडल तथा कमंडल के मुकाबले की बजाय ‘‘मंडल + कमंडल” की राजनीति चल रही थी। इस बार वर्ष-2027 में ‘‘मंडल + कमंडल” की बजाय मंडल तथा कमंडल का बड़ा मुकाबला होगा।

यूपी में फिर उठी मंडल–कमंडल की लकीर, अखिलेश बनाम बीजेपी की सीधी जंग
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locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar05 Dec 2025 02:21 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मंडल तथा कमंडल का बड़ा मुकाबला होगा। उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव वर्ष-2027 में होने हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 से एक साल पहले ही चुनाव का रणक्षेत्र सजना शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश की राजनीति को समझने वाले राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 में मंडल तथा कमंडल का बड़ा मुकाबला होगा। उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ सालों से मंडल तथा कमंडल के मुकाबले की बजाय ‘‘मंडल + कमंडल” की राजनीति चल रही थी। इस बार वर्ष-2027 में ‘‘मंडल + कमंडल” की बजाय मंडल तथा कमंडल का बड़ा मुकाबला होगा।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के PDA ने बदल दिए समीकरण

उत्तर प्रदेश की राजनीति को समझने वालों का कहना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति ने करवट बदल ली है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पिछड़ा, दलित तथा अल्पसंख्यक यानि PDA का फार्मूला बनाकर प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे दी है। उत्तर प्रदेश में PDA यानि पिछड़ावर्ग, दलित वर्ग तथा अल्पसंख्यक वर्ग की संख्या को जोड़ लिया जाए तो यह संख्या 80 प्रतिशत से भी अधिक बैठती है। उत्तर प्रदेश में जीत की हैट्रिक बनाने के लिए आतुर भारतीय जनता पार्टी के पास PDA की एक काट है। भाजपा केवल हिन्दुत्व के प्रचार-प्रसार से हिन्दू मतदाताओं को एकजुट करके PDA को मात दे सकती है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 में मंडल (PDA) तथा कमंडल (हिन्दुत्व) का बड़ा मुकाबला होना तय माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में PDA का दांव चला तो होगा बड़ा बदलाव 

उत्तर प्रदेश की राजनीति को पूरी तरह समझने वालों का कहना है कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का PDA वाला फार्मूला उत्तर प्रदेश की राजनीति का गेम चेंजर साबित हो सकता है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का PDA वाला फार्मूला यदि सफल साबित हो गया तो उत्तर प्रदेश में भाजपा के विजय रथ को रोककर समाजवादी पार्टी प्रदेश में सरकार बना सकती है। अखिलेश यादव के फार्मूले को भाजपा तथा RSS मिलकर हिन्दुत्व के एजेंडे से ही विफल कर सकते हैं। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा तथा RSS ने हिन्दुत्व के एजेंडे को धार देना शुरू कर दिया है।

उत्तर प्रदेश के घर-घर ले जाया जाएगा हिन्दुत्व एजेंडा

उत्तर प्रदेश में जीत की हैट्रिक लगाने के लिए भाजपा तथा आरएसएस.(RSS) ने हिन्दुत्व के प्रचार प्रसार का अभियान तेज कर दिया है। इस अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के प्रत्येक शहर तथा कस्बे में हिन्दू सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनाई गई है। इसी के साथ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विराट हिन्दू सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की गई है। यें सभी आयोजन भाजपा के संरक्षण की भूमिका निभाने वाले आरएसएस (RSS)के शताब्दी वर्ष के नाम पर आयोजित किए जा रहे हैं। भाजपा तथा आरएसएस(RSS) का मानना है कि हिन्दुत्व का एजेंडा उत्तर प्रदेश की 80 प्रतिशत आबादी को प्रभावित करने वाला एजेंडा बनकर प्रदेश में भाजपा की सरकार तीसरी बार बनाने में सार्थक भूमिका निभाएगा। आएसएस... तथा भाजपा अभी से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 में भाजपा की सरकार बनने के प्रति आश्वस्त नजर आ रहे हैं। आरएसएस(RSS) तथा भाजपा को पता है कि उत्तर प्रदेश में सत्ता गंवाने का अर्थ यह होगा कि वर्ष-2029 के लोकसभा चुनाव में देश की सत्ता भी गंवानी पड़ सकती है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 में मंडल तथा कमंडल का बड़ा मुकाबला होना तय माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में पुराना इतिहास है मंडल तथा कमंडल का

उत्तर प्रदेश में मंडल तथा कमंडल की राजनीति का इतिहास बहुत ही पुराना है। उत्तर प्रदेश में जाति आधारित राजनीति (मंडल)की शुरूआत की बात करें तो यह दौर वर्ष-1970 में शुरू हुआ था। वर्ष-1970 में उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हुए समाजवादी चिंतक तथा नेता राम मनोहर लोहिया ने प्रदेश में पिछड़ी जातियों को एकजुट करने का अभियान शुरू किया था। मजेदार बात यह है कि राम मनोहर लोहिया खुद अगड़ी जाति (वैश्य समाज) से आते थे। राम मनोहर लोहिया ने उत्तर प्रदेश से लेकर देश भर में पिछड़ी जातियों के आरक्षण के लिए बड़े-बड़े आंदोलन चलाए। इन आंदोलनों का असर यह हुआ कि वर्ष-1979 में भारत सरकार ने पिछड़ी जातियों को आरक्षण देने की व्यवस्था करने के लिए समाजवादी नेता बिदेश्वरी प्रसाद मंडल के नेतृत्व में आयोग का गठन कर दिया। इस आयोग का नाम मंडल आयोग के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस मंडल आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश कर दी सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए। यह आरक्षण अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति को मिल रहे 22.5 प्रतिशत आरक्षण से अलग हो। हालांकि जब तक मंडल आयोग (Mandal Commission) अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपता तब तक केंद्र में सत्ता बदल गई। केंद्र की कांग्रेसी सरकार ने यह रिपोर्ट ठंडे बस्ते में डाल दी।

वर्ष-1990 में लागू हुई मंडल आयोग की रिपोर्ट

मंडल का इतिहास आगे बढ़ा तथा आया 1989-90 का दौर। तब भी उत्तर प्रदेश से ही कांग्रेस के एक बड़े नेता होते थे विश्वनाथ प्रताप सिंह (vp singh) प्रधानमंत्री राजीव गांधी(rajiv gandhi) की सरकार में मंत्री रहे। लेकिन इसी सरकार के आखिरी दौर में राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) से खफा होकर कांग्रेस से अलग रास्ते चल दिए. फिर जब 1989 में लोकसभा चुनाव हुए, तो उसमें कांग्रेस को सत्ता से बाहर रखने में सबसे प्रमुख भूमिका निभाई। तमाम दूसरे दलों के सहयोग से, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी शामिल थी, केंद्र में सरकार बनाई. वीपी सिंह प्रधानमंत्री (VP Singh) बने और 1990 में उन्होंने मंडल आयोग (Mandal Commission) की सिफारिशें लागू करने की मंजूरी दे दी। यह विशुद्ध जाति-आधारित या मंडल की राजनीति की औपचारिक शुरुआत का दौर कहा जा सकता है। उत्तर प्रदेश सहित देश में उस वक्त वीपी सिंह की सरकार के खिलाफ आंदोलन हुए थे। इन्हें ‘आरक्षण-विरोधी आंदोलन’ कहा गया। इस आंदोलन की वजह से वीपी की सरकार भी चली गई। लेकिन उत्तर प्रदेश सहित तमाम राज्यों के अन्य पिछड़े (OBC) और क्षेत्रीय नेता पूरे दमखम से उभर आए. इनमें उत्तर प्रदेश से सबसे बड़ा नाम मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) का रहा, जो तब मुख्यमंत्री पद तक पहुंच चुके थे। उन्होंने 1992 में अपनी अलग समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) बना ली। लगभग इसी दौर में,जब मंडल आयोग की सुगबुगाहट शुरू हुई और उससे जुड़े घटनाक्रम चले, तो उत्तर प्रदेश के दलित नेता कांशीराम (Dalit leader Kanshiram) ने 1984 में बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) बना ली थी। इसके माध्यम से अनुसूचित जातियों को लामबंद करने का काम किया जा रहा था. हालांकि आगे जब मायावती (Mayawati) के हाथ में बसपा की कमान आई तो उन्होंने महसूस किया कि राज्य की सिर्फ 20 प्रतिशत अनुसूचित जातियों की मदद से पार्टी सत्ता तक नहीं पहुंच सकती। इसलिए उन्होंने फिर अन्य पिछड़ों (OBC) भी अपने साथ जोडऩा शुरू कर दिया।

मंडल के बाद शुरू हुआ ‘कमंडल’ 

जब समाजवादी नेता अन्य पिछड़ों की राजनीति कर रहे थे, तभी 1989-90 के दौर में ही भाजपा (BJP) ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए आंदोलन (Ram Mandir Movement) को हवा दी थी. यानी ‘कमंडल’ की राजनीति. चूंकि केंद्र की सत्ता तक पहुंचने के लिए उत्तर प्रदेश में असर बढ़ाना जरूरी होता है, इसलिए. इस आंदोलन को 1990 में तब सबसे ज्यादा उभार मिला, जब अयोध्या में कारसेवकों को रोकने के लिए तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार ने सुरक्षा बलों को गोली चलाने का आदेश दिया। इससे मुलायम सिंह अपने यादव पिछड़े वर्गों के साथ ही मुस्लिम समुदाय के चहेते हो गए। और इधर भाजपा को हिंदू समुदाय को अपने पक्ष में एकजुट करने का आधार भी मिला। इस प्रकार उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी मंडल का प्रतीक तथा भाजपा कमंडल का प्रतीक बन गई। 

मंडल को बेअसर करने के लिए शुरू हुई ‘‘मंडल + कमंडल’’ की राजनीति

उत्तर प्रदेश में मंडल के बढ़ते प्रभाव के कारण भाजपा (BJP) को भी जल्द ही यह अहसास हो गया कि सिर्फ धार्मिक आंदोलन आधारित राजनीति लंबे समय का समाधान नहीं है. इसलिए उसने ‘कमंडल+मंडल’ का समीकरण बिठाया. उत्तर प्रदेश में मंदिर आंदोलन का प्रमुख चेहरा कल्याण सिंह को बनाया, जो अन्य पिछडे वर्ग (OBC) की ‘लोध’ जाति से ताल्लुक रखते थे. उसका प्रयोग सफल रहा. कल्याण सिंह (Kalyan Singh) की अगुवाई में भाजपा ने 1991 में पूरे बहुमत से सरकार बनाई। हालांकि वह दौर प्रयोगवादी राजनीति का था, इसलिए 1992 में अयोध्या का विवादित ढांचा ढहते ही उनकी सरकार भी चली गई. लेकिन इसी ‘कमंडल+मंडल’ ने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव तथा 2017 तथा 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को जो बंपर जीत दिलाई, उसने हर पार्टी को सोचने पर मजबूर कर दिया। हर पार्टी ‘मंडल+कमंडल’ का सूत्र आजमाने लगी। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के द्वारा शुरू किए गए पीडीए के प्रयोग ने उत्तर प्रदेश को एक बार फिर ‘‘मंडल तथा कमंडल’’ के सीधे मुकाबले के रास्ते पर लाकर खड़ा कर दिया है। विश्लेषकों का दावा है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में उत्तर प्रदेश में मंडल तथा कमंडल का बड़ा मुकाबला होगा। UP News

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