मेरठ में तेल-गैस संकट से उद्योग प्रभावित, उत्पादन घटा, 50 यूनिट बंद

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण इन संसाधनों की आपूर्ति बाधित हुई है। स्थानीय उद्योग एसोसिएशनों के मुताबिक, अब तक लगभग 8,000 से अधिक उद्योगों ने अपने उत्पादन में कटौती की है और 50 यूनिट पूरी तरह बंद हो गई हैं।

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गैस की कमी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar11 Mar 2026 04:54 PM
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UP News : मेरठ के उद्योगों पर तेल और गैस की कमी का गंभीर असर पड़ा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण इन संसाधनों की आपूर्ति बाधित हुई है। स्थानीय उद्योग एसोसिएशनों के मुताबिक, अब तक लगभग 8,000 से अधिक उद्योगों ने अपने उत्पादन में कटौती की है और 50 यूनिट पूरी तरह बंद हो गई हैं।

उद्योगों पर असर

* प्रमुख प्रभावित क्षेत्रों में प्लास्टिक, रबर, फाइबर ग्लास, पेंट, कॉटन फाइबर, वेल्डिंग, मेटल और पेट्रोकेमिकल शामिल हैं।

* उत्पादन घटने के कारण एमएसएमई सेक्टर, निर्यातक कंपनियों और मशीनरी उद्योग भी संकट में हैं।

* प्लास्टिक और रबर जैसी कच्ची सामग्री की सप्लाई पूरी तरह प्रभावित है।

*कच्चे माल और उत्पादों की कीमतें बढ़ गई हैं। जिनमें प्लास्टिक दाना, रबर, रबर प्रोसेसिंग आयल, अन्य पेट्रोलियम पदार्थ, कामर्शियल गैस सिलेंडर शामिल है।

* ट्रांसफार्मर निर्माण सामग्री के दाम दोगुने हो गए हैं।

* जेम्स ज्वैलरी में चांदी और सोने की कीमतों में भी तेजी आई है।

गैस सिलिंडर की कमी

* इंडस्ट्रियल गैस सिलिंडर का ब्लैक मार्केट रेट 1,800-2,000 रुपये तक पहुँच गया।

* घरेलू एलपीजी सिलिंडर उपलब्ध हैं, लेकिन रिफिल अब केवल 25 दिन बाद बुक किया जा सकता है।

* होटल, रेस्तरां और कैटरिंग व्यवसायों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है।

निर्यात पर असर

* समुद्री मार्ग बदलने से यूरोप तक माल पहुँचाने की लागत बढ़कर $1,400-$7,000 हो गई है।

* समय पर डिलीवरी में देरी और अतिरिक्त लागत की आशंका बनी हुई है।

* शहर में 55,000 घरेलू कनेक्शन हैं, जिन पर आपूर्ति बनी हुई है।

* उद्योगों की आपूर्ति में केवल 20% कटौती संभव है, घरेलू उपयोग पर असर नहीं पड़ेगा।

यह संकट मुख्य रूप से वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति में व्यवधान के कारण उत्पन्न हुआ है। इसके चलते मेरठ के उद्योगों को उत्पादन घटाने, लागत बढ़ने और निर्यात प्रभावित होने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।


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गंगा एक्सप्रेस-वे से बदलेगी मुरादाबाद की तस्वीर, जानें कैसे होगा फायदा

बता दें कि मुरादाबाद लंबे समय से उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में शामिल रहा है। पीतल नगरी के रूप में देश-दुनिया में पहचान रखने वाला यह शहर अब बेहतर सड़क नेटवर्क के सहारे अपने व्यापारिक दायरे को और बड़ा कर सकता है।

तरक्की की राह पर मुरादाबाद
तरक्की की राह पर मुरादाबाद
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar11 Mar 2026 04:40 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के लिए गंगा एक्सप्रेस-वे बड़ी सौगात बनकर उभर रहा है। पीतल उद्योग, निर्यात कारोबार और तेज कनेक्टिविटी के लिए पहचान बनाने की राह पर खड़े मुरादाबाद को अब इस मेगा परियोजना से नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। मेरठ से प्रयागराज तक बन रहा गंगा एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के कई शहरों की तस्वीर बदलने वाला माना जा रहा है, लेकिन इसका खास असर मुरादाबाद पर देखने को मिल सकता है। बता दें कि मुरादाबाद लंबे समय से उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में शामिल रहा है। पीतल नगरी के रूप में देश-दुनिया में पहचान रखने वाला यह शहर अब बेहतर सड़क नेटवर्क के सहारे अपने व्यापारिक दायरे को और बड़ा कर सकता है। गंगा एक्सप्रेस-वे बनने के बाद मुरादाबाद के कारोबारियों, निर्यातकों और आम यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद की कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा फायदा

अभी तक मुरादाबाद से मेरठ, दिल्ली या प्रयागराज की दिशा में सफर करने वाले लोगों को कई दिक्कतों से गुजरना पड़ता है। जाम, भारी ट्रैफिक, व्यस्त हाईवे और लंबा यात्रा समय व्यापार और आम जनजीवन—दोनों पर असर डालता है। उत्तर प्रदेश के इस अहम शहर के लिए गंगा एक्सप्रेस-वे इन चुनौतियों का मजबूत समाधान बन सकता है। इस एक्सप्रेस-वे के जरिए मुरादाबाद की कनेक्टिविटी सिर्फ तेज नहीं होगी, बल्कि ज्यादा व्यवस्थित और भरोसेमंद भी बनेगी। इसका सीधा लाभ उन उद्योगों को होगा, जो समय पर सप्लाई और तेज परिवहन पर निर्भर हैं। उत्तर प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था में मुरादाबाद की भूमिका पहले से मजबूत है, और यह परियोजना उसे नई ऊर्जा दे सकती है।

सिंभावली इंटरचेंज मुरादाबाद के लिए बनेगा अहम लिंक

गंगा एक्सप्रेस-वे से जुड़ाव में सिंभावली इंटरचेंज को मुरादाबाद के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। इसी इंटरचेंज के जरिए मुरादाबाद के लोगों को एक्सप्रेस-वे तक अधिक सीधी और सुगम पहुंच मिल सकेगी। इससे मेरठ की ओर जाने वाला सफर आसान होगा, वहीं प्रयागराज तक पहुंचने का रास्ता भी अधिक तेज हो जाएगा।अब तक जिन मार्गों पर घंटों जाम में फंसना पड़ता था, वहां भविष्य में राहत की तस्वीर दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश के सड़क नेटवर्क में तेजी से हो रहे विस्तार के बीच सिंभावली इंटरचेंज मुरादाबाद के लिए विकास का वास्तविक प्रवेश-द्वार साबित हो सकता है।

20 से 25 किलोमीटर तक घट सकती है दूरी

गंगा एक्सप्रेस-वे बनने के बाद मुरादाबाद और मेरठ के बीच यात्रा दूरी में करीब 20 से 25 किलोमीटर तक की कमी आने की संभावना जताई जा रही है। यह घटत दूरी केवल आंकड़ा नहीं है, बल्कि व्यापारिक शहर मुरादाबाद के लिए बड़ा आर्थिक लाभ भी है। कम दूरी का मतलब है कम ईंधन खर्च, कम समय और तेज डिलीवरी। उत्तर प्रदेश के ऐसे शहर के लिए, जहां से बड़े पैमाने पर उत्पाद देश और विदेश तक भेजे जाते हैं, यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण माना जाएगा। यही कारण है कि व्यापारी वर्ग इस परियोजना को गेमचेंजर के तौर पर देख रहा है।

पीतल उद्योग और निर्यात कारोबार को मिलेगी नई ताकत

मुरादाबाद की पहचान सिर्फ एक शहर के तौर पर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की औद्योगिक ताकत के रूप में भी है। यहां का पीतल उद्योग देशभर में मशहूर है और निर्यात के जरिए यह शहर UP की अर्थव्यवस्था में मजबूत योगदान देता है। बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से यहां के कारोबारी अपने उत्पाद तेजी से बड़े बाजारों तक पहुंचा सकेंगे। दिल्ली, लखनऊ, मेरठ और दूसरे व्यापारिक केंद्रों तक आसान पहुंच बनने से परिवहन लागत में कमी आ सकती है। साथ ही, समय पर डिलीवरी की क्षमता बढ़ने से मुरादाबाद के निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा भी मजबूत होगी। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नक्शे पर मुरादाबाद की स्थिति इससे और प्रभावशाली बन सकती है।

आम यात्रियों को भी मिलेगी बड़ी राहत

गंगा एक्सप्रेस-वे का फायदा केवल उद्योग और व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से आने-जाने वाले आम लोगों के लिए भी यह परियोजना राहत भरी साबित हो सकती है। लंबे सफर में लगने वाला समय कम होगा, सड़क यात्रा अधिक सुविधाजनक बनेगी और कई पारंपरिक रूट्स पर ट्रैफिक दबाव भी घट सकता है।मेरठ, प्रयागराज और दिल्ली की दिशा में आने-जाने वाले यात्रियों को इस बदलाव का सीधा लाभ मिलेगा। नौकरीपेशा, छात्र, छोटे कारोबारी और परिवारों के लिए सफर पहले के मुकाबले अधिक आसान और तेज हो सकता है। UP News

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आशुतोष ब्रह्मचारी को इनामी बताने पर मचा बवाल, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

मामला इस आरोप को लेकर गरमाया है कि अदालत से बरी होने के बाद भी आशुतोष ब्रह्मचारी को पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘इनामी अपराधी’ के रूप में दिखाया जा रहा है।

आशुतोष ब्रह्मचारी विवाद हाईकोर्ट पहुंचा
आशुतोष ब्रह्मचारी विवाद हाईकोर्ट पहुंचा
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar11 Mar 2026 04:08 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में धार्मिक जगत से उठी एक तकरार अब कानूनी बहस का बड़ा विषय बन गई है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और आशुतोष ब्रह्मचारी से जुड़ा विवाद इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। मामला इस आरोप को लेकर गरमाया है कि अदालत से बरी होने के बाद भी आशुतोष ब्रह्मचारी को पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘इनामी अपराधी’ के रूप में दिखाया जा रहा है। इस घटनाक्रम ने सिर्फ एक व्यक्ति की प्रतिष्ठा का सवाल नहीं खड़ा किया, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस के रिकॉर्ड प्रबंधन और सार्वजनिक सूचनाओं की सटीकता पर भी बहस तेज कर दी है। याचिका में कहा गया है कि अदालत से क्लीन चिट मिलने के बाद भी ऐसी पहचान बनाए रखना अन्यायपूर्ण है और इससे उनकी छवि को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।

सोशल मीडिया पोस्ट पर उठा विवाद

याचिका के अनुसार, उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कांधला थाने में दर्ज एक आपराधिक मामले के आधार पर पुलिस ने आशुतोष ब्रह्मचारी को जल्दबाजी में इनामी घोषित कर दिया था। हालांकि बाद में मामला अदालत में पहुंचा और सुनवाई के उपरांत 30 जुलाई 2024 को एसीजेएम न्यायालय, कैराना ने उन्हें इस मुकदमे से बरी कर दिया। इसके बावजूद, आरोप है कि संबंधित पुलिस अधिकारियों के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर आज भी ऐसी पोस्ट मौजूद हैं, जिनमें आशुतोष ब्रह्मचारी को ‘इनामी अपराधी’ के रूप में दर्शाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह की सार्वजनिक प्रस्तुति से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, धार्मिक छवि और जनमानस में बनी पहचान को लगातार आघात पहुंच रहा है।

अनुच्छेद 226 के तहत दाखिल हुई रिट

इलाहाबाद हाईकोर्ट में यह रिट याचिका संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दाखिल की गई है। श्रीकृष्ण सेना के प्रदेश महामंत्री सीताराम यादव की ओर से अधिवक्ता विनोद सिंह ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में कहा गया है कि किसी व्यक्ति को न्यायालय से बरी किए जाने के बाद भी उसके खिलाफ पुरानी और भ्रम फैलाने वाली आपराधिक जानकारी को सार्वजनिक मंचों पर बनाए रखना न्याय के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है। याचिका में स्पष्ट कहा गया है कि किसी नागरिक को न्यायालय से राहत मिलने के बाद भी उसे अपराधी की तरह पेश करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। इसमें यह भी तर्क दिया गया है कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, सम्मान और सामाजिक पहचान उसके मौलिक अधिकारों का अहम हिस्सा है। ऐसे में राज्य की एजेंसियों द्वारा गलत, अधूरी या अपुष्ट सूचना का प्रसार गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़े करता है।

हाईकोर्ट से क्या-क्या मांग की गई

याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट से प्रार्थना की गई है कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि वे तत्काल ऐसी पोस्ट हटाएं, जिनमें आशुतोष ब्रह्मचारी को अब भी “इनामी अपराधी” बताया गया है। इसके साथ ही आधिकारिक दस्तावेजों और रिकॉर्ड में आवश्यक संशोधन करने की भी मांग की गई है। साथ ही अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि भविष्य में बिना उचित सत्यापन किसी भी व्यक्ति का आपराधिक इतिहास सार्वजनिक मंचों पर साझा न किया जाए। याचिका में प्रतिष्ठा को हुई कथित क्षति के संदर्भ में भी न्यायालय से उपयुक्त आदेश पारित करने की मांग रखी गई है।

उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक जवाबदेही का भी बड़ा सवाल

यह मामला अब केवल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और आशुतोष ब्रह्मचारी के बीच विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। इसने उत्तर प्रदेश में पुलिस की डिजिटल जवाबदेही, रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया और आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स पर डाली जाने वाली सूचनाओं की विश्वसनीयता को भी बहस के केंद्र में ला दिया है। अगर अदालत इस मामले में सख्त रुख अपनाती है, तो इसका असर आगे चलकर उत्तर प्रदेश की अन्य एजेंसियों और विभागों की कार्यप्रणाली पर भी दिखाई दे सकता है। खासकर उन मामलों में, जहां किसी व्यक्ति की छवि और अधिकार सीधे तौर पर सरकारी सूचना तंत्र से प्रभावित होते हैं।  UP News