बैठक में आरएसएस के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार, बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष, प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह, प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक सहित संघ के कई क्षेत्रीय पदाधिकारी मौजूद रहे।

UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत में लंबे समय से खाली पड़ी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी अब भरने की दिशा में बढ़ती दिख रही है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास पर सोमवार को हुई संघ–बीजेपी की अहम समन्वय बैठक में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर गंभीर मंथन हुआ। संगठन के शीर्ष स्तर से संकेत मिल रहे हैं कि इसी सप्ताह उत्तर प्रदेश बीजेपी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल सकता है।
उत्तर प्रदेश की राजनीतिक धुरी माने जाने वाले लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कालिदास मार्ग स्थित आवास पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बीजेपी संगठन और योगी सरकार के बीच लगभग तीन घंटे तक गहन बैठक हुई। इस समन्वय बैठक में सरकार के कामकाज की समीक्षा, संगठन की ज़मीनी पकड़ और आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश की राजनीतिक दिशा पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में आरएसएस के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार, बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष, प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह, प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक सहित संघ के कई क्षेत्रीय पदाधिकारी मौजूद रहे।
उत्तर प्रदेश बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति लगभग एक साल से टलती रही है। इस दौरान उत्तर प्रदेश का संगठनिक ढांचा तो कई स्तरों पर मजबूत किया गया, लेकिन शीर्ष पद पर अंतिम मुहर नहीं लग पाई। सूत्रों के मुताबिक, समन्वय बैठक के दौरान राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष ने उत्तर प्रदेश बीजेपी के संभावित नए अध्यक्ष का नाम बंद कमरे में साझा किया। पार्टी के भीतर यह साफ संकेत माना जा रहा है कि अब इंतजार ज़्यादा लंबा नहीं चलेगा और इसी हफ्ते प्रदेश में नई नेतृत्व टीम सामने आ सकती है। बीजेपी ने उत्तर प्रदेश के 75 जिलों को संगठन स्तर पर 98 भागों में बांट रखा है, जिनमें से 84 जिलों में अध्यक्ष पहले ही नियुक्त किए जा चुके हैं। संगठन की यह तैयारी यह दर्शाती है कि प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा के साथ ही उत्तर प्रदेश में बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक नई ऊर्जा के साथ राजनीतिक अभियान तेज किया जाएगा।
लखनऊ में हुई इस बैठक में उत्तर प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को भी प्रमुख विषय के रूप में उठाया गया। संघ के प्रतिनिधियों ने साफ तौर पर चिंता जताई कि बीजेपी के कई सांसद और विधायक उत्तर प्रदेश के इस महत्वपूर्ण अभियान में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा रहे। संघ की ओर से संदेश दिया गया कि उत्तर प्रदेश के जनप्रतिनिधियों को SIR प्रक्रिया में सीधे जुड़ना चाहिए, मतदाताओं को जागरूक करना चाहिए और जमीन पर लोगों की मदद सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बन सके। संघ की यह नाराजगी साफ इशारा है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश में बीजेपी के जनप्रतिनिधियों से संगठनात्मक जिम्मेदारियों को और गंभीरता से निभाने की अपेक्षा की जाएगी।
बैठक में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कार्य के पूरा होने के बाद की रणनीति पर भी चर्चा हुई। संघ और बीजेपी की योजना है कि उत्तर प्रदेश से निकली राम मंदिर की यह आस्था–लहर देश भर में वैचारिक और सांस्कृतिक संवाद का बड़ा आधार बने। तय किया गया कि राम मंदिर के सांस्कृतिक–ऐतिहासिक महत्व को उत्तर प्रदेश से लेकर देश के कोने–कोने तक पहुंचाया जाएगा, पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव तक, अयोध्या में वादा पूरा होने को बड़ी उपलब्धि के रूप में जनता के बीच रखा जाएगा और प्रभारी मंत्रियों को निर्देश दिया जाएगा कि वे अपने प्रवास के दौरान वैचारिक संगठनों व स्थानीय कार्यकर्ताओं से ज्यादा संवाद बढ़ाएं। इस तरह उत्तर प्रदेश में राम मंदिर को केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि विश्वास, विकास और वादे निभाने की राजनीति के मॉडल के रूप में सामने रखने की तैयारी है।
समन्वय बैठक में बार–बार यही बात दोहराई गई कि उत्तर प्रदेश में सरकार और संगठन का तालमेल जितना मजबूत होगा, नीतियां उतनी असरदार तरीके से ज़मीन पर दिखेंगी।
बैठक में खासतौर पर इन बिंदुओं पर फोकस किया गया बूथ स्तर पर संगठन को और सशक्त बनाना, सामाजिक समरसता अभियान को उत्तर प्रदेश के हर वर्ग तक पहुंचाना और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम पायदान तक पहुंचाने के लिए साझा रणनीति तैयार करना। चर्चा के दौरान यह भी संकेत दिया गया कि प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा के साथ–साथ उत्तर प्रदेश में निगमों और बोर्डों में लंबित नियुक्तियों की प्रक्रिया भी तेज की जाएगी, ताकि संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देकर उन्हें आने वाले चुनावी समीकरणों में सक्रिय भूमिका दी जा सके। UP News