इसी बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और आंवला से विधायक धर्मपाल सिंह का नाम संभावित दावेदारों में तेजी से उभर रहा है। लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक समझ के चलते चर्चा के केंद्र में वे लगातार बने हुए हैं

UP News : उत्तर प्रदेश भाजपा में जल्द ही नए प्रदेश अध्यक्ष की तस्वीर साफ होने वाली है। इसी संकेत के साथ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के संगठन कार्यालय से लेकर जिलों की इकाइयों तक सियासी हलचल तेज हो गई है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि कमान ऐसे चेहरे को मिले जो संगठन की पकड़ मजबूत करे, सामाजिक समीकरणों को साधे और सरकार–संगठन की ‘डबल इंजन’ रणनीति को बूथ तक असरदार ढंग से उतार सके। इसी बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और आंवला से विधायक धर्मपाल सिंह का नाम संभावित दावेदारों में तेजी से उभर रहा है। लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक समझ के चलते चर्चा के केंद्र में वे लगातार बने हुए हैं।
धर्मपाल सिंह का जन्म 15 जनवरी 1953 को उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के गुलड़िया गौरीशंकर गांव में हुआ। लोधी समुदाय से आने वाले धर्मपाल सिंह की राजनीतिक पहचान की सबसे बड़ी ताकत उनका ‘जमीनी’ जुड़ाव है ।गांव-देहात की नब्ज़ समझने वाली वही पकड़, जो उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में किसी भी संगठनात्मक फैसले को असरदार बना देती है। ग्रामीण पृष्ठभूमि, स्थानीय रिश्तों और क्षेत्रीय पकड़ के चलते पार्टी के भीतर उन्हें ऐसे नेता के तौर पर देखा जाता है, जो फाइलों की राजनीति नहीं, बल्कि जमीन पर कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच भरोसे की राजनीति करते हैं और भाजपा की संगठनात्मक रणनीति में यही भरोसा अक्सर निर्णायक भूमिका निभाता है।
शैक्षिक पृष्ठभूमि की बात करें तो धर्मपाल सिंह ने पोस्ट ग्रेजुएशन के साथ एलएलबी और बीएड तक की पढ़ाई की है। 1970 में उनका विवाह वंदना देवी से हुआ और उनके तीन पुत्र हैं। खेती-किसानी से जुड़ाव ने उन्हें अपने इलाके के किसान और ग्रामीण सरोकारों से स्वाभाविक रूप से जोड़ रखा है और उत्तर प्रदेश जैसे विशाल व विविधतापूर्ण राज्य में यही ‘ग्राउंड कनेक्ट’ कई बार राजनीतिक मजबूती की सबसे बड़ी कसौटी बन जाता है। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत 1996 से मानी जाती है, जब वे पहली बार विधायक बने। इसके बाद संगठन और सरकार दोनों मोर्चों पर उनकी सक्रियता लगातार बनी रही। वर्तमान में वे योगी सरकार में पशुपालन मंत्री हैं और बरेली की आंवला विधानसभा सीट से विधायक के तौर पर प्रदेश की राजनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में धर्मपाल सिंह को लेकर जो चर्चा तेज है, उसकी जड़ें उनके लंबे अनुभव, संगठन की नब्ज़ पहचानने की क्षमता और सामाजिक समीकरणों पर मानी जा रही पकड़ में बताई जाती हैं। उत्तर प्रदेश में भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष महज संगठन का मुखिया नहीं होता वह चुनावी मशीनरी का ‘मैदान-प्रबंधक’ भी होता है, जो लखनऊ की रणनीति को जिलों, मंडलों और बूथ तक अनुशासन के साथ पहुंचाता है। ऐसे में अगर पार्टी नेतृत्व उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपता है, तो इसे 2027 के रण से पहले संगठन को धार देने, कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और मैदानी तालमेल मजबूत करने की बड़ी तैयारी के तौर पर देखा जाएगा।
उत्तर प्रदेश भाजपा के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी का कार्यकाल पूरा होने के साथ ही उत्तर प्रदेश में संगठन की कमान बदलने की कवायद अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। पार्टी नेतृत्व 2027 के विधानसभा रण से पहले प्रदेश में नया नेतृत्व स्थापित करने के साफ संकेत दे चुका है, ताकि संगठन को नई धार और नई दिशा मिल सके। माना जा रहा है कि नामांकन प्रक्रिया पूरी होते ही तस्वीर लगभग साफ हो जाएगी और 14 दिसंबर को नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर औपचारिक मुहर लग सकती है। इसी वजह से लखनऊ स्थित यूपी बीजेपी मुख्यालय में तैयारियों का दौर तेज है बैठकें, रणनीति और संगठनात्मक गणित हर स्तर पर चल रहा है, जबकि जिलों तक कार्यकर्ताओं में नए ‘कप्तान’ को लेकर उत्सुकता अपने शिखर पर बताई जा रही है। UP News