नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि कार्यक्रम से पहले रूट और स्थल का आकलन, कार्यक्रम के दौरान तैनाती और समन्वय, और कार्यक्रम के बाद भीड़ व यातायात की सुरक्षित निकासी तक हर स्तर पर निगरानी रखे ताकि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था एक ही मानक पर, एक ही सख्ती के साथ लागू हो सके।

UP News : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में सामने आई हालिया सुरक्षा चूक के बाद उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्ती का बड़ा कदम उठाया है। प्रदेशभर में अब नई, कड़ी और एकरूप (स्टैंडर्ड) सुरक्षा व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में मुख्यालय ने सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को पत्र भेजकर साफ निर्देश दिए हैं कि मुख्यमंत्री के दौरे, जनसभाओं, कार्यक्रमों और आवागमन के दौरान सामान्य सुरक्षा घेरे के साथ-साथ विशेष रूप से प्रशिक्षित, समर्पित टीम की तैनाती हर हाल में सुनिश्चित की जाए। संकेत साफ हैं उत्तर प्रदेश में अब वीआईपी सुरक्षा को लेकर ‘जीरो-लैप्स’ नीति पर अमल होगा और कहीं भी छोटी-सी चूक पर भी जवाबदेही तय की जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश के हर जिले में मुख्यमंत्री की सुरक्षा के लिए 10 सदस्यीय स्पेशल टीम बनाई जाएगी, जो सिर्फ वीआईपी मूवमेंट और कार्यक्रमों की सुरक्षा पर फोकस करेगी। इस टीम में एक सीओ, एक इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर समेत चयनित पुलिसकर्मी शामिल होंगे। अधिकारियों का कहना है कि टीम को इस तरह तैयार रखा जाएगा कि किसी भी संदिग्ध स्थिति, भीड़ के दबाव या आपात घटना पर तुरंत और निर्णायक कार्रवाई हो सके और सुरक्षा प्रोटोकॉल में जरा-सी भी ढिलाई अब स्वीकार नहीं होगी। इसके साथ ही, हर जिले में एक सीओ को “मुख्यमंत्री सुरक्षा” का नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा, जो पूरे सुरक्षा तंत्र की कमान संभालेगा। नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि कार्यक्रम से पहले रूट और स्थल का आकलन, कार्यक्रम के दौरान तैनाती और समन्वय, और कार्यक्रम के बाद भीड़ व यातायात की सुरक्षित निकासी तक हर स्तर पर निगरानी रखे ताकि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था एक ही मानक पर, एक ही सख्ती के साथ लागू हो सके।
पुलिस मुख्यालय ने साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में गठित होने वाली इस विशेष सुरक्षा टीम को केवल तैनात नहीं किया जाएगा, बल्कि उसे विशेष प्रशिक्षण देकर ‘प्रो-लेवल’ तैयार किया जाएगा। ट्रेनिंग मॉड्यूल में वीआईपी सुरक्षा की बारीकियाँ, भीड़ नियंत्रण की रणनीति, खतरे के संकेतों की पहचान, रूट सेफ्टी, त्वरित प्रतिक्रिया (क्विक रिस्पॉन्स) और आधुनिक सुरक्षा तकनीकों का अभ्यास शामिल होगा। मुख्यालय का आकलन है कि जब टीम समर्पित भी होगी और प्रशिक्षित भी, तो वीआईपी मूवमेंट के दौरान होने वाली छोटी-सी चूक भी समय रहते पकड़ी जा सकेगी और सुरक्षा व्यवस्था रिएक्टिव नहीं, प्री-एम्प्टिव तरीके से काम करेगी।
सूत्रों के अनुसार, गोरखपुर में हाल के दिनों में सामने आए सुरक्षा प्रकरणों को गंभीर चेतावनी मानते हुए यह फैसला लिया गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने खासतौर पर मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर समेत संवेदनशील जिलों में इस नई व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री के किसी भी दौरे से पहले स्पेशल टीम फुल अलर्ट मोड में सक्रिय कर दी जाएगी और कार्यक्रम के समापन तक तैनाती एक पल के लिए भी ढीली नहीं होगी। इसके साथ ही, खुफिया इनपुट के आधार पर टीम को मौके के हिसाब से अतिरिक्त दिशा-निर्देश दिए जाएंगे, ताकि संभावित जोखिम को पहले ही भांपकर रोका जा सके। मुख्यालय ने दो टूक कहा है कि सुरक्षा में जरा-सी भी लापरवाही या चूक सामने आने पर सीधे जिम्मेदारी तय होगी और संबंधित अफसरों पर कार्रवाई की जाएगी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, कई जिलों में टीम गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि कुछ जगहों पर इसे अंतिम रूप देकर जल्द ही मैदान में उतारने की तैयारी है।
उत्तर प्रदेश में हालिया घटनाओं ने मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रशासन का फोकस और तेज कर दिया है। 4 दिसंबर को मुख्यमंत्री एक कार्यक्रम से लौट रहे थे, तभी असुरन के पास उनके काफिले के आगे एक प्राइवेट बस आ जाने से सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल उठे जिसके बाद संबंधित थानेदार और चौकी इंचार्ज को हटाया गया। वहीं 20 दिसंबर को गोरखनाथ क्षेत्र में नए पुल के लोकार्पण के दौरान कार्यक्रम स्थल के पास गाय के पहुंचने की घटना सामने आई, जिस पर नगर निगम के एक सुपरवाइजर को निलंबित किया गया। इन दोनों प्रकरणों को पुलिस मुख्यालय ने चेतावनी नहीं, सबक की तरह लिया है। संकेत साफ है कि अब मुख्यमंत्री की सुरक्षा में “जीरो-एरर” नीति के तहत काम होगा और सुरक्षा प्रबंधों को जिलेवार अलग-अलग अंदाज में नहीं, बल्कि एक समान, पेशेवर और प्रशिक्षण-आधारित ढांचे में ढालकर हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी। UP News