उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संन्यासी से राजनेता और मुख्यमंत्री तक का सफर उन्हें ‘कर्म योगी’ की अलग पहचान देता है। अयोध्या से वाराणसी तक महिला सशक्तीकरण, आंगनबाड़ी, बाल विकास और पोषण को लेकर योगी सरकार की प्रमुख पहलों पर पढ़िए पूरी खबर।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम अब केवल एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि लगातार काम और फैसलों के जरिए शासन की अपनी अलग शैली स्थापित करने वाले मुख्यमंत्री के रूप में लिया जाता है। अयोध्या से लेकर वाराणसी तक पिछले दो दिनों में सामने आए उनके कार्यक्रमों ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि उनकी सरकार के एजेंडे में महिला सशक्तीकरण, बच्चों का पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और जमीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं की पहुंच प्रमुख विषय हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में नव-नियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को नियुक्ति-पत्र वितरित किए। इस अवसर पर उन्होंने महिला एवं बाल विकास से संबंधित योजनाओं को मजबूत करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में टेक होम राशन (THR) पर आधारित कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया तथा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को साड़ी के लिए डीबीटी के माध्यम से धनराशि हस्तांतरित की गई। मेधावी विद्यार्थियों, पोषण, शिक्षा एवं महिला कल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली अधीक्षिकाओं तथा माउंट एवरेस्ट बेस कैंप अभियान पूरा करने वाली बालिकाओं को भी सम्मानित किया गया। इसी कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की गईं। रिपोर्टों के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाकर 12 हजार रुपये तथा सहायिकाओं का मानदेय 6 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया है। UP News
योगी सरकार के महिला एवं बाल विकास से जुड़े कार्यक्रमों का मूल उद्देश्य केवल योजनाओं की घोषणा करना नहीं बल्कि गांव और मोहल्ले के स्तर पर उनकी पहुंच सुनिश्चित करना है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों तक पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने से लेकर प्रारंभिक बाल शिक्षा तक उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। अयोध्या में आयोजित कार्यक्रम में नई आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र देकर सरकार ने जमीनी स्तर पर इस व्यवस्था को और मजबूत करने का संदेश दिया। साथ ही महिला कर्मियों के सम्मान, आर्थिक सहयोग और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कदमों को भी कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया। UP News
इसके अगले दिन वाराणसी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर की मौजूदगी में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए। केंद्र सरकार के अनुसार 9वां राष्ट्रीय पोषण माह 9 सितंबर 2026 से वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में शुरू हुआ है। इस वर्ष अभियान में आंगनबाड़ी केंद्रों को समुदाय आधारित पोषण और प्रारंभिक बाल विकास की गतिविधियों के केंद्र में रखने पर विशेष जोर है। इस अभियान का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, बच्चों, किशोरों और उनके परिवारों में पोषण, स्वास्थ्य एवं देखभाल से जुड़े व्यवहार को मजबूत करना है। सरकार की ओर से संतुलित एवं प्रोटीनयुक्त आहार, बच्चों की वृद्धि की निगरानी, मातृ पोषण, शिशु एवं छोटे बच्चों के उचित आहार तथा स्वच्छता जैसे विषयों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत सरकार की नवीन पोषण गाइडलाइन के अनुरूप रेसिपी आधारित अनुपूरक पोषाहार सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर लागू किया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों तथा महिलाओं को उपलब्ध कराए जाने वाले पोषण आहार की गुणवत्ता और विविधता को बेहतर बनाना है। योगी सरकार का कहना है कि पोषण सेवाओं को प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण और निरंतर मजबूत करके उत्तर प्रदेश में स्वस्थ और सशक्त पीढ़ी तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है। राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत वर्ष 2018 में पोषण को राष्ट्रीय विकास के एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए पोषण अभियान की निरंतरता है। 2026 के अभियान में आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका तथा सामुदायिक भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक सफर सामान्य राजनेताओं से काफी अलग रहा है। उनका जन्म 5 जून 1972 को पंचुर, गढ़वाल, उत्तराखंड में हुआ। उनका मूल नाम अजय सिंह बिष्ट बताया जाता है। उन्होंने विज्ञान विषय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक प्रोफाइल में उनकी शैक्षिक योग्यता विज्ञान स्नातक तथा पेशा धार्मिक मिशनरी एवं सामाजिक कार्यकर्ता दर्ज है। युवा अवस्था में उन्होंने सांसारिक जीवन त्यागकर संन्यास ग्रहण किया और गोरखनाथ परंपरा से जुड़े। उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ रहे। गोरखनाथ मठ से जुड़ाव ने उनके जीवन और सार्वजनिक भूमिका को नई दिशा दी।
योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 1998 में गोरखपुर लोकसभा सीट से पहली बार चुनाव जीता। उस समय उनकी उम्र महज 26 वर्ष थी और वे 12वीं लोकसभा के सबसे कम उम्र के सदस्यों में रहे। इसके बाद उन्होंने 1999, 2004, 2009 और 2014 में भी गोरखपुर से लोकसभा चुनाव जीते। इस तरह मुख्यमंत्री बनने से पहले वे लगातार पांच बार गोरखपुर का लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके थे। उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक प्रोफाइल में भी 1998 से 2014 तक उनके पांच लोकसभा कार्यकाल दर्ज हैं। सांसद के रूप में उन्होंने विभिन्न संसदीय समितियों में भी काम किया। उनकी राजनीतिक पहचान पूर्वी उत्तर प्रदेश से निकलकर धीरे-धीरे पूरे प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंची। UP News
वर्ष 2017 उत्तर प्रदेश की राजनीति में योगी आदित्यनाथ के लिए निर्णायक वर्ष साबित हुआ। 19 मार्च 2017 को उन्होंने पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके बाद वर्ष 2022 में भाजपा की दोबारा सरकार बनने पर उन्होंने 25 मार्च 2022 को लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के आधिकारिक रिकॉर्ड में दोनों कार्यकाल दर्ज हैं। इस तरह योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ऐसे नेता के रूप में उभरे, जिन्होंने धार्मिक-सामाजिक पृष्ठभूमि से निकलकर देश के सबसे बड़े राज्य की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाली और लगातार दूसरी बार सरकार का नेतृत्व किया। UP News
योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक यात्रा को देखें तो इसमें तीन अलग-अलग चरण स्पष्ट दिखाई देते हैं पहला चरण गोरखनाथ परंपरा से जुड़ा संन्यासी जीवन, दूसरा चरण पांच बार के लोकसभा सांसद के रूप में संसदीय राजनीति और तीसरा चरण उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शासन की जिम्मेदारी। यही वजह है कि उनके समर्थक उन्हें केवल राजनेता के रूप में नहीं बल्कि ‘कर्म योगी’ के रूप में देखते हैं। मुख्यमंत्री के रूप में उनका सार्वजनिक कार्यक्रमों का लगातार दौरा, अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें, विकास परियोजनाओं का निरीक्षण, जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सक्रियता उनकी कार्यशैली की पहचान बन चुके हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक प्रोफाइल में भी शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा तथा धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी रुचि दर्ज है। UP News
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में महिला और बाल विकास की योजनाओं का प्रभाव करोड़ों लोगों तक पहुंचता है। आंगनबाड़ी केंद्र इस व्यवस्था की सबसे निचली लेकिन सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं। एक ओर जहां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों और महिलाओं तक पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाती हैं, वहीं दूसरी ओर इन्हीं केंद्रों के माध्यम से प्रारंभिक बाल शिक्षा और पोषण संबंधी जागरूकता भी बढ़ाई जाती है। इसलिए अयोध्या में नियुक्ति पत्र वितरण और वाराणसी में राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ दोनों कार्यक्रमों को एक साथ देखें तो योगी सरकार का संदेश स्पष्ट दिखाई देता है कि महिला सशक्तीकरण और स्वस्थ बचपन को उत्तर प्रदेश के विकास की बुनियादी शर्त माना जा रहा है। UP News
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि प्रदेश में सुशासन, विकास और जनकल्याण को प्राथमिकता दी जा रही है। महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में आंगनबाड़ी व्यवस्था को मजबूत करना इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है। अयोध्या में महिलाओं को नियुक्ति पत्र, सम्मान और आर्थिक सहायता से जोड़ना तथा वाराणसी से पोषण माह का शुभारंभ करना केवल दो अलग-अलग सरकारी कार्यक्रम नहीं हैं। इनके पीछे एक व्यापक संदेश है स्वस्थ महिला, सुरक्षित बचपन और मजबूत परिवार के माध्यम से मजबूत उत्तर प्रदेश का निर्माण। राष्ट्रीय पोषण माह के इस वर्ष के अभियान में भी केंद्र सरकार ने ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ की भावना के साथ समुदाय की भागीदारी और जवाबदेही को महत्वपूर्ण माना है। UP News
योगी आदित्यनाथ के समर्थकों के लिए उनका सफर एक ऐसे संन्यासी की यात्रा है जिसने राजनीति को सत्ता प्राप्ति के बजाय एक बड़े सार्वजनिक दायित्व के रूप में स्वीकार किया। पांच बार सांसद रहने के बाद मुख्यमंत्री बनना और फिर लगातार दूसरी बार प्रदेश की सत्ता संभालना उनकी राजनीतिक यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं। आज अयोध्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सम्मान से लेकर वाराणसी में राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ तक उनके कार्यक्रमों में महिला, बच्चे, स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण जैसे विषय प्रमुखता से दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि ‘उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री राजनेता से बन गए हैं पूरे कर्म योगी’ जैसी राजनीतिक टिप्पणी उनके समर्थक वर्ग में लोकप्रिय हो सकती है। हालांकि मुख्यमंत्री की कार्यशैली और सरकार की उपलब्धियों का अंतिम मूल्यांकन जनता, आंकड़ों और समय के आधार पर ही होगा। फिलहाल अयोध्या और काशी से निकला संदेश साफ है ‘सशक्त नारी, सुरक्षित बचपन, समर्थ उत्तर प्रदेश’ को सरकार अपने विकास मॉडल के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में आगे बढ़ा रही है। UP News
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