गीता की व्याख्या करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत के 140 करोड़ नागरिकों के लिए गीता एक दिव्य मंत्र है। भारत का बच्चा-बच्चा यह जानता है कि गीता का ज्ञान भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा दिया गया सच्चा ज्ञान है। उन्होंने कहा कि गीता के ज्ञान को हर इंसान को अपने जीवन

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने बयानों तथा भाषणों के द्वारा खूब चर्चा में रहते हैं। इसी कड़ी में रविवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने एक बड़ी बात कही है। उनके द्वारा कही गई बड़ी बात की उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में खूब चर्चा हो रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह बड़ी बात लखनऊ में आयोजित एक खास समारोह में कही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के द्वारा कही गई बात की सोशल मीडिया पर भी धूम मची हुई है।
रविवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक खास कार्यक्रम हुआ। इस कार्यक्रम का थीम था- ‘‘दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव”। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के सर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत थे। इस खास कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजनेता की बजाय धर्म गुरू के रूप में नजर आए। उन्होंने कहा कि गीता कोई सामान्य ग्रंथ नहीं है। वास्तव में गीता एक दिव्य मंत्र है। गीता की व्याख्या करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत के 140 करोड़ नागरिकों के लिए गीता एक दिव्य मंत्र है। भारत का बच्चा-बच्चा यह जानता है कि गीता का ज्ञान भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा दिया गया सच्चा ज्ञान है। उन्होंने कहा कि गीता के ज्ञान को हर इंसान को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीमद्भगवदगीता भगवान की दिव्य वाणी है। मुख्यमंत्री ने श्लोक ‘धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सव:’ को सुनाया। उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं भी ऐसा नहीं होता होगा, जहां युद्ध का मैदान धर्म क्षेत्र के रूप में जाना जाता हो, लेकिन हमने हर कर्तव्य को पवित्र भाव के साथ माना है। अच्छा करेंगे तो पुण्य और गलत करेंगे तो पाप के भागीदार बनेंगे। यह मानकर हर सनातन धर्मावलंबी अच्छा करने का प्रयास करता है। भारत ने विश्व मानवता को प्राचीन काल से ही संदेश दिया है। हमने कभी नहीं कहा है कि जो मैं कह रहा हूं, वही सब कुछ है या हमारी उपासना विधि सर्वश्रेष्ठ है। सब कुछ होते हुए भी हमने कभी श्रेष्ठता का डंका नहीं पीटा। जो भी आया, उसे शरण दिया। जिसके ऊपर भी विपत्ति और चुनौती आई, सनातन धर्मावलंबी उसके सहयोग के लिए खड़ा हो गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की भूमि ने जियो और जीने दो की प्रेरणा दी। ‘अयं निज: परो वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्’ की प्रेरणा भी भारत की धरती ने ही दी है। हमने पूरी भारत की धरती को धर्म क्षेत्र माना, इसलिए युद्ध का मैदान भी हमारे लिए धर्म क्षेत्र है। यह कर्तव्यों से जुड़ा हुआ क्षेत्र है, क्योंकि धर्म क्षेत्र में युद्ध भी कर्तव्यों के लिए लड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंत में धृतराष्ट्र पूछ ही पड़ते हैं कि बताओ तो क्या होने जा रहा है। इस युद्ध का क्या परिणाम है तो उन्हें बताया जाता है कि युद्ध का परिणाम तो पहले से तय है: यत्र योगेश्वर: कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धर:। तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम॥ हम मानते रहे हैं कि यतो धर्मस्ततो जय:-जहां धर्म और कर्तव्य होगा, वहीं जय होनी है। अधर्म के मार्ग पर चलने वाले की कभी विजय नहीं हो सकती। यही भारत के सनातन धर्म की परंपरा व प्रकृति का अटूट नियम है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय के लिए दो उदाहरण भी दिए। कहा कि ‘स्वधर्मे निधनं श्रेय:, परधर्मों भयावह:’ यानी अपने धर्म और कर्तव्य पर चलकर मृत्यु को वरण करना श्रेयस्कर है, लेकिन स्वार्थ के लिए कर्तव्य से च्युत होना पतन का कारण बनेगा। कभी भी धोखे से यह मत करना। भगवान ने कर्म की प्रेरणा दी, वह कर्म, जिसमें फल की इच्छा न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीज लगते ही हम फल की इच्छा करते हैं। बीज सही लगेगा तो पेड़ फलेगा और फल दे ही देगा। भगवान श्रीकृष्ण ने भी निष्काम कर्म की प्रेरणा दी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत को निष्काम कर्म का प्रेरणास्रोत बताया। बोले-राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ शताब्दी महोत्सव के कार्यक्रम से जुड़ रहा है। दुनिया से आए अंबेसडर, हाई कमिश्नर्स हमसे पूछते हैं कि आप लोगों का आरएसएस से जुड़ाव है, तब हम कहते हैं कि हां! हमने स्वयंसेवक के रूप में कार्य किया है। वे इसकी फंडिंग का पैटर्न पूछते हैं, तब हम बताते हैं कि यहां ओपेक के देश या इंटरनेशनल चर्च पैसा नहीं देता। यहां संगठन समाज के सहयोग से खड़ा हो रहा है और समाज के लिए हर क्षेत्र में समर्पित भाव से कार्य करता है। किसी भी पीडि़त की जाति, मत-मजहब, क्षेत्र, भाषा की परवाह किए बिना हर स्वयंसेवक उसकी सेवा को ही अपना कर्तव्य मानता है।