इसी दौरान इमाम को शक हुआ कि दूल्हा, दुल्हन से उम्र में काफी बड़ा है। उन्होंने निकाह की औपचारिकताएं शुरू करने से पहले दोनों की उम्र की जानकारी मांगी। यहीं से उत्तर प्रदेश के इस शांत लगने वाले निकाह कार्यक्रम में बड़ा मोड़ आ गया।

UP News : उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में एक निकाह मंडप उस वक्त सन्नाटे में बदल गया, जब इमाम साहब ने काजी के मंच से साफ शब्दों में कह दिया – “ये निकाह नहीं हो सकता।” सज–धज कर बैठी नाबालिग दुल्हन, बारात लेकर पहुंचा दूल्हा और दोनों परिवारों की खुशियों के बीच यह फैसला ऐसा था, जिसकी वजह पूरा मोहल्ला सुनकर हैरान रह गया। अंत में बारात बिना दुल्हन के ही उत्तर प्रदेश के बिजनौर से वापस लौटने पर मजबूर हो गई।
मामला उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के मोहल्ला बख्शीवाला का है। यहां स्योहारा से एक बारात दुल्हन के घर पहुंची थी। लगभग 25 लोगों की इस सादी–सी बारात के आगमन के बाद घर में निकाह की तैयारियां शुरू हुईं। दुल्हन पक्ष और दूल्हा पक्ष दोनों ही रस्मों के लिए बैठ चुके थे। इधर पूरा माहौल खुशियों भरा था, उधर निकाह पढ़ाने पहुंचे इमाम साहब बार-बार दूल्हे और दुल्हन की ओर ध्यान से देख रहे थे। इसी दौरान इमाम को शक हुआ कि दूल्हा, दुल्हन से उम्र में काफी बड़ा है। उन्होंने निकाह की औपचारिकताएं शुरू करने से पहले दोनों की उम्र की जानकारी मांगी। यहीं से उत्तर प्रदेश के इस शांत लगने वाले निकाह कार्यक्रम में बड़ा मोड़ आ गया।
जानकारी के मुताबिक, इमाम साहब को बताया गया कि दूल्हे की उम्र करीब 45 वर्ष है। इसके बाद उन्होंने दुल्हन की उम्र का प्रमाण मांगा और आधार कार्ड देखने की बात कही। जब दुल्हन का आधार कार्ड सामने आया, तो उसमें दर्ज जन्मतिथि के मुताबिक उसकी उम्र केवल 15 साल निकली। यह देखकर इमाम ने तत्काल निकाह पढ़ने से इनकार कर दिया। उन्होंने खुले शब्दों में कहा कि इतनी कम उम्र की लड़की का निकाह कराना न तो शरीयत के मुताबिक ठीक है और न ही कानून की नजर में। इसके बाद उत्तर प्रदेश के बिजनौर स्थित उस घर में खुशियों की जगह तनाव और हंगामे का माहौल बन गया।
इमाम साहब ने दुल्हन के परिजनों को समझाया कि नाबालिग बच्ची की शादी करना गलत है और भविष्य में उसके जीवन पर गंभीर असर डाल सकता है। उन्होंने परिवार को धार्मिक और कानूनी दोनों पहलू स्पष्ट करके बताया कि इस निकाह को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। पहले तो दूल्हा पक्ष ने नाराजगी जताई और हंगामा करने की कोशिश की, लेकिन इमाम अपने फैसले पर अडिग रहे। अंततः बारात को बिना निकाह के ही वापस लौटना पड़ा। मोहल्ले में लोगों के बीच यह घटना उत्तर प्रदेश में बाल विवाह और उम्र के फासले जैसे मुद्दों पर नई चर्चा का कारण बन गई।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के बिजनौर स्थित मोहल्ला बख्शीवाला में जब स्योहारा से केवल 25 बाराती पहुंचे, तो आसपास के लोग पहले ही हैरान थे कि बारात काफी छोटी है। इसी बीच बारात में मौजूद एक व्यक्ति बार-बार इमाम और घर वालों से निकाह जल्द से जल्द पढ़वाने की जिद कर रहा था। घराती चाहते थे कि पहले बारातियों को खाना खिलाया जाए, उसके बाद निकाह की रस्म पूरी हो। लेकिन उस व्यक्ति की लगातार जल्दबाज़ी से कुछ लोगों को शक होने लगा। इसी बीच इमाम साहब भी उत्तर प्रदेश के इस निकाह कार्यक्रम में पहुंच गए और औपचारिकताएं शुरू होने से पहले ही उम्र की सच्चाई सामने आ गई।
जांच–पड़ताल के दौरान एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। पता चला कि 45 वर्षीय दूल्हा पहले भी दो शादियां कर चुका है। बताया जा रहा है कि उसकी दोनों पत्नियां उसे पहले ही छोड़ चुकी हैं। अब वह तीसरी बार शादी करने जा रहा था और इसके लिए 15 साल की नाबालिग लड़की का रिश्ता तय कर दिया गया था। इमाम ने इस पूरी स्थिति को देखते हुए साफ़ कहा कि उत्तर प्रदेश हो या देश का कोई भी कोना, इस तरह के निकाह को न धार्मिक रूप से जायज़ ठहराया जा सकता है और न ही समाज इसे स्वीकार कर सकता है।
बिजनौर की यह घटना उत्तर प्रदेश में बाल विवाह और नाबालिग लड़कियों की शादी को लेकर नई बहस छेड़ रही है। एक तरफ इमाम के फैसले की सराहना हो रही है, तो दूसरी तरफ इस बात पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आज के दौर में भी परिवार इतने बड़े उम्र के फासले के साथ नाबालिग बेटी की शादी करने के लिए कैसे तैयार हो जाते हैं। फिलहाल, उत्तर प्रदेश के बिजनौर में यह मामला लोगों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर कई लोग इसे एक “साहसिक और सही समय पर लिया गया फैसला” मान रहे हैं, जिसने एक नाबालिग लड़की के जीवन को गलत दिशा में जाने से बचा लिया। UP News