पार्टी सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि भाजपा उन्हें योगी सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी दे सकती है, हालांकि अब तक न तो संगठन और न ही सरकार की ओर से कोई आधिकारिक संकेत मिला है। फिलहाल, संभावित फेरबदल की यह आहट उत्तर प्रदेश की सत्ता-राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा को और हवा दे रही है।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में योगी मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार की चर्चाओं ने एक बार फिर हलचल बढ़ा दी है। दिल्ली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के बाद लखनऊ के सियासी गलियारों में कयासों का दौर तेज हो गया है। इसी बीच उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में चायल की विधायक पूजा पाल का नाम लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। पार्टी सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि भाजपा उन्हें योगी सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी दे सकती है, हालांकि अब तक न तो संगठन और न ही सरकार की ओर से कोई आधिकारिक संकेत मिला है। फिलहाल, संभावित फेरबदल की यह आहट उत्तर प्रदेश की सत्ता-राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा को और हवा दे रही है।
चायल विधानसभा से विधायक पूजा पाल सपा के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंची थीं, लेकिन उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की माफिया-विरोधी मुहिम की खुलकर सराहना करना उनके लिए पार्टी के भीतर महंगा साबित हुआ। अतीक अहमद और अशरफ गैंग पर कार्रवाई को लेकर उन्होंने सार्वजनिक मंच से योगी सरकार की तारीफ की और कहा कि उन्हें इंसाफ मिला इसी के बाद सपा ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। खास बात यह है कि पूजा पाल के पति और पूर्व बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड वर्षों तक उत्तर प्रदेश की राजनीति और कानून-व्यवस्था की बहस का बड़ा केंद्र रहा है। पूजा पाल ने विधानसभा में भी अतीक के कथित साम्राज्य के खत्म होने का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया था, और फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनकी मुलाकात ने भी सियासी गलियारों में चर्चा को और तेज कर दिया।
पूजा पाल को लेकर सियासी चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान वह कई मौकों पर भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करती दिखाई दी थीं। चर्चा यह भी है कि वे सोशल मीडिया पर भाजपा नेताओं की गतिविधियां, तस्वीरें और संदेश लगातार साझा करती रही हैं, जिससे उनके राजनीतिक झुकाव को लेकर कयास और मजबूत हुए। उधर, उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूजा पाल का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी पर सीधा प्रहार किया था। मुख्यमंत्री ने सदन में कहा था कि माफियाओं पर कार्रवाई और पीड़ितों को न्याय मिलने की तस्वीर समझनी हो, तो सपा अपनी ही विधायक पूजा पाल से पूछ सकती है। साफ है कि योगी सरकार इस पूरे घटनाक्रम को उत्तर प्रदेश में “न्याय” और “कानून का राज” के अपने नैरेटिव के तौर पर पेश कर रही है और इसी वजह से पूजा पाल का नाम फिर से राजनीतिक केंद्र में आ गया है।
पूजा पाल को लेकर उठ रही चर्चाओं के पीछे उत्तर प्रदेश की सोशल इंजीनियरिंग भी एक बड़ा कारण मानी जा रही है। दलित समाज से आने वाली पूजा पाल का नाम सपा के पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के संदर्भ में सियासी तौर पर खास वजन रखता है। राजनीतिक जानकारों की दलील है कि अगर भाजपा उन्हें मंत्रिमंडल में जगह देती है, तो इसे उत्तर प्रदेश में पीडीए नैरेटिव को सीधी चुनौती देने और समावेशी प्रतिनिधित्व का संदेश देने वाले कदम के रूप में पेश किया जा सकता है। खासकर ऐसे वक्त में, जब 2027 की चुनावी बिसात धीरे-धीरे बिछ रही है और हर दल जातीय-सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति पर काम कर रहा है। UP News